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आईएएस अधिकारियों को जांच में शामिल कर सकती है विजिलेंस

Mon, 29 Aug 2022 10:42 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2022 10:42 PM IST
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Vigilance may include IAS officers in investigation this week
फरीदाबाद। नगर निगम के 200 करोड़ घोटाले मामले में विजिलेंस इस सप्ताह आईएएस अधिकारियों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी कर देगी। जांच टीम ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल तीन आईएएस अधिकारी विजिलेंस के रडार पर हैं। सभी घोटाले के दौरान नगर निगम में आयुक्त के पद पर रहे थे। अब विजिलेंस सभी को कार्यालय में बुलाकर पूछताछ करेगी।
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पिछले दस दिनों से विजिलेंस विभाग की टीम अधिकारियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रही थी। इसके लिए विजिलेंस टीम ने नगर निगम के अकाउंट और इंजीनियरिंग शाखा की फाइलें खंगाली हैं। डीएसपी अनिल यादव की अगुवाई में रिकार्ड खंगाला गया है। सूत्रों ने मुताबिक विजिलेंस के पास सभी आईएएस अधिकारियों के खिलाफ ऐसे सबूत हैं। जिससे ये मालूम पड़ता है कि घोटाले की जानकारी उन्हें पहले से थी। किसी ने भी इसे रोकने की कोशिश नहीं की। कई फाइलों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हैं, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया है। ऐसी फाइलें ऐसी भी हैं, जिनमें ठेकेदार को दिए कार्य की लागत राशि बढ़ाई और बिना कार्य किए भुगतान कर दिया गया। घोटाले में विजिलेंस अभी तक ठेकेदार सतवीर, निलंबित मुख्य अभियंता डीआर भास्कर, रमन शर्मा, जेई दीपक शर्मा को गिरफ्तार कर चुकी है। सभी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। इसके बाद ऑडिट शाखा के संयुक्त निदेशक दीपक थापर, वरिष्ठ लेखा अधिकारी विशाल कौशिक, वित्त नियंत्रक सतीश कुमार और वरिष्ठ लेखा अधिकारी हरगुलाल फागना को गिरफ्तार किया गया। ये सभी फिलहाल जेल में हैं।
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यह है मामला
घोटाला मई 2020 में उजागर हुआ था। नगर निगम के चार तत्कालीन पार्षदों दीपक चौधरी, दीपक यादव, सुरेंद्र अग्रवाल, महेंद्र सरपंच ने तत्कालीन निगम आयुक्त को शिकायत दी कि लेखा विभाग ने ठेकेदार सतबीर की विभिन्न फर्मों को बिना काम के ही भुगतान कर दिया। निगम आयुक्त ने अपने स्तर पर कराई जांच में पाया कि भुगतान में अनियमितताएं बरती गई हैं। उन्होंने विजिलेंस से जांच की सिफारिश की। साल 2020 से विजिलेंस मामले की जांच कर रही है।
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