{"_id":"69cec1126a7b5567d003901b","slug":"workers-forced-to-migrate-due-to-lack-of-work-and-rising-expenses-faridabad-news-c-26-1-fbd1020-66458-2026-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: काम नहीं मिलने और खर्च बढ़ने से पलायन को मजबूर मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: काम नहीं मिलने और खर्च बढ़ने से पलायन को मजबूर मजदूर
विज्ञापन
लेबर चौक पर पहले जैसी नहीं जुट रही भीड़
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में गैस की किल्लत का असर अब श्रम बाजार पर भी दिखने लगा है। व्यावसायिक गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति से उद्योगों के साथ दिहाड़ी मजदूर भी परेशान हो रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि काम न मिलने व खर्च बढ़ जाने के दबाव के चलते मजदूरों को मजबूरन शहर छोड़कर गांव की तरफ जाना पड़ रहा है।
शहर में छोटे-बड़े करीब 28 हजार उद्योगों के साथ-साथ होटल, ढाबे और निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर काम करते हैं। बीते एक महीना से गैस किल्लत के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। मजदूर संगठनों और ठेकेदारों के अनुसार करीब 8 से 10 फीसदी मजदूर शहर छोड़ चुके हैं। इसका सीधा असर प्रमुख लेबर चौक पर दिखने लगा है जहां अब पहले जैसी भीड़ नहीं जुट रही। गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से इन कारोबार ने या तो काम सीमित कर दिया है या अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इससे यहां काम करने वाले रसोइये, हेल्पर और अन्य मजदूरों की आय पर सीधा असर पड़ा है। कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि गैस की कमी ने मजदूरों के खर्च को असंतुलित कर दिया है। छोटे सिलेंडरों में गैस महंगे दामों पर मिल रही है जिससे उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च में ही चला जा रहा है। ऐसे में शहर में रहना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सड़क, सीवर और भवन निर्माण जैसे प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं।
खाने का खर्च बढ़ने से रहना मुश्किल
ओल्ड फरीदाबाद के मजदूर चौक पर रामजी यादव ने बताया कि अब कई-कई दिन तक काम नहीं मिल रहा है। वहीं सुरेश पासवान का कहना है कि किराया और खाने का खर्च बढ़ने से शहर में रहना मुश्किल हो गया है। ऐसे में गांव लौटना ही उनके लिए सुरक्षित विकल्प बन गया है। ढाबों में काम करने वाले मजदूरों का भी यही हाल है जहां गैस न मिलने से काम पूरी तरह ठप हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में गैस की किल्लत का असर अब श्रम बाजार पर भी दिखने लगा है। व्यावसायिक गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति से उद्योगों के साथ दिहाड़ी मजदूर भी परेशान हो रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि काम न मिलने व खर्च बढ़ जाने के दबाव के चलते मजदूरों को मजबूरन शहर छोड़कर गांव की तरफ जाना पड़ रहा है।
शहर में छोटे-बड़े करीब 28 हजार उद्योगों के साथ-साथ होटल, ढाबे और निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर काम करते हैं। बीते एक महीना से गैस किल्लत के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। मजदूर संगठनों और ठेकेदारों के अनुसार करीब 8 से 10 फीसदी मजदूर शहर छोड़ चुके हैं। इसका सीधा असर प्रमुख लेबर चौक पर दिखने लगा है जहां अब पहले जैसी भीड़ नहीं जुट रही। गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से इन कारोबार ने या तो काम सीमित कर दिया है या अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इससे यहां काम करने वाले रसोइये, हेल्पर और अन्य मजदूरों की आय पर सीधा असर पड़ा है। कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि गैस की कमी ने मजदूरों के खर्च को असंतुलित कर दिया है। छोटे सिलेंडरों में गैस महंगे दामों पर मिल रही है जिससे उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च में ही चला जा रहा है। ऐसे में शहर में रहना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सड़क, सीवर और भवन निर्माण जैसे प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं।
विज्ञापन
खाने का खर्च बढ़ने से रहना मुश्किल
ओल्ड फरीदाबाद के मजदूर चौक पर रामजी यादव ने बताया कि अब कई-कई दिन तक काम नहीं मिल रहा है। वहीं सुरेश पासवान का कहना है कि किराया और खाने का खर्च बढ़ने से शहर में रहना मुश्किल हो गया है। ऐसे में गांव लौटना ही उनके लिए सुरक्षित विकल्प बन गया है। ढाबों में काम करने वाले मजदूरों का भी यही हाल है जहां गैस न मिलने से काम पूरी तरह ठप हो गया है।
विज्ञापन