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जीबी पंत : मोबाइल से एक्सरे का फोटो लेकर डॉक्टरों को दिखाते हैं मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 05 Jun 2018 11:22 AM IST
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gb pant hospital
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जीबी पंत इन दिनों बुरे हालात से गुजर रहा है। अव्यवस्थाओं की वजह से मरीज और तीमारदारों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कभी हेपेटाइटिस सी की वैक्सीन नहीं मिलती तो कभी ईको जैसी जांच के लिए सात महीने की वेटिंग दी जाती है।
अब स्थिति यह है कि यहां एक्सरे फिल्म भी खत्म हो चुकी हैं। जिसकी वजह से तीमारदारों को कंप्यूटर से फोटो लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए कहा जाता है। बावजूद अस्पताल प्रबंधन इन खामियों पर पक्ष रखने को तैयार नहीं। उधर, दिल्ली सरकार ने भी इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है।
रोहिणी निवासी संजय ने बताया कि कुछ दिन पहले सीने में दर्द की शिकायत होने पर उनके पिता को यहां लेकर आए। डॉक्टरों ने सबसे पहले एक्सरे कराने की सलाह दी। दिन भर लाइन में लगने के बाद जब पिता का एक्सरे कराया तो पता चला कि फिल्म खत्म हो गई है। उन्हें कंप्यूटर से फोटो लेकर काम चलाना पड़ेगा। कर्मचारियों से पूछने पर कि फोन से कैसे एक्सरे देखा जा सकता है।
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उनका जवाब था कि आए दिन इस तरह की परेशानी होती है। डॉक्टरों को भी इसके बारे में पता है। फोटो फोन पर दिखाने से वे मरीज की परेशानी समझ जाएंगे। हालांकि, संजय का कहना है कि जब वह फोन पर तस्वीर लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि इससे बेहतर बाहर से एक्सरे करा लिया होता।
प्रबंधन को बताई है समस्या, समाधान नहीं
जीबी पंत अस्पताल के ही एक डॉक्टर ने नियमों को लेकर बताया कि एक्सरे की वास्तविक पहचान फिल्म से ही हो सकती है। इसके अलावा फिल्म को रिकॉर्ड में भी इस्तेमाल किया जाता है। कई बार ऑपरेशन टेबल पर भी फिल्म देखने की जरूरत पड़ जाती है। फिल्म के अभाव में ऐसा संभव नहीं हो पाता। उन्होंने ये भी बताया कि इस परेशानी को कई बार प्रबंधन के सामने रखा जा चुका है। बावजूद इसके हालातों में सुधार नहीं है।
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अब स्थिति यह है कि यहां एक्सरे फिल्म भी खत्म हो चुकी हैं। जिसकी वजह से तीमारदारों को कंप्यूटर से फोटो लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए कहा जाता है। बावजूद अस्पताल प्रबंधन इन खामियों पर पक्ष रखने को तैयार नहीं। उधर, दिल्ली सरकार ने भी इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है।
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रोहिणी निवासी संजय ने बताया कि कुछ दिन पहले सीने में दर्द की शिकायत होने पर उनके पिता को यहां लेकर आए। डॉक्टरों ने सबसे पहले एक्सरे कराने की सलाह दी। दिन भर लाइन में लगने के बाद जब पिता का एक्सरे कराया तो पता चला कि फिल्म खत्म हो गई है। उन्हें कंप्यूटर से फोटो लेकर काम चलाना पड़ेगा। कर्मचारियों से पूछने पर कि फोन से कैसे एक्सरे देखा जा सकता है।
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उनका जवाब था कि आए दिन इस तरह की परेशानी होती है। डॉक्टरों को भी इसके बारे में पता है। फोटो फोन पर दिखाने से वे मरीज की परेशानी समझ जाएंगे। हालांकि, संजय का कहना है कि जब वह फोन पर तस्वीर लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि इससे बेहतर बाहर से एक्सरे करा लिया होता।
प्रबंधन को बताई है समस्या, समाधान नहीं
जीबी पंत अस्पताल के ही एक डॉक्टर ने नियमों को लेकर बताया कि एक्सरे की वास्तविक पहचान फिल्म से ही हो सकती है। इसके अलावा फिल्म को रिकॉर्ड में भी इस्तेमाल किया जाता है। कई बार ऑपरेशन टेबल पर भी फिल्म देखने की जरूरत पड़ जाती है। फिल्म के अभाव में ऐसा संभव नहीं हो पाता। उन्होंने ये भी बताया कि इस परेशानी को कई बार प्रबंधन के सामने रखा जा चुका है। बावजूद इसके हालातों में सुधार नहीं है।