{"_id":"69863576c43b946f9f046a26","slug":"the-toilets-and-drinking-water-facilities-at-the-government-hospital-faridabad-news-c-25-1-mwt1001-109734-2026-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: सरकारी अस्पताल में शौचालय व पेयजल व्यवस्था बदहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: सरकारी अस्पताल में शौचालय व पेयजल व्यवस्था बदहाल
विज्ञापन
- मरीजों और कर्मचारियों को भुगतनी पड़ रही हैं परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के सरकारी अस्पताल में शौचालयों की गंदगी और पेयजल की खराब व्यवस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। इलाज की आस में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों तथा अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं।
अस्पताल परिसर में स्थित शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई शौचालयों में गंदगी फैली हुई है, बदबू के कारण वहां जाना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत उठानी पड़ रही है। स्वच्छता के अभाव से संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इतना ही नहीं, अस्पताल में उपलब्ध पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर लगे वाटर कूलर और नल या तो खराब हैं या उनसे गंदा पानी आ रहा है। मजबूरी में मरीजों और उनके परिजनों को बाहर से पानी खरीद कर लाना पड़ता है, जबकि सरकारी अस्पताल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है।
तीमारदारों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। केवल कागजी निरीक्षण और आश्वासन तक ही कार्रवाई सीमित रहती है। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को भी इन्हीं समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले स्टाफ के लिए साफ शौचालय और पीने के पानी की सुविधा न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था न होने से संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे इलाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके बावजूद नूंह के सरकारी अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल में शौचालयों की नियमित सफाई, पेयजल की गुणवत्ता जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि मरीजों को सम्मानजनक और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इस बारे में सिविल सर्जन कृष्ण कुमार का कहना है कि इसको दिखाकर ठीक कराया जाएगा । सफाई व पेयजल व्यवस्था की उचित व्यवस्था कराई जाएगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के सरकारी अस्पताल में शौचालयों की गंदगी और पेयजल की खराब व्यवस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। इलाज की आस में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों तथा अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं।
अस्पताल परिसर में स्थित शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई शौचालयों में गंदगी फैली हुई है, बदबू के कारण वहां जाना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत उठानी पड़ रही है। स्वच्छता के अभाव से संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इतना ही नहीं, अस्पताल में उपलब्ध पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर लगे वाटर कूलर और नल या तो खराब हैं या उनसे गंदा पानी आ रहा है। मजबूरी में मरीजों और उनके परिजनों को बाहर से पानी खरीद कर लाना पड़ता है, जबकि सरकारी अस्पताल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है।
विज्ञापन
तीमारदारों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। केवल कागजी निरीक्षण और आश्वासन तक ही कार्रवाई सीमित रहती है। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को भी इन्हीं समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले स्टाफ के लिए साफ शौचालय और पीने के पानी की सुविधा न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था न होने से संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे इलाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके बावजूद नूंह के सरकारी अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल में शौचालयों की नियमित सफाई, पेयजल की गुणवत्ता जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि मरीजों को सम्मानजनक और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इस बारे में सिविल सर्जन कृष्ण कुमार का कहना है कि इसको दिखाकर ठीक कराया जाएगा । सफाई व पेयजल व्यवस्था की उचित व्यवस्था कराई जाएगी।