बड़ी उपलब्धि: दुनिया में पहली बार आठ सप्ताह के 2.1 किलो के नवजात का लिवर प्रत्यारोपित
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देश में नाइजीरिया के आठ सप्ताह के बच्चे का सफलतापूर्वक लिवर प्रत्यारोपित किया गया है। लिवर फेल होने की वजह से 2.1 किलोग्राम वाले इस नवजात का बोनमैरो भी खराब हो गया था।
गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में प्रत्यारोपण करने वाले चिकित्सकों का दावा है कि इतने कम वजन और उम्र में लिवर प्रत्यारोपण करने का यह विश्व का पहला केस है। अपने आप में अनोखे इस केस को वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल करने के लिए भेजा जा रहा है।
नवजात का लिवर प्रत्यारोपण करने वाली डॉक्टर नीलम मोहन ने बताया कि नवजात जन्म से ही हेमोक्रोमाटोसिस (एनएच) नाम के एक असामान्य मेटाबोलिक विकार से पीड़ित था। नवजात के लिवर पर अत्यधिक आयरन जमा हो गया था, जिसकी वजह से लिवर ने काम करना बंद कर दिया था।
अस्पताल में आठ सप्ताह के डेविट जिसका वजन 2.1 किलोग्राम था, 2 अगस्त को सर्जरी हुई। करीब दो माह तक भर्ती रहने के बाद 29 सितंबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अगले कुछ माह तक बच्चे को एहतियात से रखना होगा, उसके बाद वह सामान्य जीवन जी सकता है।
बीमारी की वजह से बोन मैरो भी खराब हो चुका था
डॉ. नीलम ने बताया कि नवजात की हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (एचएलएच) बीमारी की वजह से बोन मैरो भी खराब हो चुका था। डॉ. सोइन ने बताया कि नवजात का वजन बेहद कम था लिहाजा लिवर का साइज उसी अनुसार में प्रत्यारोपित करने की भी चुनौती थी।
डेविट के पिता जेम्स के लिवर का करीब छह फीसदी हिस्सा जो वजन में करीब 91 ग्राम था उसे बच्चे में प्रत्यारोपित किया गया। बच्चे के पिता का वजन डेविड से 43 गुणा ज्यादा था, जबकि आमतौर पर लिवर प्रत्यारोपण में डोनर और जिसका प्रत्यारोपण होना होता है उसके वजन को भी ध्यान में रखा जाता है।
हालांकि, इस मामले में भी यहां जोखिम लिया गया। डॉ. विजय वोहरा ने बताया कि नौ घंटे की सर्जरी के लिए नवजात को 12 घंटे के लिए एनेस्थीसिया की डोज दी गई। सर्जरी में 50 डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की टीम जुटी।