{"_id":"68ef932d42db52b79d09cc26","slug":"work-on-aravali-zoo-safari-halted-until-further-orders-of-the-supreme-court-faridabad-news-c-24-1-gur1002-69842-2025-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: अरावली जू सफारी के कार्य पर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: अरावली जू सफारी के कार्य पर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक रोक
विज्ञापन
सेवानिवृत आईएफएस अधिकारियों और पीपल फॉर अरावलीज की याचिका पर अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अरावली जू सफारी पर अगले आदेश तक कोई कार्य नहीं किया जा सकेगा। अरावली जू सफारी पर अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी। बुधवार को जू सफारी को लेकर भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत अधिकारियों और पीपल फॉर अरावलीज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश के कोर्ट नंबर एक सुनवाई की।
पर्यावरणविदों के समूह ने अरावली जू सफारी पर रोक लगाने संबंधित याचिका दायर की थी। इसके पहले आठ अक्तूबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान अगले आदेश तक सफारी पर कोई भी कार्य बगैर कोर्ट की अनुमति के नहीं किए जाने का आदेश दिया गया था।
हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में अरावली की लगभग 10,000 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना को चुनौती देते हुए भारत के विभिन्न हिस्सों के पांच सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों और एक पर्यावरण समूह पीपल फॉर अरावलीज द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक कानूनी याचिका दायर की थी। यह मामला अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा के लिए दायर किया गया है, जो दिल्ली-एनसीआर को मरुस्थलीकरण से बचाने वाली एकमात्र प्राकृतिक दीवार है। यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भूजल संरक्षण, प्रदूषण अवशोषक, जलवायु नियंत्रक और वन्यजीव आवास के रूप में कार्य करता है।
विज्ञापन
यह मामला आठ अक्तूबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जिसमें हरियाणा सरकार और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी किया गया था। इसी की सुनवाई बुधवार 15 अक्तूबर को हुई। अब यह मामला सेवा निवृत आईएफएस अधिकारी डॉ. आरपी बलवान एवं अन्य बनाम राज्य हरियाणा एवं अन्य शीर्षक से वकील शिबानी घोष ने दायर किया है। याचिकाकर्ता आर.पी. बलवान ने बताया कि सरकार के वकील ने कहा कि फिलहाल 10 हजार एकड़ की जगह 3000 एकड़ में अरावली जू सफारी बनाई जानी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक किसी भी तरह के कार्य पर रोक रहेगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अरावली जू सफारी पर अगले आदेश तक कोई कार्य नहीं किया जा सकेगा। अरावली जू सफारी पर अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी। बुधवार को जू सफारी को लेकर भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत अधिकारियों और पीपल फॉर अरावलीज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश के कोर्ट नंबर एक सुनवाई की।
पर्यावरणविदों के समूह ने अरावली जू सफारी पर रोक लगाने संबंधित याचिका दायर की थी। इसके पहले आठ अक्तूबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान अगले आदेश तक सफारी पर कोई भी कार्य बगैर कोर्ट की अनुमति के नहीं किए जाने का आदेश दिया गया था।
विज्ञापन
हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में अरावली की लगभग 10,000 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना को चुनौती देते हुए भारत के विभिन्न हिस्सों के पांच सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों और एक पर्यावरण समूह पीपल फॉर अरावलीज द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक कानूनी याचिका दायर की थी। यह मामला अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा के लिए दायर किया गया है, जो दिल्ली-एनसीआर को मरुस्थलीकरण से बचाने वाली एकमात्र प्राकृतिक दीवार है। यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भूजल संरक्षण, प्रदूषण अवशोषक, जलवायु नियंत्रक और वन्यजीव आवास के रूप में कार्य करता है।
विज्ञापन
यह मामला आठ अक्तूबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जिसमें हरियाणा सरकार और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी किया गया था। इसी की सुनवाई बुधवार 15 अक्तूबर को हुई। अब यह मामला सेवा निवृत आईएफएस अधिकारी डॉ. आरपी बलवान एवं अन्य बनाम राज्य हरियाणा एवं अन्य शीर्षक से वकील शिबानी घोष ने दायर किया है। याचिकाकर्ता आर.पी. बलवान ने बताया कि सरकार के वकील ने कहा कि फिलहाल 10 हजार एकड़ की जगह 3000 एकड़ में अरावली जू सफारी बनाई जानी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक किसी भी तरह के कार्य पर रोक रहेगी।