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घर की छतों पर अर्घ्य देकर भगवान भास्कर से की सुख-समृद्धि की कामना
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फरीदाबाद में सेक्टर 49 सैनिक कालोनी में छठ पूजा करते श्रद्धालु ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। ‘कांचहि बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए, दर्शन दीन्हीं ना अपन ये छठी मइया’ जैसे गीत गाकर महिलाओं द्वारा सूर्य की उपासना की गई। छठ महापर्व को उत्साह पूर्वक मनाने के लिए बिहार व पूर्वांचल के लोगों ने शुक्रवार की शाम घरों की छत पर टब में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई, जबकि पर्व के आखिरी दिन शनिवार की सुबह उगते सूर्य की आराधना की जाएगी।
जिले में करीब छह लाख पूर्वांचल के लोग रहते हैं। हर साल धूमधाम से छठ महोत्सव मनाया जाता है। इस बार कोरोना महामारी श्रद्धालुओं की आस्था में बाधा बनकर खड़ी हो गई, मगर उनका हौसला नहीं डगमगा सकी। शुक्रवार को व्रती महिलाओं ने गन्ने के मंडप सजाकर उसमें विभिन्न प्रकार के फलों और पकवानों को रखकर पूजा की। सूर्य के डूबने से पहले महिलाओं ने जल से भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया। गांधी कॉलोनी में पंडित लक्ष्मी नारायण ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इसके साथ ही सूर्य की उपासना की कहानी सुनाई। इस दौरान महिलाओं ने घर की छतों पर टब में दीपदान भी किया।
प्रशासन की नहीं मिली मंजूरी, छठ घाट रखे सूने
जिले में शुक्रवार को एसजीएम नगर, खेड़ीपुल, अशोका एंक्लेव, सेक्टर-3, 7, 22, 23, राजीव कॉलोनी, सेक्टर-46 और 48 में बनाए गए छठ घाट सूने रहे। हर साल श्रद्धालुओं इन तालाबों (घाट) के पानी में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देते हैं। इन घाटों पर उत्सव का माहौल रहता है। परंपरागत गीतों की धूम और ढोल की थाप के साथ श्रद्धालु पूजा स्थल पहुंचते हैं।
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घाट से श्रद्धालुओं को पुलिस ने लौटाया वापस
छठ की पूजा के लिए एक परिवार जब एसजीएम नगर स्थित घाट पर पहुंचा तो यहां तैनात पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें तुरंत लौटा दिया। पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें समझाया कि कोरोना महामारी का खतरा बढ़ रहा है। इस कारण प्रशासन की ओर से घाट पर पूजा करने की अनुमति नहीं है। आप सभी घर पर ही पूजा करें।
आज दिया जाएगा उगते सूर्य को अर्घ्य
चार दिनों तक चलने वाले छठ महोत्सव के आखिरी दिन शनिवार को श्रद्धालु महिलाओं द्वारा उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन किया जाएगा। पुलिस-प्रशासन द्वारा आज के लिए भी सभी से अपील की गई है कि अपनी छतों पर ही अर्घ्य दें।
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जिले में करीब छह लाख पूर्वांचल के लोग रहते हैं। हर साल धूमधाम से छठ महोत्सव मनाया जाता है। इस बार कोरोना महामारी श्रद्धालुओं की आस्था में बाधा बनकर खड़ी हो गई, मगर उनका हौसला नहीं डगमगा सकी। शुक्रवार को व्रती महिलाओं ने गन्ने के मंडप सजाकर उसमें विभिन्न प्रकार के फलों और पकवानों को रखकर पूजा की। सूर्य के डूबने से पहले महिलाओं ने जल से भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया। गांधी कॉलोनी में पंडित लक्ष्मी नारायण ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इसके साथ ही सूर्य की उपासना की कहानी सुनाई। इस दौरान महिलाओं ने घर की छतों पर टब में दीपदान भी किया।
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प्रशासन की नहीं मिली मंजूरी, छठ घाट रखे सूने
जिले में शुक्रवार को एसजीएम नगर, खेड़ीपुल, अशोका एंक्लेव, सेक्टर-3, 7, 22, 23, राजीव कॉलोनी, सेक्टर-46 और 48 में बनाए गए छठ घाट सूने रहे। हर साल श्रद्धालुओं इन तालाबों (घाट) के पानी में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देते हैं। इन घाटों पर उत्सव का माहौल रहता है। परंपरागत गीतों की धूम और ढोल की थाप के साथ श्रद्धालु पूजा स्थल पहुंचते हैं।
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घाट से श्रद्धालुओं को पुलिस ने लौटाया वापस
छठ की पूजा के लिए एक परिवार जब एसजीएम नगर स्थित घाट पर पहुंचा तो यहां तैनात पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें तुरंत लौटा दिया। पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें समझाया कि कोरोना महामारी का खतरा बढ़ रहा है। इस कारण प्रशासन की ओर से घाट पर पूजा करने की अनुमति नहीं है। आप सभी घर पर ही पूजा करें।
आज दिया जाएगा उगते सूर्य को अर्घ्य
चार दिनों तक चलने वाले छठ महोत्सव के आखिरी दिन शनिवार को श्रद्धालु महिलाओं द्वारा उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन किया जाएगा। पुलिस-प्रशासन द्वारा आज के लिए भी सभी से अपील की गई है कि अपनी छतों पर ही अर्घ्य दें।