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Faridabad News: छोटे सिलिंडरों के दाम हुए तीन गुने
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-300 रुपये किलो के भाव में सिलिंडर भरवाने पर मजबूर हैं दिहाड़ी श्रमिक
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। क्षेत्र में गैस सिलिंडरों की किल्लत का खामियाजा सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। घरेलू गैस की नियमित सप्लाई प्रभावित होने के कारण छोटे सिलिंडरों की कालाबाजारी तेज हो गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मजदूरों को लगभग 300 रुपये प्रति किलो तक की दर से गैस भरवानी पड़ रही है।
अब तक छोटे सिलेंडरों में 100 से 110 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कीमत तीन गुना तक पहुंच गई है। रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों के सामने सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि उन्हें किसी भी हाल में दो वक्त का भोजन तैयार करना होता है, जिसके चलते वे महंगे दामों पर भी गैस खरीदने को विवश हैं। स्थानीय स्तर पर स्थिति यह है कि गैस की कमी के चलते ब्लैक में सिलिंडर आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। कई दुकानदार अपनी रोजी-रोटी के चलते ब्लैक में गैस खरीदकर छोटे सिलिंडरों में भरकर बेच रहे हैं। इससे मजदूरों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
हालांकि, गैस एजेंसियों का दावा है कि उनके यहां गैस की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को सरकारी नियमों के तहत बुकिंग के लगभग 25 दिनों के भीतर सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि जरूरतमंदों, खासकर मजदूर वर्ग को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है।
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600-700 की दिहाड़ी पर काम करते हैं श्रमिक
सबसे ज्यादा परेशानी उन मजदूरों को हो रही है, जो सुबह से शाम तक 600–700 रुपये की दिहाड़ी पर काम करते हैं। दिनभर की कमाई के बाद भी यदि उन्हें महंगे दाम पर गैस खरीदनी पड़े, तो उनके लिए परिवार का पेट भरना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस की आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
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गैस का वितरण ठीक हो रहा है। अगर कहीं कोई दिक्कत आ रही है तो उसके बारे में उन्हें बताया जाए जो कोई कालाबाजारी कर रहा है उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी इंस्पेक्टर्स को आदेश जारी किए हैं कि कहीं भी किसी प्रकार की ब्लैकमेलिंग नहीं होनी चाहिए अगर होती है तो तुरंत कार्रवाई करें।
-सीमा शर्मा, डीएफएससी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। क्षेत्र में गैस सिलिंडरों की किल्लत का खामियाजा सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। घरेलू गैस की नियमित सप्लाई प्रभावित होने के कारण छोटे सिलिंडरों की कालाबाजारी तेज हो गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मजदूरों को लगभग 300 रुपये प्रति किलो तक की दर से गैस भरवानी पड़ रही है।
अब तक छोटे सिलेंडरों में 100 से 110 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गैस मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कीमत तीन गुना तक पहुंच गई है। रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों के सामने सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि उन्हें किसी भी हाल में दो वक्त का भोजन तैयार करना होता है, जिसके चलते वे महंगे दामों पर भी गैस खरीदने को विवश हैं। स्थानीय स्तर पर स्थिति यह है कि गैस की कमी के चलते ब्लैक में सिलिंडर आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। कई दुकानदार अपनी रोजी-रोटी के चलते ब्लैक में गैस खरीदकर छोटे सिलिंडरों में भरकर बेच रहे हैं। इससे मजदूरों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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हालांकि, गैस एजेंसियों का दावा है कि उनके यहां गैस की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को सरकारी नियमों के तहत बुकिंग के लगभग 25 दिनों के भीतर सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि जरूरतमंदों, खासकर मजदूर वर्ग को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है।
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600-700 की दिहाड़ी पर काम करते हैं श्रमिक
सबसे ज्यादा परेशानी उन मजदूरों को हो रही है, जो सुबह से शाम तक 600–700 रुपये की दिहाड़ी पर काम करते हैं। दिनभर की कमाई के बाद भी यदि उन्हें महंगे दाम पर गैस खरीदनी पड़े, तो उनके लिए परिवार का पेट भरना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस की आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
गैस का वितरण ठीक हो रहा है। अगर कहीं कोई दिक्कत आ रही है तो उसके बारे में उन्हें बताया जाए जो कोई कालाबाजारी कर रहा है उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी इंस्पेक्टर्स को आदेश जारी किए हैं कि कहीं भी किसी प्रकार की ब्लैकमेलिंग नहीं होनी चाहिए अगर होती है तो तुरंत कार्रवाई करें।
-सीमा शर्मा, डीएफएससी