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फर्जी फर्म बनाकर 10 करोड़ की हेराफेरी
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Updated Fri, 17 Mar 2017 10:02 PM IST
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एमबीए की परीक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा
- फोटो : demo pic
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वाणिज्य कर विभाग में फर्जी फर्म बनाकर 10 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने का मामला सामने आया है। विभाग ने फर्म का पंजीयन निरस्त कर दिया है और जिन लोगों ने फर्म से खरीद-फरोख्त का फर्जीवाड़ा किया उनसे टैक्स वसूली की गई।
विभाग के एडिशनल कमिश्नर एके गुप्ता ने बताया कि गोविंदपुरम स्थित आरएवी ट्रैडर्स ने बड़ी चालाकी से यह खेल खेला। फर्म ने बिना खरीद-बिक्री किए ही कागजों में 10 करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त दिखाकर विभाग में टैक्स भी जमा करा दिया।
विभागीय टीम ने जब इसकी जांच की तो बड़ा खेल सामने आया। फर्म ने माल की कोई खरीद-फरोख्त नहीं की। जिन लोगों ने कागजों में फर्म से खरीद दिखाई है, उनसे टैक्स की वसूली की गई है। साथ ही फर्म का पंजीयन भी निरस्त कर दिया गया है। इस फर्म से डेढ़ करोड़ रुपये टैक्स वसूला गया है।
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पहले भी पकड़ी गईं हैं फर्जी फर्म
वाणिज्य कर विभाग में पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। टैक्स माफिया नकली बहती बनवाकर आसानी से टैक्स चोरी करते हैं। बाद में जब बहती की व्यवस्था ऑनलाइन की गई तो फर्जीवाडे़ का तरीका भी बदल गया।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी फर्जी फर्म बनाकर की जाती है। पंजीयन लेते वक्त कागजी खानापूर्ति होती है। इसके बाद फर्म बंद हो जाती है, लेकिन फर्म के इनवायस के जरिए सिर्फ कागजों में ही कारोबार किया जाता है।
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विभाग के एडिशनल कमिश्नर एके गुप्ता ने बताया कि गोविंदपुरम स्थित आरएवी ट्रैडर्स ने बड़ी चालाकी से यह खेल खेला। फर्म ने बिना खरीद-बिक्री किए ही कागजों में 10 करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त दिखाकर विभाग में टैक्स भी जमा करा दिया।
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विभागीय टीम ने जब इसकी जांच की तो बड़ा खेल सामने आया। फर्म ने माल की कोई खरीद-फरोख्त नहीं की। जिन लोगों ने कागजों में फर्म से खरीद दिखाई है, उनसे टैक्स की वसूली की गई है। साथ ही फर्म का पंजीयन भी निरस्त कर दिया गया है। इस फर्म से डेढ़ करोड़ रुपये टैक्स वसूला गया है।
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पहले भी पकड़ी गईं हैं फर्जी फर्म
वाणिज्य कर विभाग में पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। टैक्स माफिया नकली बहती बनवाकर आसानी से टैक्स चोरी करते हैं। बाद में जब बहती की व्यवस्था ऑनलाइन की गई तो फर्जीवाडे़ का तरीका भी बदल गया।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी फर्जी फर्म बनाकर की जाती है। पंजीयन लेते वक्त कागजी खानापूर्ति होती है। इसके बाद फर्म बंद हो जाती है, लेकिन फर्म के इनवायस के जरिए सिर्फ कागजों में ही कारोबार किया जाता है।