Delhi : तिहाड़ में विदेशी कैदियों को चावल से परहेज, अक्सर होते थे बीमार; प्रशासन को करना पड़ा मेन्यू में बदलाव
खाने के मेन्यू में कैदियों को एक वक्त चावल दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन विदेशी कैदी चावल खाते ही बीमार हो जाते हैं, उनको पेट और त्वचा संबंधित बीमारियां घेर लेती है। ऐसे में मजबूरन जेल प्रशासन को विदेशी कैदियों के लिए अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ा।
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तिहाड़ जेल में बंद विदेशी कैदी जेल प्रशासन से अपनी मेहमान नवाजी कराने में पीछे नहीं हैं। खाने के मेन्यू में कैदियों को एक वक्त चावल दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन विदेशी कैदी चावल खाते ही बीमार हो जाते हैं, उनको पेट और त्वचा संबंधित बीमारियां घेर लेती है। ऐसे में मजबूरन जेल प्रशासन को विदेशी कैदियों के लिए अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ा। इन विदेशी कैदियों को चावल के बदले ब्रेड (पाव) और टोस्ट दिया जाता है। हालांकि यह जेल के नियमों के खिलाफ हैं। चूंकि जेल में बंद सभी कैदियों के लिए एक समान खाने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन विदेशी कैदियों के मामले में जेल प्रशासन को मजबूर होकर विदेशी कैदियों के खाने में बदलाव करना पड़ा है।
तिहाड़ जेल में भारतीय कैदियों के साथ विदेशी कैदी भी काफी संख्या में बंद हैं। विदेशी कैदियों में ज्यादातर अफ्रीकी मूल के नागरिक शामिल हैं। इसमें नाइजीरियन, तंजानिया, युगांडा और दूसरे अफ्रीकी देश शामिल हैं। इसके अलावा कुछ विदेशी कैदी यूरोपीय देशों के भी बंद हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि एशियाई देशों को छोड़कर दूसरे देशों में चावल खाने का रिवाज कम है। वहां लोग फास्ट फूड के अलावा ब्रेड या टोस्ट को खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसकी वजह से उनके शरीर भी इसके आदी हो गए हैं। भारत में रहकर यह लोग अपनी उसी डाइट का पालन करते हैं। लेकिन जैसे ही यह लोग किसी अपराध में गिरफ्तार होने के बाद जेल पहुंचते हैं इनको जेल के मेन्यू के अनुसार खाना दिया जाता है। जिसके यह बिल्कुल भी आदी नहीं होते हैं।
जेल के एक अधिकारी ने बताया कि इनको मिर्च मसालों से भी परहेज होता है। ऐसे में जेल में बनने वाला खाना फौरन ही इनका पेट खराब कर देता है। इनको दस्त, पेट में मरोड़ और उल्टी होने लगती है। वहीं कई बार इनकी त्वचा में भी संक्रमण हो जाता है। ऐसे में मजबूर होकर जेल प्रशासन को इनके खाने में बदलाव करना ही पड़ा। लिहाजा अब इनको इनकी डाइट के अनुसार सादा खाना देने की शुरुआत की गई है। ऐसा करने से ना सिर्फ जेल प्रशासन को आराम है बल्कि विदेशी कैदी भी इससे खुश हैं। जेल के रसोई में ब्रेड और टोस्ट देने के अलावा इन विदेशी कैदियों को बेहद हल्के मिर्च मसालों के खाने दिए जाते हैं, जिससे इनके बीमार पड़ने की संभावना बहुत कम रह जाती है।
अकसर हो जाते थे बीमार
जेल अधिकारी के मुताबिक अपने डाइट के अनुसार खाना नहीं खाने की वजह से अकसर विदेशी कैदी बीमार हो जाते थे। उन्हें जेल के अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था। उल्टी और दस्त की ज्यादा शिकायत होने पर इन्हें जेल के बाहर के अस्पतालों तक में भर्ती कराना पड़ता था। जांच में सामने आई कि विदेशी कैदी जेल में दिए जाने वाला खाना खाने के आदी नहीं हैं। खासकर विदेशी कैदी चावल खाने के आदी नहीं हैं। इसके बाद इन कैदियों के लिए उनके डाइट के मुताबिक खाना देने का फैसला लिया गया।
कैदियों को जेल में मिलने वाला खाना
आमतौर पर कैदियों को दलिया, ब्रेड आलू, खिचड़ी, आलू-पूड़ी, दाल, मौसमी सब्जी, आलू, रोटी या चावल दिया जाता है। किसी त्योहार के अवसर पर कैदियों को पुड़ी, खीर, मिठाई दिया जाता है। इसके अलावा बीमार कैदियों के लिए अदालत के निर्देश पर खाना दिया जाता है। इन कैदियों को जेल प्रशासन की ओर से घर से भी खाना मंगाने की अनुमति होती है।
नाश्ता और खाना देने की नियमावली
जेल में नाश्ता का समय सुबह सात बजे निर्धारित है। सबसे पहले कैदियों को चाय और बिस्कुट दिया जाता है। उसके कुछ देर बाद दलिया, ब्रेड आलू या आलू पूड़ी में से कोई एक चीज परोसा जाता है। करीब 11 बजे दोपहर का खाना दिया जाता है। इसमें दाल, मौसमी सब्जी रोटी या फिर चावल दिया जाता है। दोपहर साढ़े तीन बजे चाय व स्नैक्स दिया जाता था। गर्मी में शाम सात बजे व सर्दियों में शाम साढ़े छह बजे कैदियों को रात का खाना दिया जाता है। इसमें दाल, सब्जी के साथ रोटी या चावल दिया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि दिन में दी जाने वाली सब्जी को रात में दोहराया नहीं जाता है।