{"_id":"62aa189ce4e65c47223f64a1","slug":"there-will-be-no-water-logging-at-the-intersections-of-the-highway-faridabad-news-noi6543985119","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईवे के चौक-चौराहों पर नहीं होगा जलभराव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईवे के चौक-चौराहों पर नहीं होगा जलभराव
विज्ञापन
फरीदाबाद। बरसात में जलभराव की समस्या से जूझ रहे हाईवे के चौक-चौराहों पर इस बार पानी नहीं भरेगा। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से चौराहों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (जल संचय प्रणाली) लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। अजरौंदा चौक पर तीन जगह हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इन्हें बनाने में कन्वेंशनल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक बार में करीब 2.5 लाख लीटर पानी स्टोरेज कर सकेंगे। इससे लोगों वाहन चालकों को काफी राहत मिलेगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारिश के दौरान जलभराव की भारी समस्या है। कुछ देर की बारिश में चौक-चौराहे पानी में डूब जाते है। हाईवे पर सबसे ज्यादा खराब हालत, सेक्टर-28, ओल्ड फरीदाबाद, अजरौंदा चौक, बाटा चौक, बल्लभगढ़ बस अड्डा, जेसीबी चौक की बनी है। थोड़ी सी बारिश में जलभराव से लोगों को यहां से निकलना भारी पड़ जाता है। चौराहों पर पानी भरा होने के कारण गाड़ियां बीच में खराब हो जाती है। इससे यातायात व्यवस्था ठप हो जाती है। ऐसे में मजबूरीवश पुलिस कर्मियों को पानी में उतर कर व्यवस्था संभालनी पड़ती है।
10 जगह बनेंगे हार्वेस्टिंग सिस्टम
एनएचएआई की ओर से हाईवे पर जलभराव वाली 10 जगहों को चिन्हित किया गया है। यहां सबसे ज्यादा पानी भरता है। प्रथम चरण में बाटा चौक पर एक तरफ के निर्माणाधीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण पूरा कर लिया गया है, अन्य काम जल्द शुरू किया जाएगा। अजरौंदा चौक दिल्ली की ओर जाने वाली साइड दो हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम तेजी से जारी है।
विज्ञापन
कन्वेंशनल तकनीक का किया जा रहा इस्तेमाल
नीलम चौक पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण कर रहे ठेकेदार सतेंद्र गुर्जर ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण में तीन तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। कन्वेंशनल तकनीक, माइक्रो फिल्टर, बॉक्स तकनीक। अजरौंदा चौक पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में कन्वेंशनल टैंक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इस तकनीक में बोल्डर, ग्रेवाल, चारकोल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इन चार पांच परतों पर पानी छन कर जब जमीन में जाता है तो वह पीने लायक बन जाता है। इसके साथ ही जमीन में पानी की कमी पूरी होती है।
हाईवे के चौक-चौराहों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण शुरू करवा दिया गया है। इस बार लोगों को बरसात में जलभराव से नहीं जूझना होगा।
- धीरज कुमार, डीजीएम, एनएचएआई
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारिश के दौरान जलभराव की भारी समस्या है। कुछ देर की बारिश में चौक-चौराहे पानी में डूब जाते है। हाईवे पर सबसे ज्यादा खराब हालत, सेक्टर-28, ओल्ड फरीदाबाद, अजरौंदा चौक, बाटा चौक, बल्लभगढ़ बस अड्डा, जेसीबी चौक की बनी है। थोड़ी सी बारिश में जलभराव से लोगों को यहां से निकलना भारी पड़ जाता है। चौराहों पर पानी भरा होने के कारण गाड़ियां बीच में खराब हो जाती है। इससे यातायात व्यवस्था ठप हो जाती है। ऐसे में मजबूरीवश पुलिस कर्मियों को पानी में उतर कर व्यवस्था संभालनी पड़ती है।
विज्ञापन
10 जगह बनेंगे हार्वेस्टिंग सिस्टम
एनएचएआई की ओर से हाईवे पर जलभराव वाली 10 जगहों को चिन्हित किया गया है। यहां सबसे ज्यादा पानी भरता है। प्रथम चरण में बाटा चौक पर एक तरफ के निर्माणाधीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण पूरा कर लिया गया है, अन्य काम जल्द शुरू किया जाएगा। अजरौंदा चौक दिल्ली की ओर जाने वाली साइड दो हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम तेजी से जारी है।
विज्ञापन
कन्वेंशनल तकनीक का किया जा रहा इस्तेमाल
नीलम चौक पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण कर रहे ठेकेदार सतेंद्र गुर्जर ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण में तीन तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। कन्वेंशनल तकनीक, माइक्रो फिल्टर, बॉक्स तकनीक। अजरौंदा चौक पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में कन्वेंशनल टैंक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इस तकनीक में बोल्डर, ग्रेवाल, चारकोल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इन चार पांच परतों पर पानी छन कर जब जमीन में जाता है तो वह पीने लायक बन जाता है। इसके साथ ही जमीन में पानी की कमी पूरी होती है।
हाईवे के चौक-चौराहों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण शुरू करवा दिया गया है। इस बार लोगों को बरसात में जलभराव से नहीं जूझना होगा।
- धीरज कुमार, डीजीएम, एनएचएआई