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Faridabad News: आरटीई के तहत दाखिले से इन्कार करने पर दो निजी स्कूलों पर जुर्माना

Thu, 03 Sep 2026 11:11 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 11:11 PM IST
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Two private schools fined for refusing admission under RTE.
दोनों स्कूलों को सात दिन में दाखिले के आदेश दिए, 50 हजार जुर्माना भी लगा
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। स्थाई लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज), फरीदाबाद ने आरटीई के तहत दो निजी स्कूलों को बच्चों को दाखिला देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने दोनों मामलों में संबंधित स्कूलों पर 50-50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति भी लगाने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि इन स्कूलों पर पहले भी आरटीई दाखिले से जुड़े मामलों में दो-दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति लग चुकी है।

दरअसल, लोक अदालत में शिव कुमार डिंकर बनाम ग्रैंड कोलंबस स्कूल मामले की सुनवाई हुई थी। यह मामला तीन वर्ष नौ माह के बच्चे शिव कुमार डिंकर की ओर से उसके पिता वीरेंद्र कुमार ने दायर किया था। बच्चा बीपीएल परिवार से संबंधित और अनुसूचित जाति वर्ग का है और फरीदाबाद जिले का स्थायी निवासी है। बच्चे ने हरियाणा सरकार की उज्ज्वल योजना के तहत आरटीई के प्रावधानों के अनुसार निजी स्कूल की नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए आवेदन किया था।
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आवेदन के बावजूद स्कूल की ओर से बच्चे को दाखिला नहीं दिया गया। स्कूल की ओर से बच्चे के घर से स्कूल की दूरी एक किलोमीटर से अधिक होने को आधार बनाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान लोक अदालत ने आरटीई के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना कानून का उद्देश्य है। केवल घर और स्कूल के बीच दूरी अधिक होने के तकनीकी आधार पर दाखिले से इंकार नहीं किया जा सकता।
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आदेश में कहा गया कि यदि किसी छोटे क्षेत्र में निर्धारित दूरी के भीतर स्कूल उपलब्ध नहीं है तो सरकार को परिवहन समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करनी होती है। इसलिए केवल दूरी के आधार पर बच्चे का दाखिला रोकना उचित नहीं है। स्थाई लोक अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए संबंधित स्कूल को सात दिन के भीतर बच्चे को दाखिला देने का आदेश दिया। साथ ही बच्चे को हुई परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च की भरपाई के लिए 50 हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए। अदालत ने आदेश बीते बुधवार को जारी कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों को तकनीकी आधार पर शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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