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Faridabad News: शहरी मतदाताओं ने भाजपा के सिर सजाया ताज, कमजोर संगठन ने दिलाई कांग्रेस को बड़ी हार
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भाजपा ने अपने संगठन, प्रचार के बल पर सभी दलों का फरीदाबाद से किया सूपड़ा साफ
भाजपा ने मेयर समेत 39 सीटाें पर किया कब्जा, कांग्रेस के हाथ लगी केवल एक पार्षद सीट
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। मजबूत संगठन और शहरी मतदाताओं ने भाजपा के सिर पर फरीदाबाद नगर निगम की रिकॉर्ड मतों से जीत का ताज सजाया। दूसरी तरफ, कांग्रेस, आप और बसपा जैसे दलों का फरीदाबाद में संगठन न होना उनकी सबसे बड़ी हार का कारण बना। भाजपा ने जहां चुनाव के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। वहीं, फरीदाबाद शहर में भाजपा के बढ़ते वोट बैंक के चलते अनमने ढंग से अन्य राजनीतिक दलों का चुनाव लड़ना भी बड़ी हार का सबब बना।
पिछले 10 वर्षों से हरियाणा समेत फरीदाबाद में लोकसभा, विधानसभा में काबिज भारतीय जनता पार्टी का मनोबल नगर निगम चुनावों में चरम पर था। फरीदाबाद लोकसभा के बाद विधानसभा की जिले में 6 में से 5 सीटों पर जीत के चलते शुरू से ही भाजपा पूरी तैयारी से नगर निगम चुनावों में उतरी थी। नगर निगम चुनावों की घोषणा होने के बाद से ही भाजपा में पार्षद और मेयर प्रत्याशियों के लिए टिकट मांगने वाले दावेदारों की लाइन लग गई थी। वहीं, हरियाणा विधानसभा में भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाली कांग्रेस पार्टी में मेयर और पार्षद पदों के लिए बड़े नेताओं ने किनारा किया हुआ था। विधानसभा चुनावाें में हार का मुंह देखने वाले कांग्रेस नेता निगम चुनावों में स्वयं या अपने किसी परिवार के सदस्यों को उतारने में संकोच कर रहे थे।
इसके अलावा शहर में भाजपा पहले से ही मजबूत थी। ऐसे में निगम चुनावों में अधिकतर शहरी मतदाताओं के चलते भाजपा ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की।
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भाजपा के मजबूत संगठन के सामने बिखरा विपक्ष
भारतीय जनता पार्टी का संगठन बूथ स्तर तक फरीदाबाद में मजबूत है। फरीदाबाद में 10 हजार से अधिक भाजपा के कार्यकर्ता और सदस्य हैं। भाजपा से सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, प्रदेश के दो मंत्री विपुल गोयल (कैबिनेट मंत्री) और राजेश नागर (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार) समेत पूरा संगठन खड़ा था। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का जिले में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव तक नहीं है। वहीं, आम आदमी पार्टी और बसपा का भी जिले में संगठन न होना मतदाता का मोह भंग कर गया।
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भाजपा ने प्रचार में झोंक दी थी पूरी ताकत
भाजपा ने नगर निगम चुनावों को बेहद गंभीर तरीके से लिया था। चुनाव प्रचार करने के लिए पार्टी से स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दो बार फरीदाबाद आए। उन्होंने यहां पर ताबड़तोड़ जनसभा और रोड शो कर माहौल बना दिया। इसके अलावा पूर्वांचल मतदाताओं को रिझाने के लिए सांसद और गायक मनोज तिवारी समेत कई नामचीन नेता प्रचार में उतरे थे। वहीं, कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रचार करने के लिए एकमात्र चेहरा प्रदेश अध्यक्ष ही जिले में अधिक दिखलाई पड़े। प्रचार के एक दिन केवल सांसद दीपेंद्र हुड्डा आए थे। वहीं, आप पार्टी से केवल संजय सिंह ने पार्षद प्रत्याशी के लिए एक-दो छुटपुट जनसभा कर प्रचार की औपचारिकता पूरी कर ली थी।
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कमजोर प्रत्याशी के चलते देखनी पड़ी हार
अंतिम समय में कांग्रेस पार्टी की ओर से उम्मीदवार लता रानी चंदीला को बनाया गया। लता रानी के पति रिंकू चंदीला कांग्रेस के पूर्व नेता और फरीदाबाद लोकसभा के प्रभारी तो रहे थे लेकिन बड़े चुनाव नहीं लड़े थे। वह वर्तमान में पलवल जिले के लोकसभा प्रभारी थे। भाजपा ने हरियाणा बाल कल्याण आयोग की अध्यक्ष और 31 वर्ष से राजनीति में सक्रिय प्रवीण बत्रा जोशी को उम्मीदवार बनाया था। उनके पति संदीप जोशी पूर्व प्रदेश महामंत्री भाजपा रहे हैं। संदीप वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। वहीं, प्रवीण जोशी के ससुर रमेश जोशी दो बार भाजपा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।
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जनता का विश्वास भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण
भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण जनता का भाजपा पर विश्वास है। भाजपा ने निगम चुनाव को गंभीरता से लिया और हमारे एक-एक कार्यकर्ता ने पूरी मेहनत की। कांग्रेस पार्टी शुरू से ही चुनाव में कहीं नजर नहीं आ रही थी। भाजपा की यह निगम चुनावों की रिकॉर्ड जीत उसके कार्यकर्ताओं समेत हमारे नेता नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जेपी नड्डा, मनोहर लाल जैसे नेताओं की भी जीत है।
राजकुमार वोहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष
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हार के कारणों की समीक्षा करेंगे
फरीदाबाद में संगठन न होना चुनाव में हार का बड़ा कारण है। कांग्रेस की फरीदाबाद में इस स्थिति के कई कारण रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इसकी समीक्षा कर रही है। आकलन के बाद ही इसपर विस्तार से कुछ कहा जा सकता है।
आफताब अहमद, नूंह विधायक और फरीदाबाद जिला प्रभारी
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भाजपा ने मेयर समेत 39 सीटाें पर किया कब्जा, कांग्रेस के हाथ लगी केवल एक पार्षद सीट
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। मजबूत संगठन और शहरी मतदाताओं ने भाजपा के सिर पर फरीदाबाद नगर निगम की रिकॉर्ड मतों से जीत का ताज सजाया। दूसरी तरफ, कांग्रेस, आप और बसपा जैसे दलों का फरीदाबाद में संगठन न होना उनकी सबसे बड़ी हार का कारण बना। भाजपा ने जहां चुनाव के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। वहीं, फरीदाबाद शहर में भाजपा के बढ़ते वोट बैंक के चलते अनमने ढंग से अन्य राजनीतिक दलों का चुनाव लड़ना भी बड़ी हार का सबब बना।
पिछले 10 वर्षों से हरियाणा समेत फरीदाबाद में लोकसभा, विधानसभा में काबिज भारतीय जनता पार्टी का मनोबल नगर निगम चुनावों में चरम पर था। फरीदाबाद लोकसभा के बाद विधानसभा की जिले में 6 में से 5 सीटों पर जीत के चलते शुरू से ही भाजपा पूरी तैयारी से नगर निगम चुनावों में उतरी थी। नगर निगम चुनावों की घोषणा होने के बाद से ही भाजपा में पार्षद और मेयर प्रत्याशियों के लिए टिकट मांगने वाले दावेदारों की लाइन लग गई थी। वहीं, हरियाणा विधानसभा में भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाली कांग्रेस पार्टी में मेयर और पार्षद पदों के लिए बड़े नेताओं ने किनारा किया हुआ था। विधानसभा चुनावाें में हार का मुंह देखने वाले कांग्रेस नेता निगम चुनावों में स्वयं या अपने किसी परिवार के सदस्यों को उतारने में संकोच कर रहे थे।
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इसके अलावा शहर में भाजपा पहले से ही मजबूत थी। ऐसे में निगम चुनावों में अधिकतर शहरी मतदाताओं के चलते भाजपा ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की।
भाजपा के मजबूत संगठन के सामने बिखरा विपक्ष
भारतीय जनता पार्टी का संगठन बूथ स्तर तक फरीदाबाद में मजबूत है। फरीदाबाद में 10 हजार से अधिक भाजपा के कार्यकर्ता और सदस्य हैं। भाजपा से सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, प्रदेश के दो मंत्री विपुल गोयल (कैबिनेट मंत्री) और राजेश नागर (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार) समेत पूरा संगठन खड़ा था। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का जिले में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव तक नहीं है। वहीं, आम आदमी पार्टी और बसपा का भी जिले में संगठन न होना मतदाता का मोह भंग कर गया।
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भाजपा ने प्रचार में झोंक दी थी पूरी ताकत
भाजपा ने नगर निगम चुनावों को बेहद गंभीर तरीके से लिया था। चुनाव प्रचार करने के लिए पार्टी से स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दो बार फरीदाबाद आए। उन्होंने यहां पर ताबड़तोड़ जनसभा और रोड शो कर माहौल बना दिया। इसके अलावा पूर्वांचल मतदाताओं को रिझाने के लिए सांसद और गायक मनोज तिवारी समेत कई नामचीन नेता प्रचार में उतरे थे। वहीं, कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रचार करने के लिए एकमात्र चेहरा प्रदेश अध्यक्ष ही जिले में अधिक दिखलाई पड़े। प्रचार के एक दिन केवल सांसद दीपेंद्र हुड्डा आए थे। वहीं, आप पार्टी से केवल संजय सिंह ने पार्षद प्रत्याशी के लिए एक-दो छुटपुट जनसभा कर प्रचार की औपचारिकता पूरी कर ली थी।
कमजोर प्रत्याशी के चलते देखनी पड़ी हार
अंतिम समय में कांग्रेस पार्टी की ओर से उम्मीदवार लता रानी चंदीला को बनाया गया। लता रानी के पति रिंकू चंदीला कांग्रेस के पूर्व नेता और फरीदाबाद लोकसभा के प्रभारी तो रहे थे लेकिन बड़े चुनाव नहीं लड़े थे। वह वर्तमान में पलवल जिले के लोकसभा प्रभारी थे। भाजपा ने हरियाणा बाल कल्याण आयोग की अध्यक्ष और 31 वर्ष से राजनीति में सक्रिय प्रवीण बत्रा जोशी को उम्मीदवार बनाया था। उनके पति संदीप जोशी पूर्व प्रदेश महामंत्री भाजपा रहे हैं। संदीप वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। वहीं, प्रवीण जोशी के ससुर रमेश जोशी दो बार भाजपा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।
जनता का विश्वास भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण
भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण जनता का भाजपा पर विश्वास है। भाजपा ने निगम चुनाव को गंभीरता से लिया और हमारे एक-एक कार्यकर्ता ने पूरी मेहनत की। कांग्रेस पार्टी शुरू से ही चुनाव में कहीं नजर नहीं आ रही थी। भाजपा की यह निगम चुनावों की रिकॉर्ड जीत उसके कार्यकर्ताओं समेत हमारे नेता नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जेपी नड्डा, मनोहर लाल जैसे नेताओं की भी जीत है।
राजकुमार वोहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष
हार के कारणों की समीक्षा करेंगे
फरीदाबाद में संगठन न होना चुनाव में हार का बड़ा कारण है। कांग्रेस की फरीदाबाद में इस स्थिति के कई कारण रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इसकी समीक्षा कर रही है। आकलन के बाद ही इसपर विस्तार से कुछ कहा जा सकता है।
आफताब अहमद, नूंह विधायक और फरीदाबाद जिला प्रभारी