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Delhi NCR News: डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए फाइनल डीपीआर का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 01:26 AM IST
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मुनक नहर के किनारे प्रस्तावित कॉरिडोर से पिलर डिजाइन पर मांगी गई जानकारी, दिल्ली सरकार जल्द भेजेगी अंतिम रिपोर्ट।
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली सरकर की महत्वाकांक्षी 16 किमी लंबी डबल-डेकर एलिवेटेड रोड परियोजना फिलहाल अटकी हुई है। मुनक नहर (वेस्टर्न यमुना कैनाल) पर प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट को हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग से अब तक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिला है, जिसके चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।


दिल्ली लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर शहरी विस्तार रोड-दो (यूईआर-दो) से इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन तक बनाया जाना है। परियोजना का उद्देश्य दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से मध्य दिल्ली तक सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी देना और आउटर रिंग रोड नेटवर्क को मजबूत करना है। हालांकि, यह कॉरिडोर मुनक नहर के ऊपर और उसके किनारे-किनारे गुजरता है, जो हरियाणा सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में निर्माण शुरू करने से पहले हरियाणा से एनओसी लेना अनिवार्य है। हरियाणा के सिंचाई विभाग ने तकनीकी आधार पर कुछ अहम सवाल उठाए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नहर की सफाई (डिसिल्टिंग) के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल होता है और प्रस्तावित कॉरिडोर से इन मशीनों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए। साथ ही, पिलर के डिजाइन और स्पेसिफिकेशन पर भी जानकारी मांगी गई है, ताकि नहर की लाइनिंग और तटबंधों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से अभी अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नहीं भेजी गई है। “
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--एनएचएआई करेगा निर्माण...

अधिकारियों ने बताया कि परियोजना से संबंधित प्रारंभिक रिपोर्ट मिली है, जिस पर तकनीकी टिप्पणियां भेजी जा चुकी हैं। अंतिम डीपीआर मिलने के बाद ही एनओसी जारी की जा सकेगी। वहीं, दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि डीपीआर लगभग तैयार है और जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपी जाएगी। दिल्ली सरकार का दावा है कि हरियाणा को एनओसी के लिए कई बार अनुरोध भेजा जा चुका है। हाल ही में इस मुद्दे पर उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी चर्चा हुई थी। परियोजना के तहत नहर के दिल्ली हिस्से का सौंदर्यीकरण, नदी पुनर्जीवन और छठ घाटों का विकास भी प्रस्तावित है, जिसके लिए हरियाणा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, मुख्य कॉरिडोर के लिए एनओसी मिलना अभी भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
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