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Delhi NCR News: गणेश महोत्सव फीका, मूर्तियां तैयार पर खरीदारों का इंतजार
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महंगाई से कारोबार प्रभावित, पहले 1000 मूर्तियां बिकती थीं, इस बार 250
भी नहीं बिक रहीं
चिराग गुप्ता
पूर्वी दिल्ली।
गणेश महोत्सव की तैयारियां पूरी हो गईं हैं और मूर्ति कलाकारों ने महीनों की मेहनत से भगवान गणेश की आकर्षक मूर्तियां तैयार कर ली हैं। लेकिन, इस बार बाजार में खरीदारों की कमी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। महंगाई का असर अब त्योहारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज, दुर्गापुरीचौक, लोनी, समेत कई अन्य इलाकों के पास वर्षों से मूर्ति निर्माण और बिक्री करने वाले कलाकार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।
मूर्ति कलाकारों का कहना है कि इस साल गणेश महोत्सव से उन्हें बेहतर कारोबार की उम्मीद थी। सार्वजनिक स्तर पर उत्सव के आयोजन बढ़ने और बाजार में रौनक लौटने की संभावना को देखते हुए उन्होंने कई महीने पहले ही तैयारियां शुरू कर दीं थीं। हालांकि महोत्सव शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई है।
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मूर्तिकार गोपाल ने बताया कि महंगाई का असर पिछले दो सालों से उनके कारोबार पर पड़ रहा है। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि बिक्री में सुधार होगा, इसलिए उन्होंने करीब छह महीने पहले से मूर्तियां बनानी शुरू कर दी थीं। उन्होंने बताया कि पहले गणेश चतुर्थी के दौरान 500 से 1000 मूर्तियां आसानी से बिक जाती थीं, लेकिन इस साल 200 से 250 मूर्तियां भी नहीं बिक सकी हैं। उनका मानना है कि बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित हुई है, जिसका असर मूर्तियों की मांग पर भी पड़ा है।
मूर्ति कलाकार सुरेश बताते हैं कि गणेश उत्सव की तैयारियां आमतौर पर तीन से चार महीने पहले शुरू हो जाती हैं ताकि समय पर अधिक संख्या में मूर्तियां तैयार की जा सकें। हालांकि इस बार कलाकारों ने सीमित संख्या में ही मूर्तियां बनाईं हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर मिट्टी की मूर्तियों की मांग बढ़ी है, लेकिन इन्हें तैयार करने में अधिक समय और लागत लगती है। इसके कारण मूर्तियां बनाने के ऑर्डर भी कम मिले हैं।
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भी नहीं बिक रहीं
चिराग गुप्ता
पूर्वी दिल्ली।
गणेश महोत्सव की तैयारियां पूरी हो गईं हैं और मूर्ति कलाकारों ने महीनों की मेहनत से भगवान गणेश की आकर्षक मूर्तियां तैयार कर ली हैं। लेकिन, इस बार बाजार में खरीदारों की कमी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। महंगाई का असर अब त्योहारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज, दुर्गापुरीचौक, लोनी, समेत कई अन्य इलाकों के पास वर्षों से मूर्ति निर्माण और बिक्री करने वाले कलाकार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।
मूर्ति कलाकारों का कहना है कि इस साल गणेश महोत्सव से उन्हें बेहतर कारोबार की उम्मीद थी। सार्वजनिक स्तर पर उत्सव के आयोजन बढ़ने और बाजार में रौनक लौटने की संभावना को देखते हुए उन्होंने कई महीने पहले ही तैयारियां शुरू कर दीं थीं। हालांकि महोत्सव शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई है।
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मूर्तिकार गोपाल ने बताया कि महंगाई का असर पिछले दो सालों से उनके कारोबार पर पड़ रहा है। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि बिक्री में सुधार होगा, इसलिए उन्होंने करीब छह महीने पहले से मूर्तियां बनानी शुरू कर दी थीं। उन्होंने बताया कि पहले गणेश चतुर्थी के दौरान 500 से 1000 मूर्तियां आसानी से बिक जाती थीं, लेकिन इस साल 200 से 250 मूर्तियां भी नहीं बिक सकी हैं। उनका मानना है कि बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित हुई है, जिसका असर मूर्तियों की मांग पर भी पड़ा है।
मूर्ति कलाकार सुरेश बताते हैं कि गणेश उत्सव की तैयारियां आमतौर पर तीन से चार महीने पहले शुरू हो जाती हैं ताकि समय पर अधिक संख्या में मूर्तियां तैयार की जा सकें। हालांकि इस बार कलाकारों ने सीमित संख्या में ही मूर्तियां बनाईं हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर मिट्टी की मूर्तियों की मांग बढ़ी है, लेकिन इन्हें तैयार करने में अधिक समय और लागत लगती है। इसके कारण मूर्तियां बनाने के ऑर्डर भी कम मिले हैं।