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Faridabad News: धान से बनी ज्वेलरी महिलाओं को आ रही पसंद
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कला के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मिल चुका है सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। मेले में धान से बनी ज्वेलरी महिलाओं को काफी पसंद आ रही है। वेस्ट बंगाल की रहने वाली पुतुल दास मित्रा धान से बने आभूषण लेकर मेले में आई हैं। पुतुल दास मित्रा ने बताया कि वह धान की खेती करती हैं। कटाई के बाद जब धान घर पर आता है तो उससे उन्होंने एक राखी बनाई थी। उस राखी को परिवार के लोगों ने काफी पसंद किया। उसके बाद उन्होंने धान से महिलाओं के द्वारा पहनने वाली ज्वेलरी बनाना शुरू किया। उन्होंने धान से कान और गले की ज्वेलरी बनानी शुरू की। जब वह इन गहनों को पहनकर बाहर जाती थी, तो महिलाएं व युवतियां काफी पसंद करती थीं। उसके बाद परिवार के सहयोग से प्रदेश में लगने वाले 22 दिन के एक मेले में पहली बार धान से बनाए गए आभूषण बेचने का मौका मिला। उस मेले में 15 दिन के दौरान उन्होंने 18 हजार रुपये की ज्वेलरी बेची। उसके बाद उन्होंने अपनी कला को और निखरा। अब वह विभिन्न प्रकार की ज्वेलरी बनाती हैं। जिनको देश विदेश के लोग काफी पसंद करते हैं। इस कला के लिए उनको वर्ष 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया। वहीं वह साल 2008 से सूरजकुंड मेले में लगभग हर दूसरे साल हिस्सा लेने के लिए आती हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। मेले में धान से बनी ज्वेलरी महिलाओं को काफी पसंद आ रही है। वेस्ट बंगाल की रहने वाली पुतुल दास मित्रा धान से बने आभूषण लेकर मेले में आई हैं। पुतुल दास मित्रा ने बताया कि वह धान की खेती करती हैं। कटाई के बाद जब धान घर पर आता है तो उससे उन्होंने एक राखी बनाई थी। उस राखी को परिवार के लोगों ने काफी पसंद किया। उसके बाद उन्होंने धान से महिलाओं के द्वारा पहनने वाली ज्वेलरी बनाना शुरू किया। उन्होंने धान से कान और गले की ज्वेलरी बनानी शुरू की। जब वह इन गहनों को पहनकर बाहर जाती थी, तो महिलाएं व युवतियां काफी पसंद करती थीं। उसके बाद परिवार के सहयोग से प्रदेश में लगने वाले 22 दिन के एक मेले में पहली बार धान से बनाए गए आभूषण बेचने का मौका मिला। उस मेले में 15 दिन के दौरान उन्होंने 18 हजार रुपये की ज्वेलरी बेची। उसके बाद उन्होंने अपनी कला को और निखरा। अब वह विभिन्न प्रकार की ज्वेलरी बनाती हैं। जिनको देश विदेश के लोग काफी पसंद करते हैं। इस कला के लिए उनको वर्ष 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया। वहीं वह साल 2008 से सूरजकुंड मेले में लगभग हर दूसरे साल हिस्सा लेने के लिए आती हैं।