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Faridabad News: प्राकृतिक तरीके से साफ होगा पानी
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दिल्ली की सॉइल बायो टेक्नोलॉजी तर्ज पर बनाया जाएगा एसटीसी, निर्माण शुरू
शोधित पानी का इस्तेमाल दशहरा मैदान और आसपास के पार्कों में किया जाएगा
आईआईटी मुंबई की तकनीक की भी मदद ली, दो एमएलडी होगी एसटीपी की क्षमता
धनंजय चौहान
फरीदाबाद। सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहे एनआईटी के निवासियों के लिए राहत की खबर है। नगर निगम की ओर से दशहरा मैदान के पास दिल्ली की तर्ज पर दो एमएलडी क्षमता के सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसमें आईआईटी मुंबई की तकनीक की भी मदद ली गई है। शोधित पानी का इस्तेमाल दशहरा मैदान और आसपास के पार्कों में किया जाएगा। दो एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी में सीवर ओवरफ्लो और जाम की भारी समस्या है। पुरानी लाइनों की क्षमता कम होने के कारण लोगों को ओवरफ्लो की समस्या से जूझना पड़ रहा है। आए दिन लोग नगर निगम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते हैं। पिछले दिनों नंगला रोड स्थित भड़ाना चौक पर मैनहोल में गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं दो साल पहले शहर वासियों को सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निजात दिलाने के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम ने मिलकर आठ अलग-अलग जगहों पर सीवर शोधन संयंत्र लगाने की योजना तैयार की थी। योजना के तहत संयंत्र लगाने का पैसा स्मार्ट सिटी लिमिटेड देगा, जबकि निर्माण कार्य नगर निगम की ओर से कराया जाएगा। योजना के तहत पहले नगर निगम ने दिल्ली स्थित लोदी गार्डन में बने सॉइल बायो टेक्नोलॉजी की तर्ज पर सीवर शोधन संयंत्र का निर्माण कार्य दशहरा ग्राउंड में शुरू कर दिया गया है।
नई तकनीक पर आधारित प्रदेश का पहला सीवर शोधन संयंत्र होगा
दो एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा। इसका प्रयोग पास के गार्डन में किया जाएगा। साथ ही भवन निर्माण कार्य में भी इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। पूरे हरियाणा में इस टेक्नोलॉजी पर आधारित सीवर शोधन संयंत्र फरीदाबाद में पहला प्लांट होगा।
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शहर का पानी किया जाएगा इस्तेमाल
जिले में हर रोज 300 एमएलडी सीवर का पानी जनरेट होता है, जो सीधा बादशाहपुर, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जाता है और वहां से सीधा यमुना में बहा दिया जाता है। उसका कोई इस्तेमाल नहीं है। दूसरी तरफ इस वक्त शहर के बीचोंबीच छोटे एसटीपी लगाने की भी जरूरत है, ताकि शहर का पानी शहर में ही साफ होकर उसका इस्तेमाल किया जा सके इसलिए नगर निगम ने निजी एजेंसी से नई तकनीक का छोटा एसटीपी तैयार कराने का काम शुरू कराया है।
जूट की बोरी, मिट्टी, रेती, रोड़ी करेगी पानी साफ
टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर आरके सक्सेना ने बताया कि एनआईटी स्थित दशहरा ग्राउंड के अंदर सॉइल बायो टेक्नोलॉजी पर आधारित मिनी एसटीपी तैयार किया जा रहा है। इसमें किसी भी तरह के मैकेनिजम का इस्तेमाल नहीं होगा। केवल प्राकृतिक तरीके से पानी को साफ किया जाएगा। आईआईटी मुंबई की तकनीक है जिसमें दो एमएलडी का एसटीपी तैयार किया जा रहा है। इसमें दो बड़े पानी के टैंक बनाए जाएंगे, जिसमें जूट की बोरी, मिट्टी, रेती, रोड़ी आदि की लेयर बनाई जाएगी और पानी को इसके अंदर से गुजारा जाएगा जिससे पानी साफ होता चला जाएगा। इन टैंक के ऊपर पार्क बनाया जाएगा जिसमें छोटे पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों की जड़ भी पानी को साफ रखेगी।
दशहरा ग्राउंड के पास बनाए जा रहे सीवर शोधन संयंत्र के निर्माण पर ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे अप्रैल तक तैयार कर चालू कर दिया जाएगा। साफ पानी रोज गार्डन में सिंचाई के काम आएगा। वहीं भवन निर्माण करने वाले भी यहां से पानी ले जा सकते हैं।
- नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम
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शोधित पानी का इस्तेमाल दशहरा मैदान और आसपास के पार्कों में किया जाएगा
आईआईटी मुंबई की तकनीक की भी मदद ली, दो एमएलडी होगी एसटीपी की क्षमता
धनंजय चौहान
फरीदाबाद। सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहे एनआईटी के निवासियों के लिए राहत की खबर है। नगर निगम की ओर से दशहरा मैदान के पास दिल्ली की तर्ज पर दो एमएलडी क्षमता के सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसमें आईआईटी मुंबई की तकनीक की भी मदद ली गई है। शोधित पानी का इस्तेमाल दशहरा मैदान और आसपास के पार्कों में किया जाएगा। दो एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी में सीवर ओवरफ्लो और जाम की भारी समस्या है। पुरानी लाइनों की क्षमता कम होने के कारण लोगों को ओवरफ्लो की समस्या से जूझना पड़ रहा है। आए दिन लोग नगर निगम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते हैं। पिछले दिनों नंगला रोड स्थित भड़ाना चौक पर मैनहोल में गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं दो साल पहले शहर वासियों को सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निजात दिलाने के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम ने मिलकर आठ अलग-अलग जगहों पर सीवर शोधन संयंत्र लगाने की योजना तैयार की थी। योजना के तहत संयंत्र लगाने का पैसा स्मार्ट सिटी लिमिटेड देगा, जबकि निर्माण कार्य नगर निगम की ओर से कराया जाएगा। योजना के तहत पहले नगर निगम ने दिल्ली स्थित लोदी गार्डन में बने सॉइल बायो टेक्नोलॉजी की तर्ज पर सीवर शोधन संयंत्र का निर्माण कार्य दशहरा ग्राउंड में शुरू कर दिया गया है।
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नई तकनीक पर आधारित प्रदेश का पहला सीवर शोधन संयंत्र होगा
दो एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा। इसका प्रयोग पास के गार्डन में किया जाएगा। साथ ही भवन निर्माण कार्य में भी इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। पूरे हरियाणा में इस टेक्नोलॉजी पर आधारित सीवर शोधन संयंत्र फरीदाबाद में पहला प्लांट होगा।
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शहर का पानी किया जाएगा इस्तेमाल
जिले में हर रोज 300 एमएलडी सीवर का पानी जनरेट होता है, जो सीधा बादशाहपुर, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जाता है और वहां से सीधा यमुना में बहा दिया जाता है। उसका कोई इस्तेमाल नहीं है। दूसरी तरफ इस वक्त शहर के बीचोंबीच छोटे एसटीपी लगाने की भी जरूरत है, ताकि शहर का पानी शहर में ही साफ होकर उसका इस्तेमाल किया जा सके इसलिए नगर निगम ने निजी एजेंसी से नई तकनीक का छोटा एसटीपी तैयार कराने का काम शुरू कराया है।
जूट की बोरी, मिट्टी, रेती, रोड़ी करेगी पानी साफ
टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर आरके सक्सेना ने बताया कि एनआईटी स्थित दशहरा ग्राउंड के अंदर सॉइल बायो टेक्नोलॉजी पर आधारित मिनी एसटीपी तैयार किया जा रहा है। इसमें किसी भी तरह के मैकेनिजम का इस्तेमाल नहीं होगा। केवल प्राकृतिक तरीके से पानी को साफ किया जाएगा। आईआईटी मुंबई की तकनीक है जिसमें दो एमएलडी का एसटीपी तैयार किया जा रहा है। इसमें दो बड़े पानी के टैंक बनाए जाएंगे, जिसमें जूट की बोरी, मिट्टी, रेती, रोड़ी आदि की लेयर बनाई जाएगी और पानी को इसके अंदर से गुजारा जाएगा जिससे पानी साफ होता चला जाएगा। इन टैंक के ऊपर पार्क बनाया जाएगा जिसमें छोटे पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों की जड़ भी पानी को साफ रखेगी।
दशहरा ग्राउंड के पास बनाए जा रहे सीवर शोधन संयंत्र के निर्माण पर ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे अप्रैल तक तैयार कर चालू कर दिया जाएगा। साफ पानी रोज गार्डन में सिंचाई के काम आएगा। वहीं भवन निर्माण करने वाले भी यहां से पानी ले जा सकते हैं।
- नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम