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ब्लैक फंगस के दो नए मामले, अब तक 18 की पुष्टि

Wed, 19 May 2021 10:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 10:31 PM IST
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Two new cases of black fungus, 18 confirmed so far
फरीदाबाद। कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आने पर अब ब्लैक फंगस के मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बीते 18 दिनों में जिले में 18 मामलों की पुष्टि हुई। इसमें से दो नए मामल बुधवार को आए। सभी पीड़ित निजी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। वहीं, सरकारी स्तर पर इलाज के लिए अल-फला मेडिकल कॉलेज व ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में एक वॉर्ड ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है। अभी तक किसी मरीज का यहां पर इलाज नहीं हुआ है। वहीं, जिले के सरकारी अस्पताल में इलाज से पूर्व परामर्श तक के लिए आंख-नाक-गला रोग विशेषज्ञ (ईएनटी) भी मौजूद नहीं है।
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ब्लैक फंगस के उपचार के लिए जरूरी माना जा रहा इम्फोटेरेसिन-बी नामक इंजेक्शन राज्य स्तरीय कमेटी की अनुशंसा पर ही मरीज के उपचार के लिए मिलेगा। इसकी दवा की खुदरा बाजार में आपूर्ति पर रोक लगा दी गई है। जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतु सिंह ने बताया कि राज्य स्तर पर बीमारी को अधिसूचित कर दिया गया है। ऐसे में निजी स्तर पर उपचार करने वाले अस्पताल भी मामलों की जानकारी जिला स्तर पर देंगे। वहीं, दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय कमेटी किसी भी मामले की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के बाद ही मरीज के उपचार के लिए जरूरी इंजेक्शन की आपूर्ति करेगी। इसके लिए एक औपचारिक ई-मेल पर आवेदन करना होगा। सभी अस्पताल प्रबंधकों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
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घर पर भी डॉक्टर की सलाह से करें इलाज : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप सिंह पुनिया ने बताया कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार जिले के ज्यादातर मामलों में कोरोना संक्रमण के दौरान स्टेरॉयड की ओवरडोज ली गई। इसमें से अधिकतर मामले मधुमेह के भी रोगी हैं। ऐसे में लोगों से अपील है कि संक्रमण का घर पर इलाज भी डॉक्टरी सलाह पर करें। इस दौरान मधुमेह स्तर को नियंत्रित रखें। यह बेहद जरूरी है। जिन लोगों में मधुमेह की समस्या नहीं है, उनके लिए भी यह बेहद जरूरी सलाह है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है, तीसरे स्तर की स्वास्थ्य सेवा दाता ही इसका इलाज दे सकते हैं। ऐसे में जिले के मेडिकल कॉलेज या बड़े निजी अस्पताल ही इसका इलाज कर सकते हैं। लोग जागरूकता के साथ जानलेवा बीमारी की चपेट में आने से खुद को बचा सकते हैं।
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