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धनतेरस पर बुझ गए तीन घर के चिराग: शवों के सामने हाथ जोड़ रोता रहा पिता, कहा- 20 मिनट की थी बात; नहीं मिली मदद

Fri, 10 Nov 2023 08:20 PM IST
Vikas Kumar हेमलता रावत, अमर उजाला, बल्लभगढ़।
हेमलता रावत, अमर उजाला, बल्लभगढ़। Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 10 Nov 2023 08:20 PM IST
सार

हादसे में मौत का शिकार बने रामू, आकाश वर्ष और अर्चित के परिजन का आरोप है कि वह जब पहुंचे तो तीनों युवक एक के ऊपर एक लदे हुए थे। 

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three boy died at Delhi Mumbai Expressway police kept dead bodies one above other
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर हादसे में तीन लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धनतेरस की सुबह हरियाणा के बल्लभगढ़ स्थित एक ही इलाके में रहने वाले तीन परिवारों में मातम पसर गया। परिजन का आरोप है कि सेक्टर-8 दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवकों को पुलिस ने एक के ऊपर एक डाल रखा था। परिजन का कहना है कि इस दौरान आकाश और अर्चित की सांसें चल रही थीं। आकाश के पिता ने बताया कि हादसे के बाद आकाश ने मोबाइल पर 20 मिनट तक बात की थी, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची।

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हादसे में मौत का शिकार बने रामू, आकाश वर्ष और अर्चित के परिजन का आरोप है कि वह जब पहुंचे तो तीनों युवक एक के ऊपर एक लदे हुए थे। परिजन के पहुंचने के बाद तीनों युवकों को एंबुलेंस में उपचार के लिए ले जाया गया। इस दौरान भी आकाश और अर्चित की सांसें चल रही थीं। अस्पताल पहुंचने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे के बाद तीनों लगभग आधे घंटे तक मौके पर पड़े रहे। हैरत की बात है कि जब परिजन पहुंचे तो तीनों युवक एक-दूसरे के ऊपर पड़े हुए थे। परिजन का आरोप है कि अगर समय पर युवकों को पुलिस उपचार के लिए अस्पताल में ले जाती तो आकाश व अर्चित की जान बच सकती थी।

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उपचार मिलने पर बच सकती थी आकाश की जान
जुग्गी लाल ने बताया कि उनके बेटे आकाश ने कॉल कर बताया कि हादसे में वह घायल हो गया है। जल्दी से आ जाओ। सूचना मिलने के बाद वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ भागते हुए मौके पर पहुंचे। इस दौरान उनका बेटा आकाश जिंदा था। पुलिस ने जब उसको एंबुलेंस में डाला था तो वह जिंदा था। पुलिस परिजनों के आने का इंतजार कर रहे थे। जुग्गी लाल का कहना है कि अगर पुलिस आकाश को मात्र 10 मिनट की दूरी पर स्थित निजी अस्पताल में अगर भर्ती करवा देते तो वह बच जाता। पुलिस जब तक आकाश को बीके अस्पताल लेकर गए तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। आकाश तीन बहनों का इकलौता भाई था।

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पार्ट टाइम करता था जॉब
गांव सिही निवासी नौनिहाल ने बताया कि उनके मकान में रामू अपने परिवार के साथ एक साल से रह रहा था। वह सभी भाइयों में सबसे बड़ा होने के चलते वह छोटे छोटे काम करके पैसे कमाता था। इसके अलावा वह कोई नया काम भी सीख रहा था। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को भी वह सुबह 4 बजे गाड़ी को साफ करने के लिए अपने दोस्तों के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर ट्राला की चपेट में आने के बाद मृत्यु हो गई।

नहीं था कोई पार्किंग लाइट व रिफ्लेक्टर
अर्चित के पिता कमलेश कश्यप ने बताया कि एक्सप्रेस वे पर जो ट्राला खराब खड़ा हुआ था। उसके चालक ने किसी प्रकार का कोई इंडीकेटर व रिफ्लेक्टर नहीं लगाई हुई थी। जिसकी वजह से बाइक सवार युवकों को ट्राला सुबह अंधेरे में नजर नहीं आया। उक्त ट्राला चालक के द्वारा बस पीछे की ओर एक पेड़ टहनी को लगाया हुआ था जोकि अंधेरे में नजर भी नहीं आया। अगर इंडीकेटर व रिफ्लेक्टर और सड़क पर स्ट्रीट लाइट होती, तो यह हादसा नहीं होता और तीनों युवकों की जान बच जाती।

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