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Faridabad News: सूरजकुंड मेले में पर्यटकों को दिखेगी पूर्वोत्तर की संस्कृति
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परिसर को संवारने का चल रहा काम, 31 जनवरी से शुरू होगा मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 39वें सूरजकुंड मेले में पर्यटकों को सभी राज्यों की संस्कृति व परंपरा से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसको लेकर परिसर में लिपाई-पुताई का कार्य जोरों पर चल रहा है। सभी कर्मचारी तेजी से परिसर को सजाने का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही मेघालय थीम स्टेट होने के चलते पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति को भी पास से जानने का अवसर मिलेगा। इसमें अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और असम राज्य शामिल हैं।
मेले में महिला कर्मचारी गोबर व मिट्टी से हट्स को लीप रही हैं। मेले को भव्य रूप से सजाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा टूट-फूट वाली जगहों पर मरम्मत कार्य कर उसे संवारा जा रहा है। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों से आने वाले लोक कलाकार अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों, नृत्य और संगीत के माध्यम से पर्यटकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य और संगीत की प्रस्तुति देंगे।
मेले में बीन, ढोल, नगाड़ों और अन्य लोक वाद्य यंत्रों की थाप पर्यटकों को आकर्षित करेगी। वर्षों से सूरजकुंड मेले में आ रहे कलाकार अपनी अनोखी धुनों से लोगों को मंत्रमुग्ध करते आ रहे हैं। जैसे ही बीन और ढोल की गूंज उठती है, वैसे ही पर्यटक खुद को नृत्य करने से रोक नहीं पाते। गौरतलब है कि 31 जनवरी से शुरू होने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों पर्यटक मेले में पहुंचने वाले हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 39वें सूरजकुंड मेले में पर्यटकों को सभी राज्यों की संस्कृति व परंपरा से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसको लेकर परिसर में लिपाई-पुताई का कार्य जोरों पर चल रहा है। सभी कर्मचारी तेजी से परिसर को सजाने का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही मेघालय थीम स्टेट होने के चलते पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति को भी पास से जानने का अवसर मिलेगा। इसमें अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और असम राज्य शामिल हैं।
मेले में महिला कर्मचारी गोबर व मिट्टी से हट्स को लीप रही हैं। मेले को भव्य रूप से सजाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा टूट-फूट वाली जगहों पर मरम्मत कार्य कर उसे संवारा जा रहा है। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों से आने वाले लोक कलाकार अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों, नृत्य और संगीत के माध्यम से पर्यटकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य और संगीत की प्रस्तुति देंगे।
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मेले में बीन, ढोल, नगाड़ों और अन्य लोक वाद्य यंत्रों की थाप पर्यटकों को आकर्षित करेगी। वर्षों से सूरजकुंड मेले में आ रहे कलाकार अपनी अनोखी धुनों से लोगों को मंत्रमुग्ध करते आ रहे हैं। जैसे ही बीन और ढोल की गूंज उठती है, वैसे ही पर्यटक खुद को नृत्य करने से रोक नहीं पाते। गौरतलब है कि 31 जनवरी से शुरू होने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों पर्यटक मेले में पहुंचने वाले हैं।
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