जीबी पंत मलयाली भाषा विवाद: नर्सिंग अधीक्षक ने सर्कुलर को लेकर दी सफाई, कहा- कोई आहत हुआ हो तो माफ करें
जीबी पंत अस्पताल में नर्सों के लिए सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में बात करने के नोटिस से विवाद बढ़ा तो आदेश वापस लिया गया। जीबी पंत अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक ने नर्सिग कर्मचारियों को जारी किया था आदेश।
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दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल ने नर्सिंग कर्मियों के लिए सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में बात करने वाला पांच जून का आदेश छह जून को वापस ले लिया है। इससे पहले अस्पताल ने सर्कुलर जारी कर नर्सिंग कर्मियों को कहा था कि वे संवाद के लिए मलयालम भाषा का प्रयोग न करें और केवल हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल करें या फिर कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। इस आदेश के बाद से अस्पताल प्रशासन का काफी विरोध हुआ था। कांग्रेस के बड़े नेताओं समेत भाजपा नेताओं ने भी इसको गलत बताया था। अब इसे लेकर नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट का भी बयान आया है।
सर्कुलर वापस लेने के बाद जीबी पंत इंस्टीट्यूट के नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट का जवाब आया है कि सर्कुलर सकारात्मक भाव से जारी किया गया था और इसमें मलयाली भाषा बोलने वाले स्टाफ के प्रति कोई द्वेष की मंशा नहीं थी। सर्कुलर की गलत व्याख्या की गई और मुझे अपनी बात रखने का भी मौका नहीं मिला। अगर किसी भी स्टाफ की भावना आहत हुई हो तो उसके लिए मैं माफी मांगता हूं।
Circular was issued in a positive sense & there was no bad intention against Malayali-speaking staff. Circular was misinterpreted about its true sense & I didn't get a chance to explain. If any staff's feeling got hurt, I apologise: Nursing Superintendent, GB Pant Institute Delhi pic.twitter.com/aVJL0fFvbA
— ANI (@ANI) June 9, 2021
गौरतलब है कि विवाद बढ़ने के बाद अस्पताल के चिकित्सा निदेशक अनिल अग्रवाल ने रविवार को कहा है कि सर्कुलर उनकी जानकारी के बिना जारी कर दिया गया था। इस मामले में अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बिना किसी अनुमित के उन्होंने यह आदेश जारी कर दिया था, जिसको अब रद्द कर दिया गया है।
इससे पहले अस्पताल के नर्सिंग अक्षीक्षक ने एक नर्सिंग कर्मचारियों को आदेश जारी कर कहा था कि अस्पताल में भर्ती अधिकतर मरीज और उनके तीमारदारों को मलयालम भाषा नहीं आती है। इससे उन्हें नर्स और अन्य स्टाफ की बात समझने में परेशानी होती है। इस मामले में उन्हें एक मरीज से शिकायत मिली है। इसलिए अस्पताल का सभी नर्सिंग स्ट़ॉफ मलयालम में नहीं सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में बात करेगा।
जीबी पंत नर्सेज एसोसिएशन अध्यक्ष लीलाधर रामचंदानी ने दावा किया है कि यह सर्कुलर एक मरीज की ओर से स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को अस्पताल में मलयालम भाषा के इस्तेमाल के संबंध में भेजी गई शिकायत के बाद जारी किया गया था। हालांकि उन्होंने कहा था कि एसोसिएशन सर्कुलर में इस्तेमाल किए गए शब्दों से असहमत है।
कांग्रेस नेताओं ने किया था विरोध
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस आदेश का विरोध किया । उन्होंने इसे भारतीय नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों का हनन बताया है। थरूर ने ट्वीट किया, 'यह सोचकर भी दिमाग ठिठक जाता है कि लोकतांत्रिक भारत में एक सरकारी संस्थान अपने नर्सों को उनकी मातृभाषा में बात करने से मना कर सकता है। यह अस्वीकार्य है और भारतीय नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों का हनन है।'
स्वास्थ्य विभाग ने जवाब तलब किया
जीबी पंत अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी किए गए नोटिस का संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को मेमो जारी कर जवाब मांगा था। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक की ओर से जारी किया गया आदेश गलत था। इस प्रकार से किसी भी व्यक्ति पर कोई विशेष भाषा का इस्तेमाल करने के लिए जोर नहीं डाला जा सकता है। सरकार ने अस्पताल प्रशासन को मेमों जारी कर जवाब मांगा है।संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मलयालम नर्स यूनियन कि मांफी मांगने की मांग
इस प्रकरण में जीबी पंत अस्पताल कि मलयाली नर्स यूनियन ने नर्सिंग अधीक्षक से कहा है कि वह अस्पताल की सभी नर्स से लिखित में मांफी मांगे। साथ ही अस्पताल प्रशासन से अधीक्षक खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को भी कहा है। मलयाली नर्स यूनियन की दिल्ली समिति के सदस्य फमीर ने कहा कि इस प्रकार का आदेश उनकी भाषाई स्वतंत्रता का हनन है। अस्पताल प्रशासन और दिल्ली सरकार से अपील है कि इस आदेश को जारी करने वाले व्यक्ति के रख़लाफ सख्त कार्रवाई कि जाए।