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फ्लैट खरीदकर दोहरी मुश्किल में फंसे खरीदार

Fri, 18 Jul 2014 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 18 Jul 2014 09:26 AM IST
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flat buyers are facing double trouble in noida

ओखला पक्षी विहार से दस किलोमीटर के दायरे में आ रहे 23 प्रोजेक्ट में पैसा लगा चुके बायर्स को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ उनको अपने फ्लैट पर पजेशन नहीं मिल रहा तो दूसरी तरफ घर का किराया भरना पड़ रहा है।

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प्राधिकरण से जानकारी के मुताबिक ओखला पक्षी विहार के दस किलोमीटर के दायरे में कुल 51 प्रोजेक्ट आ रहे हैं, जिसमें से ग्रुप हाउसिंग के 23 प्रोजेक्ट हैं।
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ये सेक्टर 45 107, 78, 77, 76, 120, 34 , 121 46, 50, 52 110, 128, 129, 131, 133, 134, 96, 97 व 98 में स्थित हैं। इसी तरह व्यवसायिक संपत्तियों के 10 और 18 शिक्षण संस्थान हैं। ये प्रोजेक्ट सेक्टर 18, 44, 16, 62, 127, 132, 94, 16ए, 135, 73, 96, 105, 125 आदि में स्थित हैं।

इनको तब तक कंपलीशन नहीं जारी किया जा सकता, जब तक कि ओखला पक्षी विहार के ईको सेंसिटव जोन का दायरा तय न हो जाए।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सौ मीटर तय करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दो किलोमीटर तक ईको सेंसिटव जोन का दायरा तय करने का सुझाव दिया है। मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर ही एनजीटी इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। केंद्रीय मंत्रालय से अगले महीने रिपोर्ट सौंपे जाने की जानकारी मिली है।

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दरअसल, अमित कुमार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स के मामले की सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने ओखला पक्षी विहार के आसपास दस किलोमीटर के दायरे में आ रहे प्रोजेक्टों को कंपलीशन सार्टिफिकेट (अधिभोग प्रमाणपत्र) देने पर रोक लगा रखा है।


अब तक करीब एक साल बीत चुके हैं। इस कारण प्राधिकरण से कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो रहा। जब तक कंपलीशन नहीं मिल जाता, तब तक बिल्डर तैयार हो चुके फ्लैटों को भी खरीदारों के नाम ट्रांसफर नहीं कर सकते। रजिस्ट्री होने पर ही फ्लैट खरीदारों को मालिकाना मिलेगा। फ्लैटों की रजिस्ट्री न होने से 450 करोड़ रुपये का स्टांप भी अटका हुआ है।

पजेशन की तिथि पीछे छूटी
ग्रुप हाउसिंग के जिन 23 प्रोजेक्ट पर कंपलीशन नहीं मिल रहा, उनमें से ज्यादातर के पजेशन की तिथि पीछे छूट चुकी है। 2014 तक पजेशन दिया जाना है। एनजीटी का फैसला आने के बाद कम से कम एक साल और लगेगा। इसका हर्जाना फ्लैट खरीदारों को भुगतना पड़ रहा है। बायर्स को एक तरफ अपने घर में पजेशन नहीं मिल रहा। दूसरे, रहने के लिए किराया भी भरना पड़ रहा है।

बायर्स बेच रहे फ्लैट
नोएडा प्रमोटर्स डेवलपर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयोजक यूके भारद्वाज का कहना है कि दस किलोमीटर के दायरे में आ रहे फ्लैटों के बायर्स अब इनसे पीछा छुड़ाना चाह रहे हैं। वे अपने फ्लैट को जितना पैसा लगा चुके हैं, उतने में भी बेचने को तैयार हैं। इसके लिए डीलरों से भी संपर्क साध रहे हैं, मगर बाजार में खरीदार न होने से डीलर भी क्या कर सकते हैं।

बायर्स पछता रहे हैं
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि इन प्रोजेक्ट में पैसा लगा चुके बायर्स पछता रहे हैं। वे कुछ कर तो सकते नहीं हैं। इसमें सबसे बड़ी गलती प्राधिकरण की है। अगर पहले से पता होता तो कोई भी पैसा नहीं लगाता। इनमें पैसा लगाने वाले ज्यादातर वे लोग हैं, जिन्होंने रहने के लिए फ्लैट बुक कराया था।

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