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Faridabad News: बच्चों में बढ़ रही एक आंख से कम दिखाई देने की समस्या

Tue, 24 Feb 2026 01:28 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:28 AM IST
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The problem of low vision in one eye is increasing in children
कई अभिभावक बच्चों में मंद दृष्टि की समस्या को लेकर अस्पताल पहुंच रहे
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में बच्चों के बीच दृष्टि संबंधी बीमारी मंद दृष्टि (एम्ब्लियोपिया) के मामले सामने आ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल सहित विभिन्न निजी अस्पतालों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें एक आंख से कम दिखाई देने की समस्या है। चिकित्सकों का कहना है कि समय रहते जांच और उपचार न होने पर यह समस्या स्थायी दृष्टि कमजोरी का कारण बन सकती है।



जिला नागरिक अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता गोयल ने बताया कि कई अभिभावक बच्चों में मंद दृष्टि की समस्या को लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। मंद दृष्टि, जिसे लेजी आई भी कहा जाता है, मुख्य रूप से 0 से 7 वर्ष की आयु के बच्चों में पाई जाती है। इस उम्र में आंखों और मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे की एक आंख का नंबर अधिक हो, भेंगापन हो या कोई जन्मजात समस्या हो और उसका समय पर उपचार न किया जाए, तो मस्तिष्क उस कमजोर आंख से मिलने वाले संकेतों को नजरअंदाज करने लगता है। इसके परिणामस्वरूप प्रभावित आंख की दृष्टि धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है।
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उन्होंने बताया कि कई बार बच्चे खुद इस समस्या को पहचान नहीं पाते, क्योंकि दूसरी आंख सामान्य रूप से काम कर रही होती है। ऐसे में अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है। यदि बच्चा टीवी या मोबाइल बहुत पास से देखता है, पढ़ते समय सिर टेढ़ा रखता है, आंखें मिचमिचाता है या बार-बार आंखों में थकान की शिकायत करता है, तो बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
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वहीं एकार्ड अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एके बख्शी ने बताया कि लेजी आई का उपचार संभव है, बशर्ते समय पर शुरुआत की जाए। उपचार में चश्मा लगवाना, मजबूत आंख पर कुछ समय के लिए पैच लगाना (पैच थेरेपी) और विशेष नेत्र व्यायाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी उपचार शुरू किया जाता है, उतने बेहतर परिणाम मिलते हैं।
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