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फेफड़े हो रहे छलनी: देश के टॉप पांच शहर प्रदूषण के मामले में शिखर पर, फिर भी चुनाव में नहीं बनता मुद्दा

Wed, 20 Mar 2024 03:58 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 20 Mar 2024 03:58 PM IST
सार

बेहद खराब क्वालिटी वाली हवा में सांस लेने से हार्ट अटैक की वजह से मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा फेफड़ों के साथ-साथ दिल के लिए जानलेवा साबित होती है। 

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Top five cities of india are top peak in terms of pollution yet it does not become an issue in elections
लोगों के फेफड़ों को छलनी कर रहा प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा की औद्योगिक नगरी फरीदाबाद प्रदूषण का पयार्य बन गया है। धूल, धुआं की वजह से लोगों के फेफड़े छलनी हो रहे हैं। अस्पतालों में ह्दय, अस्थमा और कैंसर के मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। देश के टॉप पांच शहरों की सूची में अक्सर शिखर पर रहने के बावजूद प्रदूषण लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा नहीं बनता है। नेता महंगाई, रोजगार सहित अन्य मुद्दों पर तो बात करते हैं। प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए कोई बात नहीं करता है, जिससे शहरवासी बेहद परेशान है। मंगलवार को फरीदाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 193 दर्ज किया गया। वहीं (पर्टिकुलेट मैटर) पीएम 2.5 का स्तर 394 और पीएम का स्तर 400 से अधिक पहुंच गया। जिसे डॉक्टरों ने लोगों के लिए बेहद खतरनाक करार दिया है।

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औद्योगिक नगरी में छोटे-बड़े करीब 28 हजार उद्योग हैं, लेकिन चुनिंदा के पास ही पीएनजी कनेक्शन हैं। बड़ी संख्या में उद्योग कोयले व अन्य ईंधन पर निर्भर हैं। दूसरी तरफ ग्रेटर फरीदाबाद में 150 से अधिक सोसाइटियां हैं। इनमें लाखों लोग रहते हैं। यहां बिजली की भारी समस्या रहती है। लोगों को रोजाना आठ से 10 घंटे बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बिल्डरों द्वारा सोसाइटियों में लगे डीजी सेट से ही बिजली सप्लाई की जाती है। जिससे लिफ्ट आदि चलती हैं। वहीं सूरुरपुर, डीएलएफ, गाजीपुर, सहित कई ऐसे औद्याेगिक क्षेत्र हैं जहां पीएनजी लाइनें पहुंची नहीं हैं। सर्दियों में क्यूसीएम की तरफ से फरीदाबाद सहित दिल्ली एनसीआर में डीजी सेट पर प्रतिबंधित कर दिया गया था। दिसंबर के बाद ग्रैप के नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों को बंद करने के आदेश दिए गए थे। इस प्रकार के आदेश तो हर साल दिए जाते हैं, लेकिन, सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं।

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दो साल पहले स्मॉग टावर बनाने की बनी थी योजना
लोगों को प्रदूषित हवा से निजात दिलाने के लिए दो वर्ष पहले फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से एनआईटी में स्मॉग टावर बनाने की योजना तैयार की थी। लेकिन, वह भी फाइलों में दब कर रह गई। साल में 80 प्रतिशत दिनों में हवा प्रदूषित रहती है। वहीं चार माह तक हवा खतरनाक और बेहद गंभीर श्रेणी में रही। खासकर सर्दियों में फरीदाबाद प्रदूषण के मामले में टॉप पर पहले जाता है। इसके बावजूद इसे आम चुनाव में मुद्दा नहीं बनाया जाता है।

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दावों का धरातल पर नहीं दिखा असर
नगर निगम की ओर से शहर के सभी 44 वार्डों के लिए 44 टीमें गठित की गई है। पांच छोटे एंटी स्मॉग गन लगाई गई। दो बड़ी एंटी स्मॉग गन की गाड़ियां भी उपलब्ध है लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। रोड स्वीपिंग मशीन से किसी भी रोड की सफाई नहीं हो रही। शहर की सभी सड़कों पर धूल की भरमार है। टूटी सड़कों पर पैच वर्क तक नहीं हो रहा है। जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है।

फरीदाबाद में 194 पहुंचा एक्यूआई
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी सूची के अनुसार मंगलवार को फरीदाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 194 दर्ज किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो एनआईटी क्षेत्र की हवा सबसे ज्यादा खराब रही। यहां का एक्यूआई 271, सेक्टर-30 का 144, सेक्टर- 11 क्षेत्र का एक्यूआई 200 और सेक्टर-16ए का एक्यूआई 161 दर्ज किया गया। वहीं बल्लभगढ़ का एक्यूआई 254 रहा।

खराब हवा में सांस लेने से हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा
बेहद खराब क्वालिटी वाली हवा में सांस लेने से हार्ट अटैक की वजह से मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा फेफड़ों के साथ-साथ दिल के लिए जानलेवा साबित होती है। ओपीडी में हार्ट अटैक के रोजाना दो से तीन मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं ओपीडी की बात करें तो रोजाना 250 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यही स्थित जिले के 12 बड़े निजी अस्पतालों की बनी हुई हैं। - डॉ. शेखर कुणाल, हृदय रोग विशेषज्ञ, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

पीएम 10 में हवा के बारीक कण श्वास नली से फेफड़ों में प्रवेश करते हैं और फिर खून में मिल जाते हैं। ये बेहद खतरनाक कण होते हैं। इनमें ऑक्सीडाइजिन प्रॉपर्टीज होती हैं। ये न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि हृदय और ब्रेन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फेफड़ों में जाने से व्यक्ति को खांसी, बलगम आना, सांस फूलना की समस्या हो रही है। लंबे समय तक प्रदूषित भरे वातावरण में रहने से पार्टिकुलेट मैटर के कारण हृदय के अंदर की नसें कमजोर हो जाती हैं। हृदय की आर्टरीज ब्लॉक हो जाए तो ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। - डॉ. रोहित मुखर्जी, श्वास रोग विशेषज्ञ, निजी अस्पताल

प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर कोई काम नहीं किया जाता है। बजट में प्रदूषण रोकथाम के लिए बड़ी-बड़ी बाते कही गई। इसके लिए बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। नगर निगम शहर से कूड़ा उठाकर अरावली में फेंक रहा है। जिससे भूजल भी प्रदूषित हो रहा है। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। - जितेंद्र भड़ाना, पर्यावरण प्रेमी

शहर में प्रदूषण रोकथाम के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम की ओर से सड़कों पर पानी का छिड़काव और मशीनों से सफाई कराई जा रही है। यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी की जाती है। - संदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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