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रोजगार हो रहा खत्म: एनसीआर के इन दो शहरों में 200 कंपनियों में 10 हजार रोबोट

Sun, 12 Jun 2016 02:43 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 12 Jun 2016 02:43 PM IST
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Getting jobs finished: 10 thousand robots in these two cities of NCR
रोबोट - फोटो : अमर उजाला

रोबोट और विकसित होती तकनीक से रोजगार के अवसर कम होने की आशंका जाहिर करके रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है।

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मुंबई के एक कार्यक्रम में दिए गए उनके इस बयान के बाद श्रमिक संगठनों और रोबोटाइजेशन के दुष्प्रभाव को लेकर काम करने वालों की दलील और मजबूत हुई है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियां तो कम हो ही गई हैं। यदि निजी क्षेत्र के रोजगार रोबोट खत्म कर देगा तो बेरोजगारों की फौज का क्या होगा।
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रिजर्व बैंक के गवर्नर की आशंका देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल हब में भी बिल्कुल सही साबित हो रही है। यहां रोबोट पर उद्योगों की बढ़ती निर्भरता ने रोजगार के अवसर काफी कम कर दिए हैं।

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मारुति के प्लांट में तो ज्यादातर काम रोबो ही करेंगे

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कंपनी में काम करते रोबोट - फोटो : अमर उजाला

श्रमिक और औद्योगिक संगठनों के मुताबिक इस समय सबसे ज्यादा रोबोट ऑटोमोबाइल सेक्टर में काम कर रहे हैं। यह गति तेजी से बढ़ रही है। इस समय गुड़गांव-फरीदाबाद की करीब 200 कंपनियों में कम से कम 10000 रोबोट काम कर रहे हैं।

मेहसाणा, गुजरात में लगने जा रहे मारुति के प्लांट में तो ज्यादातर काम रोबो ही करेंगे। यहां लगभग 1000 रोबो लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

इंपैक्ट ऑफ रोबोटाइजेशन ऑन इंडियन इंडस्ट्री विषय पर रिसर्च पेपर लिखने वाले प्रोफेसर आरके गुप्ता कहते हैं कि कंपनियों की निर्भरता रोबोट पर बढ़ रही है, लेकिन इसकी अति खतरनाक होगी।

उद्योगपति क्यों दे रहे हैं रोबोट पर जोर

Getting jobs finished: 10 thousand robots in these two cities of NCR

इससे जॉब अवसर में कमी होगी, जिससे बेकारी बढ़ेगी। आने वाले दिनों में रोबोट न सिर्फ इंडस्ट्री बल्कि सेना में भी नौकरियों के अवसर कम करेंगे। यह आदमी की जगह लेंगे। रिजर्व बैंक के गवर्नर की आशंका बिल्कुल सही है।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रदेश सचिव बेचू गिरी ने कहा कि खतरनाक कार्यों के लिए रोबोट के इस्तेमाल का स्वागत है, लेकिन हर जगह इसे लगाकर रोजगार के अवसर कम करना ठीक नहीं। दुर्भाग्य से यहां रोबो का इस्तेमाल मजबूरी में नहीं, बल्कि मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा है।

उद्योगपति क्यों दे रहे हैं रोबोट पर जोर
-न तो वेतन देना पड़ता है और न छुट्टी।
-ईएसआई, ईपीएफ, ग्रेच्युटी और वेतन वृद्धि का कोई चक्कर नहीं।
-फैक्ट्रियों में हड़ताल आम बात है। रोबोट इससे मुक्त हैं।
-आदमी के काम करने की एक क्षमता है, लेकिन रोबो से चाहे जितना काम करा लो।
-कई कंपनियों में इनसे तीन शिफ्ट में काम लिया जा रहा है।
-औद्योगिक दुर्घटनाएं कम होती हैं। प्रोग्रामिंग के हिसाब से काम करता है।
-उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी होती है। कबाड़ नाम मात्र का होता है।
-रोबोट से स्किल्ड वर्करों की कमी पूरी होती है।

पहली दुर्घटना, सुरक्षा पर सवाल

रोबोट से देश में पहली दुर्घटना और मौत के मामले का गुड़गांव गवाह है। 12 अगस्त 2015 मानेसर की एसकेएच मेटल कंपनी में कार्यरत उन्नाव (यूपी) निवासी 24 वर्षीय रामजी की रोबोट की चपेट में आने से मौत हो गई थी।

श्रम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक देश में रोबोट के इस्तेमाल को लेकर अब तक कोई गाइड लाइन नहीं है। मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जाघूं के मुताबिक किस इंडस्ट्री में रोबोट से कैसा काम होता है और उसके खतरे क्या-क्या हैं, इसकी जानकारी श्रम विभाग को नहीं है। इसके बारे में कई बार सवाल किए, लेकिन जवाब नहीं मिला।

इंडस्ट्री में कितने रोबोट काम कर रहे हैं, इसका कोई सर्वे नहीं किया गया है। इसके इस्तेमाल और सुरक्षा से संबंधित गाइडलाइन सेंट्रल लेबर इंस्टीट्यूट मुंबई के लोग बना रहे हैं। उसे केंद्र सरकार अप्रूव करेगी, तब इसे इंडस्ट्री में लागू किया जाएगा।
अनुराग गहलावत, ज्वाइंट डायरेक्टर, इंडस्ट्रियल सेफ्टी एंड हेल्थ

इन कंपनियों में रोबोट से होता है काम
हीरो, मारुति, जेबीएम, एचकेएन, इंडो ऑटो टेक, वेल सोनिका, वीजी इंडस्ट्रीज, एस्कॉर्ट्स, जेसीबी, यामहा, शोवा इंडिया आदि।

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