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केजरीवाल सरकार के चार साल: दिल्ली वालों की सेहत को मिलीं चार बड़ी राहत

Thu, 14 Feb 2019 04:25 AM IST
Priyesh Mishra परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 14 Feb 2019 04:25 AM IST
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Four years of Kejriwal government, Four big health reliefs received people who living in Delhi
अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
सरकारी अस्पतालों की सेहत सुधारने में दिल्ली सरकार बड़ा योगदान तो नहीं कर पाई, लेकिन पिछले चार वर्षों में दिल्ली वालों को 4 बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं के जरिये राहत जरूर दी है। महत्वाकांक्षी मोहल्ला क्लिनिक को दुनियाभर में सराहा गया है। सड़क हादसों के घायलों को निशुल्क उपचार मिलने लगा। दिल्ली में निजी अस्पताल 80 फीसदी है, लेकिन इनकी मनमानी पर रोक लगाने में सरकार कामयाब नहीं हो पाई। सरकारी अस्पतालों में दिल्ली वालों को सभी दवाएं निशुल्क मिलने लगीं।
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केजरीवाल सरकार का स्वास्थ्य पर विशेष जोर रहा। गरीबों को ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत दिल्ली के 44 निजी अस्पतालों में 635 बिस्तरों पर उपचार दिलाने के लिए सख्ती की गई। हालांकि इन सुविधाओं का लाभ सिर्फ दिल्ली वालों को देने पर ध्यान रहा। इसके लिए सरकार ने सभी योजनाओं में दिल्ली का आधार कार्ड और वोटर कार्ड अनिवार्य रखा।
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जुलाई 2015 में पीरागढ़ी में पहला मोहल्ला क्लिनिक शुरू हुआ। अब इनकी संख्या 187 हो गई है। हालांकि एक हजार मोहल्ला क्लिनिक की स्थापना की घोषणा दूर की कौड़ी है। मार्च 2017 में 11 तरह की चिकित्सीय जांच निजी लैब में निशुल्क कराने की योजना शुरू हुई। इसके लिए 23 जांच केंद्रों से करार हुआ। इसके लिए दिल्ली के 30 सरकारी अस्पतालों और 25 पॉलीक्लिनिक में किसी एक से मरीज का रेफर होना जरूरी है।
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इस योजना से सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए वेटिंग कम हुई। जुलाई 2017 में 52 तरह के ऑपरेशन निजी अस्पतालों में निशुल्क कराने की सेवा शुरू हुई। इनमें हार्ट की बाईपास सर्जरी से लेकर किडनी तक के ऑपरेशन शामिल किए गए। जनवरी 2019 तक करीब 2 हजार मरीज इसका लाभ ले चुके हैं।

इससे सरकारी अस्पतालों में सर्जरी की वेटिंग में गिरावट आई। दिल्ली वाले एनसीआर के अस्पतालों में भी लाभ ले सकते हैं। फरवरी 2018 में सड़क हादसे में घायल, एसिड और थर्मल बर्न पीड़ितों को निशुल्क उपचार की सुविधा मिली। इसके लिए दिल्ली आरोग्य कोष की स्थापना कर सभी अस्पतालों को पीड़ितों के इलाज का खर्चा देने के आदेश दिए गए।

वेंटीलेटर की कमी से निजात नहीं

दिसंबर 2016 में दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 125 नए वेंटीलेटर उपलब्ध कराए गए। हालांकि, 10 हजार बिस्तरों की क्षमता के लिहाज से यह सुविधा नाकाफी साबित हुई। अब भी सरकारी अस्पतालों में वेंटीलेटर की कमी से मरीजों की मौत तक हो रही हैं। इसका उदाहरण, लोकनायक अस्पताल है, जहां हाल ही में तीन साल के मासूम फरहान को दिल्ली हाईकोर्ट ने वेंटीलेटर दिलाया।

अस्पतालों में मारपीट, डॉक्टर भी कम
चार साल में दिल्ली में एक दर्जन से ज्यादा अस्पतालों में हमले या मारपीट की घटनाएं हुईं। सरकार न तो इन घटनाओं पर रोक लगा पाई, न ही डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर कर पाई। 2015 से 2018 के बीच दिल्ली में दो बड़े सुपर स्पेशलिटी जनकपुरी और ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी अस्पताल शुरू हुए। हालांकि ये दोनों ही अस्पताल पिछली सरकार के प्रोजेक्ट थे।

दिल्ली सरकार ने भले स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी काम किया है, लेकिन सरकारी अस्पतालों की हालत में अब तक सुधार नहीं है। भारतीय चिकित्सा में दिल्ली हमेशा से आदर्श रहा है। इसलिए सरकार को अपने अस्पतालों की सेहत सुधारनी चाहिए।
- डॉ. केके अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए

दिल्ली सरकार नेे निजी अस्पतालों को हमेशा ही अपना विरोधी माना है। सच यह भी है कि इन्हीं अस्पतालों में सरकारी से ज्यादा मरीजों का इलाज हो रहा है। इनके विकास के लिए भी सरकार को सोचना चाहिए।
- डॉ. गिरधर ज्ञानी, महानिदेशक, प्राइवेट हेल्थकेयर एसोसिएशन
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