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Faridabad News: समय के साथ बदली परंपरा, अब पति भी रख रहे व्रत
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पांच दशक में बदला करवाचौथ मनाने का अंदाज, पहले महिलाएं ही दिनभर निर्जला व्रत रखतीं और रात को चांद देखकर व्रत खोलती थीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। समय के साथ रिश्तों को निभाने का अंदाज भी बदल गया है। करीब 50 साल पहले करवाचौथ का त्योहार जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों और पति की लंबी उम्र की कामना तक सीमित था, वहीं आज यह पति-पत्नी के आपसी प्रेम, विश्वास और बराबरी का प्रतीक बनता जा रहा है।
पहले महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती थीं और रात को चांद देखकर व्रत खोलती थीं। अब कई परिवारों में पति भी पत्नी की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखते हैं। बुजुर्ग महिलाओं के अनुसार, पहले करवाचौथ की तैयारियां घरों तक सीमित रहती थीं। महिलाएं मिलकर पूजा करती थीं, कथा सुनती थीं और चांद निकलने का इंतजार करती थीं। पति आमतौर पर व्रत नहीं रखते थे और न ही उपहार देने का चलन इतना आम था। त्योहार का मुख्य उद्देश्य पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करना होता था।
पहले जिम्मेदारी महिलाओं की, अब साथ निभाते हैं पति
करीब पांच दशक पहले शादी के शुरुआती वर्षों में करवाचौथ पर महिलाएं घर के कामकाज के साथ व्रत की तैयारियां भी खुद करती थीं। अब कई घरों में पति भी घरेलू कामों में हाथ बंटाते हैं। पत्नी के लिए उपहार लाना, साथ में पूजा करना और व्रत खुलवाना इस दिन को खास बना देता है। कई दंपती चांद देखने के बाद साथ बैठकर भोजन करते हैं। इससे त्योहार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति प्यार जताने का अवसर भी बन गया है।
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जब हमारी शादी हुई थी, तब करवाचौथ पर महिलाएं ही व्रत रखती थीं। आज पति अपनी पत्नी के लिए व्रत रखते है। यह बदलाव देखकर अच्छा लगता है।
- अतरकली, सेक्टर- 76
पहले हम दिनभर घर के काम करते हुए व्रत रखते थे और रात को चांद निकलने का इंतजार करते थे। अब पति-पत्नी मिलकर करवाचौथ का त्योहार मनाते हैं।
- मिथलेश, खेड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। समय के साथ रिश्तों को निभाने का अंदाज भी बदल गया है। करीब 50 साल पहले करवाचौथ का त्योहार जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों और पति की लंबी उम्र की कामना तक सीमित था, वहीं आज यह पति-पत्नी के आपसी प्रेम, विश्वास और बराबरी का प्रतीक बनता जा रहा है।
पहले महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती थीं और रात को चांद देखकर व्रत खोलती थीं। अब कई परिवारों में पति भी पत्नी की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखते हैं। बुजुर्ग महिलाओं के अनुसार, पहले करवाचौथ की तैयारियां घरों तक सीमित रहती थीं। महिलाएं मिलकर पूजा करती थीं, कथा सुनती थीं और चांद निकलने का इंतजार करती थीं। पति आमतौर पर व्रत नहीं रखते थे और न ही उपहार देने का चलन इतना आम था। त्योहार का मुख्य उद्देश्य पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करना होता था।
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पहले जिम्मेदारी महिलाओं की, अब साथ निभाते हैं पति
करीब पांच दशक पहले शादी के शुरुआती वर्षों में करवाचौथ पर महिलाएं घर के कामकाज के साथ व्रत की तैयारियां भी खुद करती थीं। अब कई घरों में पति भी घरेलू कामों में हाथ बंटाते हैं। पत्नी के लिए उपहार लाना, साथ में पूजा करना और व्रत खुलवाना इस दिन को खास बना देता है। कई दंपती चांद देखने के बाद साथ बैठकर भोजन करते हैं। इससे त्योहार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति प्यार जताने का अवसर भी बन गया है।
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जब हमारी शादी हुई थी, तब करवाचौथ पर महिलाएं ही व्रत रखती थीं। आज पति अपनी पत्नी के लिए व्रत रखते है। यह बदलाव देखकर अच्छा लगता है।
- अतरकली, सेक्टर- 76
पहले हम दिनभर घर के काम करते हुए व्रत रखते थे और रात को चांद निकलने का इंतजार करते थे। अब पति-पत्नी मिलकर करवाचौथ का त्योहार मनाते हैं।
- मिथलेश, खेड़ी