फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   free treatment of hepetitis in faridabad civil hospital

 अब फरीदाबाद के सिविल अस्पताल में हेपेटाइटिस सी का मुफ्त इलाज 

Thu, 23 Feb 2017 06:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 23 Feb 2017 06:16 PM IST
विज्ञापन
free treatment of hepetitis in faridabad civil hospital
demo pic - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में हेपेटाइटिस सी के कुछ मामले सामने आने पर सरकार इस बीमारी को काबू करने की तैयारी में जुट गई है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस सी का मुफ्त इलाज देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

विज्ञापन


स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से बुधवार को चंडीगढ़ में प्रदेश के सभी सिविल अस्पतालों के स्वास्थ्य अधिकारियों को हेपेटाइटिस सी वेक्सिनेशन और डोज एडमिनिस्ट्रेशन की ट्रेनिंग दी गई।  
विज्ञापन


डिस्ट्रिक्ट डिजीज सर्विलांस अधिकारी  डॉ. रामभगत ने बताया कि मौसम में बदलाव के साथ प्रदेश के कुछ जिलों में हेपेटाइटिस के मरीज सामने आए हैं। हेपेटाइटिस सी वायरस जनित बीमारी है, संक्रमण का इलाज यदि समय पर नहीं किया गया तो लीवर कैंसर और लीवर सिरोसिस का खतरा रहता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सीमापार से फैला है संक्रमण 

free treatment of hepetitis in faridabad civil hospital
demo pic - फोटो : अमर उजाला
हेपेटाइटिस सी संक्रमण एक्यूट और क्रॉनिक दो तरह का होता है। एक्यूट संक्रमण से ग्रस्त व्यक्ति में एक से तीन माह में लक्षण प्रकट होते हैं, यह बीमारी छह माह से कम समय तक रहती है। क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी बीमारी का इलाज काफी लंबा चल सकता है। उन्होंने बताया कि बुधवार को स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से दवा और वैक्सीनेशन की ट्रेनिंग की दी गई।  
 
डिस्ट्रिक्ट डिजीज सर्विलांस अधिकारी डॉ. रामभगत ने बताया कि हेपेटाइटिस सी बीमारी के मरीजों की संख्या पाकिस्तान, अफगानिस्तान में काफी ज्यादा है। पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब में यह संक्रामक बीमारी पहुंच चुकी है।

प्रदेश के सिरसा, हिसार, फतेहाबाद और कैथल जिले में इस बीमारी के मामले सामने आए हैं। संक्रमण रोकने के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में हेपेटाइटिस सी वैक्सिनेशन और इलाज शुरू करने का निर्णय लिया है।

फिलहाल औद्योगिक नगर में इस बीमारी का एक भी मरीज नहीं है। उन्होंने बताया कि सभी जिला मुख्यालयों से दवा और वैक्सीनेशन की डिमांड पूछी है। इस बीमारी का इलाज तीन महीने तक चलेगा और इलाज में 20-22 हजार रुपए खर्च होते हैं, लेकिन सरकार की ओर से मुफ्त दवाएं मुहैया कराई जाएंगी।

ये बनते हैं बीमारी का आसान शिकार 
डॉ. रामभगत ने बताया कि इंजेक्शन के जरिए ड्रग लेने वाले लोग, इंजेक्शन मेें एक ही सूई का दोबारा इस्तेमाल करने पर, असुरक्षित रक्त ट्रांसफ्यूजन करने वाले, डायलिसिस के मरीज, टैटू बनवाने वाले और असुरक्षित यौन संबंध बनाने वाले इस बीमारी का आसानी से शिकार हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed