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Faridabad News: महिला की रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-16 स्थित एक निजी अस्पताल ने रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को छोटे शहरों तक पहुंचाने के लिए टेली-प्रॉक्टर रोबोटिक सर्जरी प्रोग्राम शुरू किया है। इस पहल के तहत स्थानीय सर्जनों को दूर बैठे विशेषज्ञों द्वारा रियल-टाइम मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिससे मरीजों को अपने शहर में ही उन्नत उपचार मिल सकेगा।
इस कार्यक्रम के तहत पलवल की 67 वर्षीय महिला की रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी पलवल में डॉ. इंदरजीत सिंह ने की, जबकि उन्हें जिले के मारेन्गो एशिया अस्पताल से डॉ. अनुराग अग्रवाल ने रियल-टाइम मार्गदर्शन किया।
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि टेली-प्रॉक्टरिंग तकनीकी प्रशिक्षण और वास्तविक सर्जिकल अनुभव के बीच की दूरी को कम करती है। इससे सर्जनों का आत्मविश्वास बढ़ता है और मरीजों को अधिक सटीक उपचार मिलता है। उन्होंने कहा कि प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग और इम्प्लांट पोजिशनिंग जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी दूर से विशेषज्ञ सहयोग संभव है।
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अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय ऑर्थोपेडिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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फरीदाबाद। सेक्टर-16 स्थित एक निजी अस्पताल ने रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को छोटे शहरों तक पहुंचाने के लिए टेली-प्रॉक्टर रोबोटिक सर्जरी प्रोग्राम शुरू किया है। इस पहल के तहत स्थानीय सर्जनों को दूर बैठे विशेषज्ञों द्वारा रियल-टाइम मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिससे मरीजों को अपने शहर में ही उन्नत उपचार मिल सकेगा।
इस कार्यक्रम के तहत पलवल की 67 वर्षीय महिला की रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी पलवल में डॉ. इंदरजीत सिंह ने की, जबकि उन्हें जिले के मारेन्गो एशिया अस्पताल से डॉ. अनुराग अग्रवाल ने रियल-टाइम मार्गदर्शन किया।
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डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि टेली-प्रॉक्टरिंग तकनीकी प्रशिक्षण और वास्तविक सर्जिकल अनुभव के बीच की दूरी को कम करती है। इससे सर्जनों का आत्मविश्वास बढ़ता है और मरीजों को अधिक सटीक उपचार मिलता है। उन्होंने कहा कि प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग और इम्प्लांट पोजिशनिंग जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी दूर से विशेषज्ञ सहयोग संभव है।
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अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय ऑर्थोपेडिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।