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Faridabad News: बच्चों की पढ़ाई छूटने की चिंता थी, अब किराना दुकान से बदली केशवती के परिवार की जिंदगी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। कभी घर का चूल्हा जलाना और बच्चों की स्कूल फीस भरना भी केशवती के लिए बड़ी चुनौती था। सीमित आय के कारण कई बार उन्हें यह चिंता सताती थी कि कहीं आर्थिक तंगी की वजह से बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूट जाए। लेकिन हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की एनएसएफडीसी योजना ने उनके परिवार की जिंदगी को नई दिशा दे दी।
चार सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी निभा रहीं गांव सेढोला की रहने वाली केशवती बताती हैं कि पहले घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल था। परिवार की आमदनी इतनी नहीं थी कि रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी आसानी से उठाया जा सके। इसी दौरान उन्हें हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के जिला कार्यालय से एनएसएफडीसी योजना की जानकारी मिली। नवंबर 2025 में उन्होंने किराना दुकान खोलने के लिए आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें एक लाख रुपये का ऋण और 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस सहायता से उन्होंने अपने गांव में छोटी-सी किराना दुकान शुरू की। धीरे-धीरे दुकान चल निकली और आज यही दुकान पूरे परिवार का सहारा बन गई है।
केशवती कहती हैं कि अब उन्हें बच्चों की फीस जमा करने या घर का राशन जुटाने के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता। दुकान की आय से परिवार का खर्च सम्मानपूर्वक चल रहा है और बच्चों की पढ़ाई भी बिना रुकावट जारी है। उनके चेहरे पर अब भविष्य को लेकर चिंता नहीं, बल्कि उम्मीद दिखाई देती है।
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फरीदाबाद। कभी घर का चूल्हा जलाना और बच्चों की स्कूल फीस भरना भी केशवती के लिए बड़ी चुनौती था। सीमित आय के कारण कई बार उन्हें यह चिंता सताती थी कि कहीं आर्थिक तंगी की वजह से बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूट जाए। लेकिन हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की एनएसएफडीसी योजना ने उनके परिवार की जिंदगी को नई दिशा दे दी।
चार सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी निभा रहीं गांव सेढोला की रहने वाली केशवती बताती हैं कि पहले घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल था। परिवार की आमदनी इतनी नहीं थी कि रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी आसानी से उठाया जा सके। इसी दौरान उन्हें हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के जिला कार्यालय से एनएसएफडीसी योजना की जानकारी मिली। नवंबर 2025 में उन्होंने किराना दुकान खोलने के लिए आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें एक लाख रुपये का ऋण और 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस सहायता से उन्होंने अपने गांव में छोटी-सी किराना दुकान शुरू की। धीरे-धीरे दुकान चल निकली और आज यही दुकान पूरे परिवार का सहारा बन गई है।
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केशवती कहती हैं कि अब उन्हें बच्चों की फीस जमा करने या घर का राशन जुटाने के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता। दुकान की आय से परिवार का खर्च सम्मानपूर्वक चल रहा है और बच्चों की पढ़ाई भी बिना रुकावट जारी है। उनके चेहरे पर अब भविष्य को लेकर चिंता नहीं, बल्कि उम्मीद दिखाई देती है।
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