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Gas Crisis: गैस सिलिंडर की कमी से लौटा स्टोव का जमाना, मांग के चलते कीमत बढ़ी; दिल्ली से पलायन ने पकड़ी रफ्तार

Sat, 04 Apr 2026 06:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा सचिन कुमार/सनी सिंह, नई दिल्ली
सचिन कुमार/सनी सिंह, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Apr 2026 06:48 AM IST
सार

आसानी से सिलिंडर नहीं मिलने के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि साल पहले घरों से गायब केरोसिन स्टोव विकल्प के रूप में एक बार फिर जरूरत बनकर उभर रहा है। 

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Gas Crisis: Gas Cylinder Shortage Brings Back the Era of Stoves; Exodus from Delhi Gathers Momentum
आनंद विहार रेलवे स्टेशन, सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एलपीजी किल्लत के कारण आम लोग खासकर मजदूर वर्ग खासे परेशान हैं। आसानी से सिलिंडर नहीं मिलने के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि साल पहले घरों से गायब केरोसिन स्टोव विकल्प के रूप में एक बार फिर जरूरत बनकर उभर रहा है। 

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केंद्र सरकार ने आपात परिस्थितियों को देखते हुए केरोसिन तेल की बिक्री की अनुमति तो दे दी है, लेकिन बाजार में तेल उपलब्ध नहीं होने से लोग परेशान हैं। इस कारण मजदूर वर्ग पलायन करने को भी मजबूर हैं। 
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सदर बाजार और चांदनी चौक जैसे थोक बाजारों में केरोसिन स्टोव की कमी देखी जा रही है। कभी इन बाजारों में स्टोव की भरमार होती थी, लेकिन बदलते समय के साथ इनकी मांग लगभग समाप्त हो गई थी। पहले सिलिंडर उसके बाद इंडक्शन उपयोग के कारण व्यापारियों ने धीरे-धीरे इसे बेचना छोड़ दिया। अब गैस संकट के चलते स्टोव की मांग अचानक बढ़ी है तो बाजार इसकी आपूर्ति करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। 
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केरोसिन-डीजल स्टोव के दाम बढ़े
जो साधारण स्टोव पहले 400 से 600 रुपये में आसानी से मिल जाते थे, उनकी कीमत अब 1500 से 1800 रुपये तक पहुंच गई है। बड़े स्तर पर उपयोग होने वाली केरोसिन-डीजल भट्टियों के दाम 30 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बावजूद बाजार में आसानी से नहीं मिल रहा है। सदर बाजार के व्यापारी सुरेश ने बताया कि उनके परिवार का पुराना व्यवसाय स्टोव बेचना था, लेकिन केरोसिन के उपयोग में कमी आने के कारण उन्होंने यह काम छोड़ दिया। 

नई पीढ़ी के लिए केरोसिन स्टोव बना चुनौती
नई पीढ़ी के अधिकांश लोग केरोसिन स्टोव का उपयोग करना नहीं जानते हैं। मुनिरका में काम करने वाली घरेलू सहायिका मीना ने बताया कि उनका सिलिंडर खत्म हो चुका है। वह कई बाजारों में स्टोव की तलाश कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें कहीं नहीं मिला। वहीं, आरके पुरम में रहने वाली गृहिणी प्रेरणा ने बताया कि उनके घर में पिछले तीन दशकों से केवल गैस चूल्हे का उपयोग हो रहा है। उन्होंने कभी स्टोव पर खाना नहीं बनाया, अब यह स्थिति उनके लिए नई और चुनौतीपूर्ण बन गई है।

बढ़ रहा पलायन, बस अड्डों-स्टेशनों पर लोगों की भीड़
रोजी रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर पहुंचे मजदूर वर्ग के लिए एलपीजी संकट से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। इन संकटों से जूझ रहे खासकर मजदूर वर्ग के लोग अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। 

इस कारण बड़ी संख्या में पलायन कर रहे लोगों की भीड़ इन दिनों बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों पर देखी जा रही है। सिलेंडर न मिलने, बाहर खाने की महंगाई और काम की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग घर जाना ही मुनासिक समझ रहे हैं। आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ देखने को मिली। 


कई लोग बैग और सामान के साथ बसों और ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए। उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली बसों में भीड़ अधिक रही। यात्रियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस नहीं मिलने के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है। 

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