20 साल बाद लगा हाथ: खुद को बचाने के लिए पूर्व जवान ने दो मजदूरों को जला दिया था जिंदा, दोस्त का भी है हत्यारा
बवाना में दोस्त की हत्या के अलावा वर्ष 2000 में आरोपी के खिलाफ नौसेना मेस में चोरी का भी मामला तिलक मार्ग थाने में दर्ज हुआ था। अपराध शाखा ने इसके खिलाफ धोखाधड़ी का और मामला दर्ज किया है।
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करीब 20 साल पहले बवाना में की गई अपने दोस्त की हत्या से बचने के लिए नौसेना के पूर्व जवान ने खुद को मृत घोषित कर दिया। इसके लिए आरोपी ने दो मजदूरों को समयपुर बादली इलाके से काम के लिए ट्रक पर बुलाया। बाद में राजस्थान के जोधपुर में दोनों को ट्रक समेत जिंदा जलाकर खुद को मरा हुआ घोाषित कर दिया।
ऐसा करने के बाद आरोपी न सिर्फ हत्या के आरोप से बच गया बल्कि उसे नौसेना और ट्रक के इंश्योरेंस से मोटी रकम भी मिली। बाद में आरोपी की पेंशन भी इसकी पत्नी के नाम ट्रांसफर कर दी गई। अब दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने इस सनसनीखेज वारदात से पर्दा उठाकर आरोपी पूर्व जवान को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी की पहचान पट्टी कल्याण, समालखा, पानीपत, हरियाणा निवासी बालेश कुमार उर्फ अमन सिंह (63) के रूप में हुई है। आरोपी नजफगढ़ इलाके में अपना नाम-पता बदलकर रह रहा था। इसने फर्जी नाम पर आधार, वोटर कार्ड, डीएल समेत तमाम दस्तावेज भी बनवा लिये थे। आरोपी की पत्नी संतोष भी इसके साथ ही रह रही थी।
बवाना में दोस्त की हत्या के अलावा वर्ष 2000 में आरोपी के खिलाफ नौसेना मेस में चोरी का भी मामला तिलक मार्ग थाने में दर्ज हुआ था। अपराध शाखा ने इसके खिलाफ धोखाधड़ी का और मामला दर्ज किया है। अब राजस्थान में दो मजदूरों की जलाकर हत्या, बवाना में दोस्त की हत्या समेत आरोपी पर चार मुकदमे चलेंगे।
अपराध शाखा के विशेष आयुक्त रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि उनकी टीम को सूचना मिली थी कि हत्या और चोरी के मामले में शामिल एक आरोपी अपनी पहचान छिपाकर नजफगढ़ इलाके में रह रहा है। सूचना के बाद एसीपी पंकज अरोड़ा, इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार व अन्यों की टीम का गठन किया गया।
बाद में आरोपी को सकुशल दबोच लिया गया। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी नौसेना का पूर्व जवान है। उसने वर्ष 2004 में हत्या में गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को मृत घोषित कर दिया था। वर्ष 2004 में बालेश संतोष पार्क उत्तम नगर में पत्नी और चार बच्चों के साथ रहता था।
इसलिए रची गई खुद को मृत करने की साजिश...
बालेश की अपने दोस्त राजेश उर्फ खुशीराम की पत्नी के साथ नजदीकियां थीं। घटना वाले दिन बालेश उसका भाई सुंदरलाल राजेश के साथ बैठकर समयपुर बादली ट्रांसपोर्ट नगर में शराब पी रहे थे। राजेश की पत्नी और कुछ रुपयों को लेकर बालेश से बहस हुई। इसी बात पर बालेश ने भाई सुंदर के साथ मिलकर राजेश की हत्या कर दी।
बाद में शव को बवाना एरिया में ठिकाने लगा दिया गया। मामले में सुंदरलाल गिरफ्तार हो गया। इधर खुद को बचाने के लिए बालेश ने साजिश रची। वह नौ सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अपने भाई महेंद्र सिंह का ट्रक चलाता था। उसने समयपुर बादली एरिया से बिहार निवासी मनोज और मुकेश नामक दो मजदूरों को ट्रक पर काम के लिए लिया।
वह दोनों को राजस्थान जोधपुर ले गया। वहां थाना डंडियावार एरिया में दोनों को पहले जमकर शराब पिलाई। उनके नशे में होने पर आरोपी ने खुद ही अपने ट्रक को आग लगा दी। ट्रक में गत्ता भरा था। दोनों जिंदा जल गए। बाद में पुलिस ने छानबीन के बाद दोनों से एक को बालेश मान लिया, दूसरे की आज तक पहचान नहीं हुई।
इंश्योरेंस की डबल रकम ली...
बालेश ने खुद को मृत घोषित किया तो उसकी पत्नी संतोष को नौसेना ने इंश्योरेंस के 20 लाख रुपये दिए। इसके अलावा भाई के ट्रक पर ड्राइवर का भी इंश्योरेंस था। वह रकम भी बालेश की पत्नी को मिली। इसके अलावा बालेश की पेंशन उसकी पत्नी के नाम ट्रांसफर हो गई। खुद को मरा हुआ घोषित करने पर बवाना हत्याकांड में उसका नाम हटा दिया गया।
गिरफ्तार भाई ने भी कभी उसका राज नहीं खोला। बाद में वह नाम-पता बदलकर नजफगढ़ इलाके में अमन सिंह बनकर रहने लगा। अब दोनों मजदूरों की हत्या के अलावा उस पर बवाना हत्याकांड, नौसेना मेस में चोरी के अलावा अपराध शाखा ने नाम बदलने के लिए बनवाए गए दस्तावेजों के लिए जालसाझी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।