{"_id":"241ec66a74a8d509c66701a649abebf3","slug":"farmers-of-gurgaon-facing-hard-time-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्ज के बाद फसल हुई बर्बाद, कंगाली के कगार पर किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्ज के बाद फसल हुई बर्बाद, कंगाली के कगार पर किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 07 Nov 2015 07:02 PM IST
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पिछले कई साल से इलाके में कभी सूखा तो कभी बारिश-ओलावृष्टि से फसल खराब होने के चलते मेवात के किसानों का अब हौसला टूटने लगा है।
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बार-बार की आपदा की मार से किसानों की स्थिति यह बन गई है कि वे फसलों पर लिया गया कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं।
ऐसे में हर बार की तरह रबी और खरीफ की फसल बेचकर कर्ज चुकाने वाले किसानों पर बैंक की मोटी रकम अदा करने तथा आर्थिक तंगी का संकट गहरा गया है। इसके चलते क्षेत्र के किसानों को अपनी जमीन कुर्क होने का डर सता रहा है।
तीन साल पहले इलाके में भारी सूखे की स्थिति से किसान एक दम टूट गए थे। वहीं इस वर्ष बारिश और ओलावृृष्टि ने उनकी फसलें चौपट कर दीं।
मेवात के अधिकतर किसान फसलों के लिए बैंकों से कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन इस वर्ष भारी नुकसान ने किसानों को बैंकों का कर्ज चुकाने तक के लिए नहीं छोड़ा है।
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क्षेत्र के पुन्हाना, नगीना तथा फिरोजपुर झिरका के किसानों की स्थिति पर गौर करें तो भूमि विकास बैंक ने क्षेत्र के 5346 किसानों को 62.24 करोड़ रुपये बतौर कर्ज दिया था।
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किसानों को खरीफ तथा रबी की फसल का उठान करने पर कर्ज को सूद सहित वापस करना था, लेकिन लगातार प्रकृति की मार झेल रहे किसानों ने अभी तक कर्ज नहीं लौटाया है।
किसानों को कर्ज वितरण करने वाली शाखाओं से मिली जानकारी के अनुसार फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना तथा नगीना ब्लॉक कीभूमि विकास बैंक की तीनों शाखाओं का कुल टर्न ओवर इस समय 80 करोड रुपये का है।
इस रकम में से बैंक ने क्षेत्र के करीब 5346 किसानों को कर्ज के तौर पर 602453000 रुपये दिया है। बैंक के मुताबिक पिछले वर्ष भी फसलों में नुकसान के चलते किसानों ने बैंक को ब्याज सहित 2.29 करोड़ रुपये अदा किए थे, लेकिन इस वर्ष यह अदायगी केवल अभी तक 2.25 लाख रुपये ही पहुंची है।
किसानों के कर्ज न चुकाने से बैंकों पर कंगाली का खतरा बना हुआ है। भूमि विकास बैंक के ब्रांच मैनेजर याकूब खान ने बताया कि पिछले चार पांच साल से किसानों का कर्ज न चुकाना बैंक के लिए चिंता का विषय है।
सरकार का आदेश है कि किसानों से इस वर्ष की फसलों के ऋण की अदायगी न मांगी जाए। उन पर ऋण की जो पिछली बकाया राशि है, उसी के लिए उनसे तकादा किया जाए।
पिछले कई वर्षों से किसानों द्वारा ऋण वापस नहीं करने से बैंकों की स्थिति भी नाजुक हो गई, जिसके कारण क्षेत्र में किसानों के लिए स्थापित की गई भूमि विकास बैंकों को विभाग ने बंद करना शुरू कर दिया है।
किसानों से कर्ज नहीं मिलने से बैंकों में कार्यरत कर्मचारी वेतन को लेकर लंबे समय से जूझ रहे हैं। उनसे कहा गया है कि किसानों से कर्ज वसूल करो और वेतन पाओ।
हालांकि इससे पहले बैंक किसानों से जबरन वसूली कर अपनी साख बचाए हुई थी, लेकिन इस बार फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों से जबरन वसूली भी नहीं की जा सकती।