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Faridabad News: महिलाओं को स्तनपान के प्रति किया जागरूक
Sat, 05 Aug 2023 06:24 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Sat, 05 Aug 2023 06:24 PM IST
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फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। बीके नागरिक अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इसमें कमरा नंबर 9 में उपचार करवाने के लिए आने वाली महिलाओं को स्तनपान के बारे में जागरूक किया जा रहा है। यह कार्यक्रम एक से सात अगस्त तक चलाया जाएगा।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पोणिता ने मां के दूध का महत्व बताया। स्तनपान को प्रोत्साहन देते हुए उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों के लिए प्रथम आहार के रूप में मां का दूध ही होता है। मां का दूध नवजात बच्चों के लिए अमृत से कम नहीं है। नवजात को स्तनपान जरूर कराएं। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बच्चे स्वस्थ रहते हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल ने बताया कि आज का प्रचलन है कि बाजार से डिब्बाबंद दूध नवजात को पिलाया जा रहा है, जो कि शिशु के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। नवजात को 6 माह तक संपूर्ण स्तनपान कराने के लिए माताओं को शपथ दिलाई गई। मां का दूध नहीं मिलने से बच्चों में कई प्रकार की समस्याएं विशेष रूप से कुपोषण जैसी घातक परेशानियां देखने को मिलती हैं। उन्हें स्तनपान को बढ़ावा देकर ही रोका जा सकता है। इससे बच्चे एवं मां में भावनात्मक जुड़ाव पैदा होता है और बच्चे का सर्वांगीण विकास होता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। बीके नागरिक अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इसमें कमरा नंबर 9 में उपचार करवाने के लिए आने वाली महिलाओं को स्तनपान के बारे में जागरूक किया जा रहा है। यह कार्यक्रम एक से सात अगस्त तक चलाया जाएगा।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पोणिता ने मां के दूध का महत्व बताया। स्तनपान को प्रोत्साहन देते हुए उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों के लिए प्रथम आहार के रूप में मां का दूध ही होता है। मां का दूध नवजात बच्चों के लिए अमृत से कम नहीं है। नवजात को स्तनपान जरूर कराएं। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बच्चे स्वस्थ रहते हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल ने बताया कि आज का प्रचलन है कि बाजार से डिब्बाबंद दूध नवजात को पिलाया जा रहा है, जो कि शिशु के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। नवजात को 6 माह तक संपूर्ण स्तनपान कराने के लिए माताओं को शपथ दिलाई गई। मां का दूध नहीं मिलने से बच्चों में कई प्रकार की समस्याएं विशेष रूप से कुपोषण जैसी घातक परेशानियां देखने को मिलती हैं। उन्हें स्तनपान को बढ़ावा देकर ही रोका जा सकता है। इससे बच्चे एवं मां में भावनात्मक जुड़ाव पैदा होता है और बच्चे का सर्वांगीण विकास होता है।
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