दिल्लीः पूछताछ में शामिल हुए पांच मौलाना, बोले मरकज में कर रहे थे सभी नियमों का पालन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपराध शाखा के सूत्रों ने दावा किया है कि साद को कुछ दिनों में गिरफ्तार किया जा सकता है। मौलाना मोहम्मद साद का क्वारंटीन 11 अप्रैल को खत्म हो रहा है। पुलिस आपराधिक षड्यंत्र रचने जैसी कुछ धाराएं एफआईआर में जल्द ही जोड़ सकती है।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने तब्लीगी मरकज के मौलाना मोहम्मद साद के अलावा मोहम्मद अशरफ, मुफ्ती शहजाद, डॉ. जीशान, मुरसालीन सैफी, मो. सलमान और यूनुफ के खिलाफ महामारी अधिनियम व सरकारी आदेश की अवहेलना आदि धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मो. जीशान, मुरसालीन सैफी, मोहम्मद अशरफ, मो. सलमान और मुफ्ती शहजाद तफ्तीश में शामिल हो गए हैं।
ये लोग बुधवार को ही दिल्ली पुलिस की तफ्तीश में शामिल हो गए। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के दबाव में ये तफ्तीश में शामिल हुए हैं। बृहस्पतिवार को इनसे आमने-सामने बैठाकर कई घंटे पूछताछ की गई। सभी ने खुद को बेगुनाह बताया है।
आरोपियों का कहना है कि वह मरकज में सरकारी नियमों का पालन कर रहे थे। सामाजिक दूरी बनाकर जमातियों को रखा जा रहा था। इन्होंने ये भी दावा किया है कि वह अपने पल्ले से जमातियों पर पैसे भी खर्च करते थे। वह तो लोगों की निस्वार्थ सेवा कर रहे थे।
हालांकि दिल्ली पुलिस इनके दावों पर फिलहाल विश्वास नहीं कर रही है। आरोपियों से पूछताछ में ये बात सामने आई है कि इनको खुद नहीं पता था कि मरकज में लोगों के कोरोना संक्रमित होने का मामला इतना बड़ा बन जाएगा।
मौलाना साद पर नजर
अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मौलाना मोहम्मद साद पर अपराध शाखा ने पूरी नजर रखी हुई है। मोहम्मद साद को तीसरा नोटिस भेजकर पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया जा सकता है। पूछताछ के बाद मोहम्मद साद को गिरफ्तार किया जा सकता है। मोहम्मद साद का 14 दिन का क्वारंटीन समय 11 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
मरकज के पास ही जांच टीम का कार्यालय बनाया
मरकज के चलते पूरे देश में कोरोना के मरीज बढ़ गए। ऐसे में अपराध शाखा के ऊपर जांच की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। इसे देखते हुए मरकज के पास निजामुद्दीन थाने में अपराध शाखा की टीम का अस्थायी कार्यालय बना दिया गया है। दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, निजामुद्दीन थाने के तफ्तीश इंस्पेक्टर के कमरे को अपराध शाखा की जांच टीम का कार्यालय बनाया गया है। इस कार्यालय में मरकज के अन्य मौलानाओं से पूछताछ हो रही है। अगर निजामुद्दीन थाने के किसी पुलिसकर्मी से पूछताछ करनी हो तो वह भी तुरंत उपलब्ध हो जाता है। जांच टीम के सदस्यों को भी मरकज जाना आसान होता है।
क्या मरकज को दिल्ली सरकार से पैसा मिलता था
दिल्ली पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मरकज को कहां-कहां से पैसा मिलता था। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या मरकज को दिल्ली सरकार से पैसा मिलता था और मिलता था तो कितना मिलता था। कुछ सांसदों ने ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली सरकार मरकज को हर महीने 44 हजार रुपये देती थी।