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होलिका पूजन कर परिवार के लिए मांगी सुख-समृद्धि

Sun, 28 Mar 2021 11:01 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 28 Mar 2021 11:01 PM IST
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Worshiping Holika and seeking happiness and prosperity for the family
फरीदाबाद। होली के त्योहार पर रविवार को परंपरागत रूप से होलिका दहन किया गया। होलिका दहन से पूर्व सभी जगह रीति रिवाज के साथ पूजा-पाठ किया गया। महिलाओं ने होली के गीत गाकर पूजा अर्चना की और परिवार में सुख समृद्धि की कामना की। शाम को 6.38 से 8.55 के शुभ मुहूर्त पर होलिका दहन किया गया।
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रविवार को जगह-जगह होलिका पूजन के लिए सुबह से ही महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाएं सजधज कर परिवार व गली-मोहल्ले की महिलाओं के साथ होलिका पूजन के लिए निकलीं। सुबह से व्रत रखकर महिलाओं ने होलिका पूजन कर बच्चों की लंबी आयु की कामना की। पूजन के दौरान होलिका की परिक्रमा कर कलावा व धागे के साथ सुरक्षा कवच बनाया। पूजन के बाद एक दूसरे को गुलाल लगाया और गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दीं। टोलियों में होली के गीत गाती हुई वापस गईं। नवविवाहिताएं अपनी सास के साथ होलिका पूजन के लिए पहुंचीं।
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ओल्ड फरीदाबाद पुरानी चुंगी के पास बनी होलिका काफी प्रसिद्ध थी। यहां पूजन के लिए मेला सा लग गया। शहर में सूर्यास्त के बाद होलिका दहन किया गया। होली में जितना महत्व रंगों का है, उतना ही महत्व होलिका दहन का है। फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को होलिका दहन किया जाता है। शाम को बल्लभगढ़ के होली चौक, एनआईटी के बांके बिहारी मंदिर चौक सहित ओल्ड फरीदाबाद, सेक्टर-16, एनआइटी-एक, दो, तीन व पांच में होलिका दहन किया गया।
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मिठाई की दुकानों पर उमड़ी भीड़
शहर में रविवार को रंग गुलाल के साथ ही मिठाई की दुकानों पर भी खूब भीड़ उमड़ी। लोग मिठाई की दुकानों पर जमकर खरीदारी करते दिखे। दुकानदारों ने ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए खोया के अलावा भी कई प्रकार की गुझिया बनाईं। खास होली पर खोये की गुझिया के अलावा गुड़ गुझिया, सूखे मेवे की गुझिया की भी खूब खरीदारी हुई। बीकानेर प्रतिष्ठान के मालिक ने बताया कि होली पर मिठाई में गुझिया की सबसे अधिक मांग रहती हैं। इसको लेकर त्योहार के पहले ही तैयारी करना शुरू कर देते हैं। होली पर ग्राहकों के लिए खोये की गुझिया के अलावा गुड़ गुझिया, सूखे मेवे की गुझिया की मांग रहती है।
लोगों ने कहा जैविक रंगों से खेलेंगे होली
होली खुशियां का त्योहार है। भाई चारे को बढ़ाने देने का पर्व है, इसलिए केमिकल रंगों की जगह जैविक रंगों और गुलाल से होली मनाएंगे। कोशिश करेंगे कि लोगों के घर जाने की बजाए अपने घर ही होली मनाएं, जिससे कोरोना से भी बचे रहें।
- प्रेम खट्टर, प्रधान, पंजाबी सेवा समिति, बल्लभगढ़
पानी कम इस्तेमाल करके गुलाल और चंदन की होली खेलूंगी। केमिकल रंगों का लोगों को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे त्वचा को नुकसान पहुंचने के साथ आंखों को भी काफी खतरा रहता है, इसलिए परिवार में सभी भाई बहन को गुलाल से होली खेलने के लिए जागरूक कर रही हूं।

-संगीता कुमारी, निवासी सेक्टर-37
होली पर इस बार अच्छा व्यापार होने की उम्मीद थी, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों ने व्यापार पर काफी असर डाला है। पिछले बार के मुकाबले इस बार व्यापार में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। लोग कोरोना के डर से मार्केट आने से कतरा रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण भी बाजार पर काफी असर पड़ा है।
- अजय नौनिहाल, प्रधान, व्यापारी एकता मंच, एनआईटी-एक नंबर
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