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Faridabad News: भनकपुर गांव की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
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सिलाई का हुनर सीखकर कर रहीं कमाई, पहले दूसरों पर निर्भर थीं
निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। भनकपुर गांव की कई महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं। पहले वे कमाई के लिए दूसरों पर निर्भर थीं, अब आत्मनिर्भर बन गई हैं। गांव की एक महिला कुसुम के सामने पति की मौत के बाद परिवार चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च उठाने के लिए उन्होंने किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपने हुनर को रोजगार बनाया। घर से सिलाई का काम शुरू किया और मेहनत के दम पर धीरे-धीरे इसे आमदनी का जरिया बना लिया। आज कुसुम न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं।
आसपास की महिलाओं और ग्रामीणों के कपड़े सिलकर उन्होंने काम आगे बढ़ाया। मेहनत और अच्छे काम के कारण धीरे-धीरे ऑर्डर बढ़ने लगे। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में मदद मिलने लगी। कुसुम की मेहनत देखकर गांव की दूसरी महिलाओं में भी सिलाई सीखने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा बढ़ी। अब कई महिलाएं नियमित रूप से उनसे सिलाई सीखने पहुंच रही हैं। कुसुम उन्हें कपड़ों की कटिंग, सिलाई और डिजाइनिंग की बारीकियां सिखाती हैं।
सिलाई के हुनर से अपनी जरूरतें खुद पूरी करने का हौसला मिला है।
- कुसुम
हुनर मुझे अपने पैरों पर खड़ा होने की राह दिखा रहा है।
- पुष्पा
पहले दूसरों पर निर्भर थीं, अब खुद रोजगार शुरू करने का भरोसा है।
- ज्योति
कुसुम ने सिलाई ही नहीं सिखाई, आत्मनिर्भर बनने का हौसला भी दिया।
- मीनाक्षी
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निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। भनकपुर गांव की कई महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं। पहले वे कमाई के लिए दूसरों पर निर्भर थीं, अब आत्मनिर्भर बन गई हैं। गांव की एक महिला कुसुम के सामने पति की मौत के बाद परिवार चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च उठाने के लिए उन्होंने किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपने हुनर को रोजगार बनाया। घर से सिलाई का काम शुरू किया और मेहनत के दम पर धीरे-धीरे इसे आमदनी का जरिया बना लिया। आज कुसुम न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं।
आसपास की महिलाओं और ग्रामीणों के कपड़े सिलकर उन्होंने काम आगे बढ़ाया। मेहनत और अच्छे काम के कारण धीरे-धीरे ऑर्डर बढ़ने लगे। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में मदद मिलने लगी। कुसुम की मेहनत देखकर गांव की दूसरी महिलाओं में भी सिलाई सीखने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा बढ़ी। अब कई महिलाएं नियमित रूप से उनसे सिलाई सीखने पहुंच रही हैं। कुसुम उन्हें कपड़ों की कटिंग, सिलाई और डिजाइनिंग की बारीकियां सिखाती हैं।
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सिलाई के हुनर से अपनी जरूरतें खुद पूरी करने का हौसला मिला है।
- कुसुम
हुनर मुझे अपने पैरों पर खड़ा होने की राह दिखा रहा है।
- पुष्पा
पहले दूसरों पर निर्भर थीं, अब खुद रोजगार शुरू करने का भरोसा है।
- ज्योति
कुसुम ने सिलाई ही नहीं सिखाई, आत्मनिर्भर बनने का हौसला भी दिया।
- मीनाक्षी