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Faridabad News: एफआरयू अस्पताल की पार्किंग में महिला की डिलीवरी, स्टाफ पर लापरवाही के आरोप

Sat, 16 May 2026 10:48 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 10:48 PM IST
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Woman Delivers Baby in FRU Hospital Parking Lot; Staff Accused of Negligence
अस्पताल का मुख्य गेट बंद होने का आरोप, इमरजेंसी वार्ड में कोई स्टाफ नहीं था मौजूद
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सेक्टर-3 स्थित फर्स्ट रेफरल यूनिट में रात करीब 2 बजे प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला ने अस्पताल की पार्किंग में ही बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि उस समय अस्पताल का मुख्य गेट बंद था और इमरजेंसी वार्ड में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। जिस वजह से महिला के साथ आई उसकी चाची ने डिलीवरी करवा दी।
डिलीवरी होने के बाद स्टाफ महिला को लेकर पहली मंजिल पर गए और उसको भर्ती किया। इस घटना के बाद महिला व बच्चा सुरक्षित है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को लेकर टीम का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार, बड़ौली गांव निवासी बलेश को देर रात अचानक तेज लेबर पेन शुरू हुआ। परिवार के सदस्य उसे तुरंत सेक्टर 3 स्थित एफआरयू अस्पताल लेकर पहुंचे। महिला के जेठ चमन चंदीला ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर मुख्य गेट बंद मिला। किसी तरह गेट खोलकर वह इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचे लेकिन वहां भी कोई नर्स या स्टाफ सदस्य मौजूद नहीं था।
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परिवार के बाकी सदस्य उस दौरान महिला को अस्पताल की पार्किंग में संभाले खड़े रहे। चमन ने बताया कि उन्होंने खुद अस्पताल से व्हीलचेयर निकाली और महिला को बैठाने की कोशिश की लेकिन हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। काफी देर तक कोई मेडिकल स्टाफ मौके पर नहीं पहुंचा। ऐसे में महिला के साथ आई उसकी मां और अन्य परिजनों ने मजबूरी में पार्किंग में ही प्रसव कराने का फैसला लिया। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते डिलीवरी नहीं कराई जाती तो मां और बच्चे दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी। पार्किंग में ही महिला बलेश ने एक बेटे को जन्म दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
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घटना की एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं। वीडियो के अनुसार अस्पताल की पार्किंग में स्टाफ नर्स डिलीवरी के बाद की प्रक्रिया पूरी करती दिखाई दे रही है। आसपास पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण नर्सों को टॉर्च की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। वीडियो में एक नर्स हाथ में टॉर्च पकड़े खड़ी नजर आ रही है, जबकि दूसरी नर्स उसी रोशनी में महिला और नवजात की देखभाल करती दिखाई दे रही है। परिजनों का कहना है कि डिलीवरी होने के बाद अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचा। वीडियो में परिवार के सदस्य स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए चिल्लाते भी दिखाई दे रहे हैं। एक व्यक्ति यह कहते सुनाई देता है कि अगर महिला की जान चली जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। बाद में अस्पताल की एक नर्स परिजनों को शांत कराने और समझाने का प्रयास करती नजर आती है।

घटना की सूचना अधिकारियों को दी गई। शनिवार सुबह डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रचना स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। उनका कहना है कि घटना संज्ञान में आ चुकी है। उन्होंने बताया कि महिला गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची थी और स्टाफ को तैयार होने में करीब 5 से 7 मिनट का समय लगा, क्योंकि उन्हें जरूरी उपकरण और अन्य सामान लेना था। इसी दौरान महिला की डिलीवरी पार्किंग में हो गई। स्टाफ ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पार्किंग में ही डिलीवरी के बाद की सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी की और बाद में महिला व नवजात को वार्ड में भर्ती कराया गया। इस मामले को लेकर एक टीम का गठन किया जाएगा। उसके बाद अगर जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जांच कमेटी गठित, निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश
गर्भवती महिला की डिलीवरी स्वास्थ्य केंद्र के प्रवेश द्वार के पास होने के मामले को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग के अनुसार केंद्र में ओपीडी और इमरजेंसी के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार हैं लेकिन परिजनों को इसकी जानकारी नहीं होने से भ्रम की स्थिति बनी और घटना हुई। मामले की सूचना मिलते ही एमसीएच निदेशक डॉ वीरेंद्र यादव ने केंद्र का निरीक्षण किया। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के निर्देश पर जांच के आदेश दिए गए। अधिकारी महिला और नवजात से मिले तथा दोनों को स्वस्थ बताया। परिजनों ने भी उपचार पर संतोष जताया है। सीएमओ डॉ जयंत आहूजा और डिप्टी सीएमओ डॉ रचना की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है। साथ ही अब रात में दोनों गेट 24 घंटे खुले रखने, एंबुलेंस तैनात करने और इमरजेंसी स्टाफ निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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