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खोरी गांव के लोग निगम के खाने से नहीं हैं संतुष्ट
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फरीदाबाद। खोरी गांव में नगर निगम द्वारा बेघर हुए लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे खाने को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। लोगों ने खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि निगम द्वारा लोगों को सुबह-शाम दिया जा रहा खाने ऐसा है जो सड़कों पर बैठे लोगों को दिया जाता है। साथ ही लोगों को पेट भर के खाना भी नहीं दिया जाता। इससे लोग काफी परेशान हैं।
गांव खोरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की ओर से एक सप्ताह से तोड़फोड़ कार्रवाई की जा रही है। तोड़फोड़ के बाद बेघर हुए लोगों के लिए राधा स्वामी सत्संग आश्रम में अस्थायी शिविर लगाए गए है। लोग यहां आकर सुबह-शाम भोजन करते हैं। जो लोग आश्रम में नहीं पहुंचते निगम द्वारा गांव लोगों को खाना बांटा जाता है। इसके रोटी, दाल, चावल आदि शामिल होते हैं। इस गांव के लोग सवाल खड़ा कर रहे है। बुधवार जब निगम प्रशासन द्वारा गांव में खाना बांटा जा रहा था तो कई लोगों ने खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
उन्होंने दाल ऐसी है जिसमें सिर्फ पानी होता है। रोटी इतनी हल्की होती है कि एक व्यक्ति का पेट नहीं भर सकता। एक व्यक्ति की खुराक अगर छह रोटी की है तो उसे केवल दो से चार रोटी ही दी जाती है। दोबारा मांगने पर वापस लौटा दिया जाता है। गांव के एक चौक से खाना बांटने की गाड़ी निकलने के बाद जिन लोगों को खाना नहीं मिल पाता। उन्हें दिनभर भूखे रहकर ही गुजारा करना पड़ता है। लोगों ने निगम की इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बेघर हुए लोगों ने कहा कि पहले निगम की उनके घरों को उजाड़ दिया। अब खाने के लिए भी तरसा रहे हैं।
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पुलिस ने कराया भोजन
खोरी गांव में एक बार पुलिस का गांव वासियों के प्रति उदारता का चेहरा देखने को मिला। बुधवार को पुलिस कर्मियों ने गांव में घर-घर जाकर खाना वितरित किया। इसके साथ लोगों के कुशल मंगल रहने की कामना की। पुलिस कर्मियों ने कहा कि हमारा फर्ज है कि बेघर हुए लोगों की सहायता की जाए। इसके साथ उन्होंने लोगों से जगह छोड़ने की भी अपील की।
लोगों से बातचीत
नगर निगम ने पहले घर से बेघर कर दिया। अब खाना भी ठीक से नहीं दिया जा रहा है। दाल, चावल और रोटी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। हम इंसान हैं। कम से कम दो पहर का खाना तो सही दिया जाए। - कादिर, स्थानीय निवासी
आश्रम में तो भर पेट भोजन मिल जाता है लेकिन गांव में खाना बांटने के लिए की गई व्यवस्था बेहद खराब है। यदि दो मिनट खाना लेने के देर कर दिए तो लोगों को गाड़ी के पीछे भगना पड़ता है। - कृष्ण, स्थानीय निवासी
तोड़फोड़ से पहले नगर निगम को लोगों के रहने के लिए उचित प्रबंध करना चाहिए। आज नौबत यहां तक आ गई है कि पेट भर खाने के लिए लोगों को तरसना पड़ रहा है। - आरपी सिंह, स्थानीय निवासी
गांव में लोगों को पानी तक के लिए प्रशासन ने तरसा दिया है। पानी का टैंकर आता है। दो मिनट रुकता और आगे बढ़ जाता है। इससे कुछ लोग पानी भर पाते है तो कुछ लोगों को पानी नहीं मिल पाता। - सपना गुप्ता, स्थानीय निवासी
प्रशासन ने राधा स्वाती आश्रम में इंतजाम कराया है। ऐसे में लोग खोरी के बजाय आश्रम का खाना ले। निगम ने इसके लिए इंतजाम कराया है। - डॉ. गरिमा मित्तल, निगम आयुक्त
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गांव खोरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की ओर से एक सप्ताह से तोड़फोड़ कार्रवाई की जा रही है। तोड़फोड़ के बाद बेघर हुए लोगों के लिए राधा स्वामी सत्संग आश्रम में अस्थायी शिविर लगाए गए है। लोग यहां आकर सुबह-शाम भोजन करते हैं। जो लोग आश्रम में नहीं पहुंचते निगम द्वारा गांव लोगों को खाना बांटा जाता है। इसके रोटी, दाल, चावल आदि शामिल होते हैं। इस गांव के लोग सवाल खड़ा कर रहे है। बुधवार जब निगम प्रशासन द्वारा गांव में खाना बांटा जा रहा था तो कई लोगों ने खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
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उन्होंने दाल ऐसी है जिसमें सिर्फ पानी होता है। रोटी इतनी हल्की होती है कि एक व्यक्ति का पेट नहीं भर सकता। एक व्यक्ति की खुराक अगर छह रोटी की है तो उसे केवल दो से चार रोटी ही दी जाती है। दोबारा मांगने पर वापस लौटा दिया जाता है। गांव के एक चौक से खाना बांटने की गाड़ी निकलने के बाद जिन लोगों को खाना नहीं मिल पाता। उन्हें दिनभर भूखे रहकर ही गुजारा करना पड़ता है। लोगों ने निगम की इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बेघर हुए लोगों ने कहा कि पहले निगम की उनके घरों को उजाड़ दिया। अब खाने के लिए भी तरसा रहे हैं।
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पुलिस ने कराया भोजन
खोरी गांव में एक बार पुलिस का गांव वासियों के प्रति उदारता का चेहरा देखने को मिला। बुधवार को पुलिस कर्मियों ने गांव में घर-घर जाकर खाना वितरित किया। इसके साथ लोगों के कुशल मंगल रहने की कामना की। पुलिस कर्मियों ने कहा कि हमारा फर्ज है कि बेघर हुए लोगों की सहायता की जाए। इसके साथ उन्होंने लोगों से जगह छोड़ने की भी अपील की।
लोगों से बातचीत
नगर निगम ने पहले घर से बेघर कर दिया। अब खाना भी ठीक से नहीं दिया जा रहा है। दाल, चावल और रोटी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। हम इंसान हैं। कम से कम दो पहर का खाना तो सही दिया जाए। - कादिर, स्थानीय निवासी
आश्रम में तो भर पेट भोजन मिल जाता है लेकिन गांव में खाना बांटने के लिए की गई व्यवस्था बेहद खराब है। यदि दो मिनट खाना लेने के देर कर दिए तो लोगों को गाड़ी के पीछे भगना पड़ता है। - कृष्ण, स्थानीय निवासी
तोड़फोड़ से पहले नगर निगम को लोगों के रहने के लिए उचित प्रबंध करना चाहिए। आज नौबत यहां तक आ गई है कि पेट भर खाने के लिए लोगों को तरसना पड़ रहा है। - आरपी सिंह, स्थानीय निवासी
गांव में लोगों को पानी तक के लिए प्रशासन ने तरसा दिया है। पानी का टैंकर आता है। दो मिनट रुकता और आगे बढ़ जाता है। इससे कुछ लोग पानी भर पाते है तो कुछ लोगों को पानी नहीं मिल पाता। - सपना गुप्ता, स्थानीय निवासी
प्रशासन ने राधा स्वाती आश्रम में इंतजाम कराया है। ऐसे में लोग खोरी के बजाय आश्रम का खाना ले। निगम ने इसके लिए इंतजाम कराया है। - डॉ. गरिमा मित्तल, निगम आयुक्त