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Faridabad News: पर्यटकों को भा रही वुड हैंडीक्राफ्ट कला
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेला इन दिनों देश-विदेश की कला और संस्कृति का अद्भुत संगम बन रहा है। सूरजकुंड मेला विभिन्न राज्यों की कलाकृतियां, भारतीय हस्तशिल्प की विविधता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बखूबी दर्शा रहा हैं। मेले में मुख्य चौपाल के पास उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए शिल्पकार अरशद की ओर से वुड हैंडीक्राफ्ट कला का सामान लगाया हुआ है जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
सहारनपुर से आए अरशद ने बताया कि यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि उनकी पुश्तैनी विरासत है। वे कई दशकों से सूरजकुंड मेले का हिस्सा बन रहे हैं। लकड़ी को तराश कर बनाई गई सुंदर आकृतियों और घरेलू सजावट के सामान में उनकी कई पीढ़ियों का अनुभव साफ झलकता है।
सहारनपुर के स्टॉल पर पर्यटकों के लिए हर बजट का सामान उपलब्ध है। शिल्पकारों के पास 100 रुपये के छोटे सजावटी सामान से लेकर 7 हजार रुपये तक के नक्काशीदार फर्नीचर और कलाकृतियां मौजूद हैं। मेले में आने वाले पर्यटक सहारनपुर की इस कला की जमकर सराहना कर रहे हैं। हस्तशिल्प की गुणवत्ता और वाजिब दाम के कारण इन स्टॉलों पर खरीदारों की भारी- भीड़ देखी जा रही है। शिल्पकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें न केवल एक बड़ा मंच देता है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उनके हुनर को नई उड़ान भी प्रदान करता है।
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फरीदाबाद। सूरजकुंड मेला इन दिनों देश-विदेश की कला और संस्कृति का अद्भुत संगम बन रहा है। सूरजकुंड मेला विभिन्न राज्यों की कलाकृतियां, भारतीय हस्तशिल्प की विविधता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बखूबी दर्शा रहा हैं। मेले में मुख्य चौपाल के पास उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए शिल्पकार अरशद की ओर से वुड हैंडीक्राफ्ट कला का सामान लगाया हुआ है जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
सहारनपुर से आए अरशद ने बताया कि यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि उनकी पुश्तैनी विरासत है। वे कई दशकों से सूरजकुंड मेले का हिस्सा बन रहे हैं। लकड़ी को तराश कर बनाई गई सुंदर आकृतियों और घरेलू सजावट के सामान में उनकी कई पीढ़ियों का अनुभव साफ झलकता है।
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सहारनपुर के स्टॉल पर पर्यटकों के लिए हर बजट का सामान उपलब्ध है। शिल्पकारों के पास 100 रुपये के छोटे सजावटी सामान से लेकर 7 हजार रुपये तक के नक्काशीदार फर्नीचर और कलाकृतियां मौजूद हैं। मेले में आने वाले पर्यटक सहारनपुर की इस कला की जमकर सराहना कर रहे हैं। हस्तशिल्प की गुणवत्ता और वाजिब दाम के कारण इन स्टॉलों पर खरीदारों की भारी- भीड़ देखी जा रही है। शिल्पकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें न केवल एक बड़ा मंच देता है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उनके हुनर को नई उड़ान भी प्रदान करता है।
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