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तुलसी निकेतन में नए भवन निर्माण से पहले जीडीए लेगा विधिक राय
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तुलसी निकेतन में नए भवन निर्माण से पहले जीडीए लेगा विधिक राय
गाजियाबाद। तुलसी निकेतन योजना के जर्जर भवनों के बगैर ध्वस्तीकरण के जीडीए की योजना बहुमंजिला टावरों के निर्माण की है। इस योजना पर चलने के लिए जीडीए को योजना में खाली जमीन पर निर्माण शुरू करना होगा। योजना में वर्तमान में खाली भूखंड में अधिकांश जमीन पर पार्क व ग्रीन एरिया है। निर्माण संबंधी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की आपत्तियों से बचने के लिए जीडीए निर्माण से पहले विधिक राय लेगा।
विधिक राय में कानूनी संबंधी दुविधा होने पर योजना में परिवर्तन किया जा सकता है। तुलसी निकेतन योजना में 1988 में बने में 2008 ईडब्ल्यूएस और 284 एलआईजी की जर्जर हालत को देखते जीडीए की योजना पुराने भवनों की जगह नए 10 मंजिला टावरों का निर्माण करने की है। योजना में रहने वाले आवंटियों और नोटरी, पावर ऑफ अटॉर्नी व किराएदारों को राहत देने के लिए जीडीए ने बगैर उन्हें बेघर किए भवनों का निर्माण कराने की है।
अभी योजना में खाली जमीन पर पार्कों के साथ ग्रीन एरिया है। ऐसे में जीडीए की योजना इस जमीन पर भवनों का निर्माण कराकर दूसरे चरण में पुराने भवनों को ध्वस्त कर, वहां पार्क आदि ग्रीन एरिया विकसित करने की है। ऐसे में बहुमंजिला टावरों के निर्माण से पहले कानूनी संबंधी पचड़ों में बचने के लिए जीडीए की ओर से विधि अनुभाग से राय मांगी गई है। जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा का कहना है कि प्राधिकरण की मंशा कम से कम लोगों के घरों को खाली कराकर नए भवनों का निर्माण कराने की है। योजना में खाली स्थान पर पार्क की जमीन होने के कारण विधिक राय ली जाएगी।
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गाजियाबाद। तुलसी निकेतन योजना के जर्जर भवनों के बगैर ध्वस्तीकरण के जीडीए की योजना बहुमंजिला टावरों के निर्माण की है। इस योजना पर चलने के लिए जीडीए को योजना में खाली जमीन पर निर्माण शुरू करना होगा। योजना में वर्तमान में खाली भूखंड में अधिकांश जमीन पर पार्क व ग्रीन एरिया है। निर्माण संबंधी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की आपत्तियों से बचने के लिए जीडीए निर्माण से पहले विधिक राय लेगा।
विधिक राय में कानूनी संबंधी दुविधा होने पर योजना में परिवर्तन किया जा सकता है। तुलसी निकेतन योजना में 1988 में बने में 2008 ईडब्ल्यूएस और 284 एलआईजी की जर्जर हालत को देखते जीडीए की योजना पुराने भवनों की जगह नए 10 मंजिला टावरों का निर्माण करने की है। योजना में रहने वाले आवंटियों और नोटरी, पावर ऑफ अटॉर्नी व किराएदारों को राहत देने के लिए जीडीए ने बगैर उन्हें बेघर किए भवनों का निर्माण कराने की है।
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अभी योजना में खाली जमीन पर पार्कों के साथ ग्रीन एरिया है। ऐसे में जीडीए की योजना इस जमीन पर भवनों का निर्माण कराकर दूसरे चरण में पुराने भवनों को ध्वस्त कर, वहां पार्क आदि ग्रीन एरिया विकसित करने की है। ऐसे में बहुमंजिला टावरों के निर्माण से पहले कानूनी संबंधी पचड़ों में बचने के लिए जीडीए की ओर से विधि अनुभाग से राय मांगी गई है। जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा का कहना है कि प्राधिकरण की मंशा कम से कम लोगों के घरों को खाली कराकर नए भवनों का निर्माण कराने की है। योजना में खाली स्थान पर पार्क की जमीन होने के कारण विधिक राय ली जाएगी।
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