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Faridabad News: घर की दहलीज से ऑनलाइन बाजार तक पहुंची बल्लभगढ़ की महिलाएं
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सोशल मीडिया पर कपड़े, आभूषण और घरेलू उत्पाद बेचकर बना रहीं पहचान
निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। महिलाएं अब घर से ही अपने कारोबार को बाजार तक पहुंचा रही हैं। बल्लभगढ़ की दो महिलाएं सोशल मीडिया के जरिये कपड़े, आभूषण और घरेलू उत्पाद बेच रही हैं। मोबाइल पर उत्पादों की तस्वीरें साझा करने से लेकर ग्राहकों के ऑर्डर लेने, सामान पैक करने और डिलीवरी की व्यवस्था करने तक की जिम्मेदारी वे खुद संभाल रही हैं।
घर से कारोबार शुरू करने वाली महिलाओं के लिए शुरुआती दौर में ग्राहक बनाना बड़ी चुनौती होती है। वे व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर उत्पादों की तस्वीरें साझा करती हैं और ग्राहकों की पूछताछ का जवाब देती हैं। धीरे-धीरे पहचान बढ़ने पर पुराने ग्राहक दोबारा ऑर्डर देते हैं और अपने परिचितों को भी उत्पादों के बारे में बताते हैं। इससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। शुरुआती दिनों में महीने में पांच से दस ऑर्डर मिलते थे, लेकिन अब यह संख्या 40 से 50 तक पहुंच गई है।
दुकान का किराया बचा, लेकिन खर्च भी कम नहीं
घर से कारोबार करने का फायदा यह है कि दुकान का किराया और अन्य स्थायी खर्च बच जाते हैं। इसके बावजूद सामान खरीदने, पैकिंग करने और ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने में पैसा खर्च होता है। ऑर्डर की संख्या और उत्पाद के प्रकार के अनुसार लागत बदलती रहती है। ऐसे में बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम को मुनाफा नहीं माना जा सकता। महिलाओं ने बताया कि पैकिंग पर प्रति ऑर्डर 25 से 50 रुपये तक खर्च होता है।
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घर से कारोबार करने पर दुकान का किराया बच जाता है, लेकिन सामान खरीदने, पैकिंग और डिलीवरी का खर्च भी ध्यान में रखना पड़ता है।
- रोशनी
घर की जिम्मेदारियों के साथ ऑर्डर संभालने में समय का ध्यान रखना पड़ता है। ग्राहक का भरोसा बने तो कारोबार आगे बढ़ाने का हौसला मिलता है।
- मिताली
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निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। महिलाएं अब घर से ही अपने कारोबार को बाजार तक पहुंचा रही हैं। बल्लभगढ़ की दो महिलाएं सोशल मीडिया के जरिये कपड़े, आभूषण और घरेलू उत्पाद बेच रही हैं। मोबाइल पर उत्पादों की तस्वीरें साझा करने से लेकर ग्राहकों के ऑर्डर लेने, सामान पैक करने और डिलीवरी की व्यवस्था करने तक की जिम्मेदारी वे खुद संभाल रही हैं।
घर से कारोबार शुरू करने वाली महिलाओं के लिए शुरुआती दौर में ग्राहक बनाना बड़ी चुनौती होती है। वे व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर उत्पादों की तस्वीरें साझा करती हैं और ग्राहकों की पूछताछ का जवाब देती हैं। धीरे-धीरे पहचान बढ़ने पर पुराने ग्राहक दोबारा ऑर्डर देते हैं और अपने परिचितों को भी उत्पादों के बारे में बताते हैं। इससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। शुरुआती दिनों में महीने में पांच से दस ऑर्डर मिलते थे, लेकिन अब यह संख्या 40 से 50 तक पहुंच गई है।
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दुकान का किराया बचा, लेकिन खर्च भी कम नहीं
घर से कारोबार करने का फायदा यह है कि दुकान का किराया और अन्य स्थायी खर्च बच जाते हैं। इसके बावजूद सामान खरीदने, पैकिंग करने और ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने में पैसा खर्च होता है। ऑर्डर की संख्या और उत्पाद के प्रकार के अनुसार लागत बदलती रहती है। ऐसे में बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम को मुनाफा नहीं माना जा सकता। महिलाओं ने बताया कि पैकिंग पर प्रति ऑर्डर 25 से 50 रुपये तक खर्च होता है।
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घर से कारोबार करने पर दुकान का किराया बच जाता है, लेकिन सामान खरीदने, पैकिंग और डिलीवरी का खर्च भी ध्यान में रखना पड़ता है।
- रोशनी
घर की जिम्मेदारियों के साथ ऑर्डर संभालने में समय का ध्यान रखना पड़ता है। ग्राहक का भरोसा बने तो कारोबार आगे बढ़ाने का हौसला मिलता है।
- मिताली