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Faridabad News: चार महीने से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद, गर्भवती महिलाओं को हो रही परेशानी
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नियमित जांच के लिए दूर-दराज के निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव छांयसा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में चार महीने से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन बंद पड़ी है, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड सुविधा पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत शुरू की गई थी लेकिन रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सेवा ठप हो गई है। इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें नियमित जांच के लिए दूर-दराज के निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में जाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज ही उपचार करवाने के लिए आते हैं। अगर उन मरीजों को अल्ट्रासाउंड निजी सेंटरों पर करवाना पड़ेगा तो उनके ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। निजी केंद्रों पर जांच के लिए अधिक शुल्क देना पड़ता है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा कम लागत या निशुल्क उपलब्ध होती थी। निदेशक डॉ. देंवेंद्र अटल का कहना है कि उनकी ओर से जल्द से जल्द रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति करने के आदेश पीपीपी मोड के सेंटर को दे दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव छांयसा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में चार महीने से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन बंद पड़ी है, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड सुविधा पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत शुरू की गई थी लेकिन रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सेवा ठप हो गई है। इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें नियमित जांच के लिए दूर-दराज के निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में जाना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज ही उपचार करवाने के लिए आते हैं। अगर उन मरीजों को अल्ट्रासाउंड निजी सेंटरों पर करवाना पड़ेगा तो उनके ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। निजी केंद्रों पर जांच के लिए अधिक शुल्क देना पड़ता है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा कम लागत या निशुल्क उपलब्ध होती थी। निदेशक डॉ. देंवेंद्र अटल का कहना है कि उनकी ओर से जल्द से जल्द रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति करने के आदेश पीपीपी मोड के सेंटर को दे दिया है।
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