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फरीदाबाद में प्रतिदिन उठ रहा तीन टन बायो मेडिकल वेस्ट
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अमित भाटिया
फरीदाबाद। जिले में प्रतिदिन करीब तीन टन बायो मेडिकल वेस्ट निकल रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान इस साल अप्रैल से लेकर जुलाई माह तक नगर निगम करीब 36 टन बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करवा चुका है। इनमें पीपीई किट, मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर की बोतलें आदि शामिल हैं। इसके निस्तारण के लिए नगर निगम ने एक निजी कंपनी गोल्डन ईगल वेस्ट मैनेजमेंट के साथ करार किया है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह बायो मेडिकल वेस्ट बिखरा हुआ दिख जाता है। यहां तक की शहर के सबसे बड़े बीके सिविल अस्पताल में भी बायो मेडिकल वेस्ट यहां-वहां बिखरा हुआ दिख जाता है।
कोरोना संक्रमण के कारण एक तरफ देश में लॉकडाउन के चलते लोग घर बैठने को मजबूर हो गए, वहीं नगर निगम और सफाई कर्मचारियों का काम बढ़ गया है। कोरोना संक्रमितों को होम क्वारंटीन व आइसोलेशन में रखने के दौरान घरों से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट एक बड़ी समस्या था। सफाई कर्मचारी उन्हें उठाकर आम कचरे की तरह निस्तारित नहीं कर सकते। ऐसे में उन्हें मेडिकल कचरे की तरह निस्तारित किया जाना था। होम क्वारंटीन लोगों के घरों से निकलने वाले कचरे व अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए नगर निगम ने गोल्डन ईगल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के साथ करार किया।
नगर निगम के एसडीओ स्वच्छ भारत मिशन सुरेंद्र खट्टर ने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक नगर निगम ने जिले में करीब 36 टन बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करवाया है। इनमें पीपीई किट, मास्क, दस्ताने, सैनिटाजर की बोतलें, फेस शील्ड आदि शामिल हैं। ये कचरा कोविड-19 संक्रमण के कारण हुई लोगों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार के बाद या फिर घरों में क्वारंटीन लोगों के इस्तेमाल के बाद निकल रहा है। इसे निगम के कर्मचारी विशेष तरह की पीली पॉलिथीन में भरकर उन्हें निस्तारण के लिए गांव जसाना स्थित गोल्डन ईगल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के निस्तारण केंद्र पर पहुंचाते हैं, जहां इनको मेडिकल के नियमों के अनुसार निस्तारित किया जाता है।
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इस्तेमाल के बाद यू ही फेंक देते हैं लोग
बेशक नगर निगम दावा कर रहा हो कि उसने पिछले चार माह में 36 टन बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करवाया है, मगर शहर की सड़कों पर बायो मेडिकल वेस्ट को फैले हुए देखा जा सकता है। इनमें विशेष रूप से मास्क व ग्लव्स शामिल हैं, जो लोग इस्तेमाल के बाद यू ही यहां वहां फेंक देते हैं। ऐसे में यह वेस्ट नियमित रूप से सड़कों पर होने वाली सफाई के बाद निकले कचरे के साथ आम कचरा निस्तारण केंद्रों पर पहुंच जाता है। इससे सफाई कर्मचारियों के अलावा वहां काम करने वाले लोगों में भी संक्रमण का खतरा रहता है।
कचरे में बीन रहे बायो मेडिकल वेस्ट
शहर में बने कूड़े के खत्तों में भी बायो मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। पिछले दिनों पार्षद संदीप भारद्वाज ने एक वीडियो शेयर की थी, जिसमें चार नंबर हनुमान मंदिर के पास कूड़े के ढेर में सैकड़ों मास्क फेंक हुए थे। आशंका जताई गई थी कि आसपास के किसी अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें वहां फेंका है। इसके अलावा सैनिटाइजर की बोतलें भी फेंकी जा रही हैं। प्लास्टिक होने के कारण कचरा बीनने वाले अब कूड़े के ढेर में इसकी भी तलाश करते रहते है, जिससे संक्रमण के फैलने का खतरा रहता है।
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फरीदाबाद। जिले में प्रतिदिन करीब तीन टन बायो मेडिकल वेस्ट निकल रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान इस साल अप्रैल से लेकर जुलाई माह तक नगर निगम करीब 36 टन बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करवा चुका है। इनमें पीपीई किट, मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर की बोतलें आदि शामिल हैं। इसके निस्तारण के लिए नगर निगम ने एक निजी कंपनी गोल्डन ईगल वेस्ट मैनेजमेंट के साथ करार किया है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह बायो मेडिकल वेस्ट बिखरा हुआ दिख जाता है। यहां तक की शहर के सबसे बड़े बीके सिविल अस्पताल में भी बायो मेडिकल वेस्ट यहां-वहां बिखरा हुआ दिख जाता है।
कोरोना संक्रमण के कारण एक तरफ देश में लॉकडाउन के चलते लोग घर बैठने को मजबूर हो गए, वहीं नगर निगम और सफाई कर्मचारियों का काम बढ़ गया है। कोरोना संक्रमितों को होम क्वारंटीन व आइसोलेशन में रखने के दौरान घरों से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट एक बड़ी समस्या था। सफाई कर्मचारी उन्हें उठाकर आम कचरे की तरह निस्तारित नहीं कर सकते। ऐसे में उन्हें मेडिकल कचरे की तरह निस्तारित किया जाना था। होम क्वारंटीन लोगों के घरों से निकलने वाले कचरे व अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए नगर निगम ने गोल्डन ईगल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के साथ करार किया।
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नगर निगम के एसडीओ स्वच्छ भारत मिशन सुरेंद्र खट्टर ने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक नगर निगम ने जिले में करीब 36 टन बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करवाया है। इनमें पीपीई किट, मास्क, दस्ताने, सैनिटाजर की बोतलें, फेस शील्ड आदि शामिल हैं। ये कचरा कोविड-19 संक्रमण के कारण हुई लोगों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार के बाद या फिर घरों में क्वारंटीन लोगों के इस्तेमाल के बाद निकल रहा है। इसे निगम के कर्मचारी विशेष तरह की पीली पॉलिथीन में भरकर उन्हें निस्तारण के लिए गांव जसाना स्थित गोल्डन ईगल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के निस्तारण केंद्र पर पहुंचाते हैं, जहां इनको मेडिकल के नियमों के अनुसार निस्तारित किया जाता है।
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इस्तेमाल के बाद यू ही फेंक देते हैं लोग
बेशक नगर निगम दावा कर रहा हो कि उसने पिछले चार माह में 36 टन बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करवाया है, मगर शहर की सड़कों पर बायो मेडिकल वेस्ट को फैले हुए देखा जा सकता है। इनमें विशेष रूप से मास्क व ग्लव्स शामिल हैं, जो लोग इस्तेमाल के बाद यू ही यहां वहां फेंक देते हैं। ऐसे में यह वेस्ट नियमित रूप से सड़कों पर होने वाली सफाई के बाद निकले कचरे के साथ आम कचरा निस्तारण केंद्रों पर पहुंच जाता है। इससे सफाई कर्मचारियों के अलावा वहां काम करने वाले लोगों में भी संक्रमण का खतरा रहता है।
कचरे में बीन रहे बायो मेडिकल वेस्ट
शहर में बने कूड़े के खत्तों में भी बायो मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। पिछले दिनों पार्षद संदीप भारद्वाज ने एक वीडियो शेयर की थी, जिसमें चार नंबर हनुमान मंदिर के पास कूड़े के ढेर में सैकड़ों मास्क फेंक हुए थे। आशंका जताई गई थी कि आसपास के किसी अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें वहां फेंका है। इसके अलावा सैनिटाइजर की बोतलें भी फेंकी जा रही हैं। प्लास्टिक होने के कारण कचरा बीनने वाले अब कूड़े के ढेर में इसकी भी तलाश करते रहते है, जिससे संक्रमण के फैलने का खतरा रहता है।