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पूर्व जिलाधिकारी के आदेश भी जांच के घेरे में
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:06 AM IST
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पूर्व जिलाधिकारी के आदेश भी जांच के घेरे में
सहायक आयुक्त स्टांप एवं निबंधन की गिरफ्तारी के बाद सर्किल रेट निर्धारण के मामले में पूर्व जिलाधिकारी के आदेश भी जांच के घेरे में हैं। साल 2016 में नियम विपरीत जीटी रोड स्थित रेड मॉल की जमीन का सर्किल रेट कम करने का मामला सामने आया है।
ऐसे में डीएम मिनिस्ती एस. द्वारा शासन को भेजी गई एमडीएम वित्त की जांच रिपोर्ट के बाद खलबली मची है। शासन स्तर से विभागीय जांच बैठाए जाने की स्थिति में सर्किल रेट आधे किए जाने का मामला एआईजी स्टांप के गले की फांस बन सकता है।
दरअसल, सहायक आयुक्त स्टांप राजेश कुमार शर्मा के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में रेड माल की जमीन के सर्किल रेट आधे करने का आरोप लगाया गया है, जो दिसंबर 2016 को 1.40 लाख रुपये से घटाकर 90 हजार रुपये वर्ग मीटर कर दिए गए थे।
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सबसे दिलचस्प बात यह है कि सर्किल रेट संशोधन करने के लिए नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार अगर किसी सर्किल के दाम बढ़ाए या कम किए जाते हैं तो फिर उसका निर्धारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा किया जाता है।
कमेटी में डीएम के अतिरिक्त एडीएम वित्त व संबंधित क्षेत्र का सब रजिस्ट्रार व सहायक आयुक्त स्टांप का शामिल होना जरूरी है लेकिन साल 2016 में सर्किल रेट में संशोधन सिर्फ सहायक आयुक्त स्टांप और जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से कर दिए गए। ऐसे में पूर्व जिलाधिकारी द्वारा सर्किल रेट निर्धारण करने संबंधित जारी किए गए आदेश भी सवालों के घेरे में हैं, जो विभागीय जांच के बिंदु बन सकते हैं।
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सहायक आयुक्त स्टांप एवं निबंधन की गिरफ्तारी के बाद सर्किल रेट निर्धारण के मामले में पूर्व जिलाधिकारी के आदेश भी जांच के घेरे में हैं। साल 2016 में नियम विपरीत जीटी रोड स्थित रेड मॉल की जमीन का सर्किल रेट कम करने का मामला सामने आया है।
ऐसे में डीएम मिनिस्ती एस. द्वारा शासन को भेजी गई एमडीएम वित्त की जांच रिपोर्ट के बाद खलबली मची है। शासन स्तर से विभागीय जांच बैठाए जाने की स्थिति में सर्किल रेट आधे किए जाने का मामला एआईजी स्टांप के गले की फांस बन सकता है।
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दरअसल, सहायक आयुक्त स्टांप राजेश कुमार शर्मा के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में रेड माल की जमीन के सर्किल रेट आधे करने का आरोप लगाया गया है, जो दिसंबर 2016 को 1.40 लाख रुपये से घटाकर 90 हजार रुपये वर्ग मीटर कर दिए गए थे।
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सबसे दिलचस्प बात यह है कि सर्किल रेट संशोधन करने के लिए नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार अगर किसी सर्किल के दाम बढ़ाए या कम किए जाते हैं तो फिर उसका निर्धारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा किया जाता है।
कमेटी में डीएम के अतिरिक्त एडीएम वित्त व संबंधित क्षेत्र का सब रजिस्ट्रार व सहायक आयुक्त स्टांप का शामिल होना जरूरी है लेकिन साल 2016 में सर्किल रेट में संशोधन सिर्फ सहायक आयुक्त स्टांप और जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से कर दिए गए। ऐसे में पूर्व जिलाधिकारी द्वारा सर्किल रेट निर्धारण करने संबंधित जारी किए गए आदेश भी सवालों के घेरे में हैं, जो विभागीय जांच के बिंदु बन सकते हैं।