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Faridabad News: मेहनत के दम पर टूट जाती है अभावों की दीवार

Tue, 09 Jun 2026 11:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:03 PM IST
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The wall of poverty breaks down through hard work.
जिले की फुटबॉल खिलाड़ियों ने किया साबित, सपनों की ओर बढ़ रहीं कदम
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गौरव मिश्रा

फरीदाबाद। खेल के मैदान में जब जज्बा और मेहनत एक साथ मिल जाए, तो अभावों की दीवारें खुद-ब-खुद ढह जाती हैं। फरीदाबाद के एक छोटे से मैदान से निकलकर अपनी पहचान बनाने वाली चार युवा महिला फुटबॉल खिलाड़ियों वंशिका छिल्लर, सोनाली,राधिका और पलक ने इस बात को सच साबित कर दिया है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवारों से आने वाली इन बेटियों ने अपनी तंगहाली को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया है और लगातार अपने सपनों की ओर बढ़ रही हैं।

इनमें से तीन खिलाड़ी लगातार राज्य स्तर पर फरीदाबाद और हरियाणा का नाम रोशन कर रही हैं, जबकि एक प्रतिभावान खिलाड़ी ने नेशनल लेवल पर अपनी चमक बिखेरी है। हाल ही में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के नेशनल टूर्नामेंट में इस खिलाड़ी ने अपनी टीम के लिए शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा कई इंटर स्कूल और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में इनका दबदबा रहा है। बता दें कि यह सभी खिलाड़ी जिले के अलग-अलग राजकीय विद्यालयों में पढ़ती हैं।
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कोच इंद्रराज ने बताया कि इन बेटियों का यह सफर दिखाता है कि अगर सही मौका और थोड़ा सा सहयोग मिले, तो झुग्गी-झोपड़ियों और साधारण घरों से निकलने वाली यह प्रतिभाएं भी आसमान छू सकती हैं। प्रशासन और समाज को इन होनहार फुटबॉल खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
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खिलाड़ियों से बातचीत

भारत में खेलों को बहुत ज्यादा बढ़ावा नहीं दिया जाता है और लड़कियों के लिए तो और भी चुनौतियां होती हैं। उनको पार करके नेशनल में स्वर्ण जीतना एक सपने जैसा है। अभाव बहुत है, लेकिन मेरा लक्ष्य अब देश के लिए खेलना और माता-पिता का नाम रोशन करना है। - वंशिका छिल्लर, नेशनल खिलाड़ी

शुरुआत में जूते और डाइट के पैसे भी नहीं थे। स्टेट लेवल पर लगातार खेलने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मुश्किलें चाहे जितनी आएं, फुटबॉल खेलना कभी नहीं छोड़ूंगी।-सोनाली, स्टेट खिलाड़ी


हमारे पास सुविधाएं कम हैं, लेकिन मैदान पर उतरते ही हम सब भूल जाते हैं। स्टेट लेवल के बाद अब मेरा पूरा ध्यान नेशनल टीम में जगह बनाने पर है। उसके बाद निगाहें भारत की जर्सी पहनकर उतरने पर होंगी।-राधिका, स्टेट खिलाड़ी


समाज और परिवार की रूढ़ियों को तोड़कर फुटबॉल मैदान तक पहुंची हूं। फुटबॉल ही मेरी जिंदगी है और हर मैच के साथ मैं खुद को और बेहतर साबित करना चाहती हूं। ना सिर्फ खुद को बेहतर बनाना है बल्कि आगामी वर्षों में भारत के लिए खेलकर भारतीय फुटबॉल को भी आगे ले जाना है।-पलक, स्टेट खिलाड़ी
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