मां बनने वाली हर महिला दे ध्यान: स्तनपान न कराने से कैंसर होने का खतरा, छह माह तक शिशु को जरूर दें ये 'अमृत'
निजी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या कुमार ने बताया कि छह माह तक मां का दूध शिशु के लिए अमृत समान होता है। स्तनपान कराने से मां और शिशु दोनों को ही कई लाभ मिलते हैं।
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एक मां के लिए अपने शिशु को स्तनपान कराना बहुत ही सुंदर एहसास होता है। छह माह तक शिशु को केवल मां के दूध की जरूरत होती है। डॉक्टर की मानें तो स्तनपान न कराने से माताओं और शिशुओं दोनों को ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। स्तनपान न कराने से मां को स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
स्तनपान से कैंसर के अलावा मधुमेह और दिल से जुड़ी बीमारी होती है कम
निजी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या कुमार ने बताया कि छह माह तक मां का दूध शिशु के लिए अमृत समान होता है। स्तनपान कराने से मां और शिशु दोनों को ही कई लाभ मिलते हैं। स्तनपान कराने से गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में वापस लाने में मदद मिलती है। प्रसव के बाद तेजी से ठीक होने, स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर, टाइप 2 मधुमेह व हृदय रोग के खतरे को कम करने में मदद करता है। इसी के साथ शिशु को संक्रमणों से बचाता है, उचित विकास को बढ़ावा देता है और कई बीमारियों के खतरे को कम करता है।
मां का शिशु को स्तनपान कराना जरूरी
यदि मां शिशु को स्तनपान नहीं कराती है तो माताओं में स्तन कैंसर, डिम्बग्रंथि के कैंसर, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग होने का खतरा बना रहता है। मां के स्तन में दूध जम जाता है, जिससे संक्रमण फैलता है। इसलिए डॉक्टर मां को छह माह तक स्तनपान कराने की सलाह देते हैं। इस दौरान शिशु को पानी देने के लिए भी मनाही होती है।
मां के दूध का सेवन करने वाले बच्चे अन्य बच्चों से अधिक बुद्धिमान
डॉ. दिव्या कुमार ने बताया कि जो शिशु छह माह या उससे अधिक समय तक मां के दूध का सेवन करते हैं, वे मां के दूध का सेवन न करने वाले शिशु के मुकाबले अधिक बुद्धिमान होते हैं। इन शिशु का विकास अच्छा और जल्दी होता है। यह बच्चे संक्रमण से दूर रहते हैं। उन्होंने बताया कि जो माताएं जॉब करती हैं, वे सुबह और रात को शिशु को स्तनपान जरूर कराएं, ताकि मां और शिशु दोनों ही स्वस्थ रहें।