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खोरी गांव में मकान टूटने के बाद लोग मलबे में टेंट लगाकर रहने को मजबूर
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फरीदाबाद खोरी गांव में तोड़फोड़ के दौरान मकान टूटने पर तिरपाल लगाकर रह रहे लोग ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। दिल्ली-हरियाणा के फरीदाबाद बॉर्डर पर अरावली वन क्षेत्र में बसे खोरी गांव को दो माह पहले नगर निगम ने ध्वस्त कर दिया। लेकिन, बेघर हुए लोग आज भी सरकारी सुविधाएं मिलने की आस लगाए बैठे है। उनका कहना है कि हमारे तो घर टूट गए। अब हमें धूप में बैठाकर खुद अधिकारी छांव ढूंढ़ रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि सरकार की ओर से उन्हें न तो अभी तक फ्लैट मिले और न किराया मिला। इस कारण लोग मजबूरीवश टेंटों में रहने को मजबूूर हैं। खोरी गांव में करीब 10 हजार मकान बने हुए थे। यहां करीब एक लाख से अधिक लोग निवास करते थे। देश के विभिन्न राज्यों से आकर बसे गरीब लोगों ने 40 साल पहले भू-माफिया के चक्कर में आकर लाखों रुपये खर्च कर अपनी जीवन भर की पूंजी से जमीन खरीदी। किसी तरह रहने के आशियाना बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को खोरी गांव में बने करीब 10 हजार अवैध निर्माणों को ढहाने के आदेश दिए थे। 14 जून से खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की।
निगम की ओर से बेघर हुए लोगों को राधा स्वामी आश्रम में अस्थाई आश्रय दिया गया। लेकिन, कुछ समय के लिए था। ऐसे में भूखमरी की कगार पर पहुंचे लोगों ने अपने टूटे आशियानों पर तंबू लगाकर एक बार फिर रहना शुरू कर दिया है। लोगों ने कहा कि नौकरी गई। बच्चों के पेट पालने तक के लिए पैसे नहीं है। सरकार ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं की। मंहगे किराये से बचने के लिए मजबूरीवश उन्हें तंबू लगाकर रहना पड़ रहा है।
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सरकार ने दिया था फ्लैट का आश्वासन
तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री ने खोरी गांव वासियों के लिए घोषणों की थी कि फरीदाबाद में डबुआ कॉलोनी में जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए गए दो हजार के करीब फ्लैट खाली है। जिन्हें खोरी से हटाए जाने वाले लोगों को दिया जाएगा। लोगोें के पास परिवार पहचान पत्र होना जरूरी है तभी उन्हें फ्लैट मिलेगे। लेकिन दो माह बीतने के बाद लोगों को कुछ नहीं मिली।
निगम ने छह माह का किराया देने का दिया था आश्वासन खोखला निकला
खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले नगर निगम ने प्रेसवार्ता कर खोरी वासियों के लिए पुर्नवास पॉलिसी की घोषणा की। अधिकारियों ने कहा कि जो लोग सरकार की पुर्नवास योजना में शामिल होंगे। उन्हें फ्लैट मिलने तक छह माह का किराया दिया जाएगा। जिससे की वह किराये के मकानों में आराम से रह सके। लोगों ने आरोप लगाया कि अभी तक लोगों को न फ्लैट मिले और न किराये पर रहने के लिए किराया दिया गया।
अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं
नगर निगम ने तोड़फोड़ से पहले लोगों को घर देने की घोषणा की थी। हमने फॉर्म भी भरे रहे है। अब तक कुछ नहीं हुआ। निगम ने जानकारी लेने के लिए जाते हैं, तो अधिकारी आश्वासन देने कर लौटा देते हैं। मजबूरीवश टूटे आशियाने की जगह झुग्गी बनाकर रहना पड़ रहा है।
- महबूब, स्थानीय निवासी
नगर निगम ने फ्लैट मिलने तक मकानों का ढाई हजार रुपये किराया देने का आश्वासन दिया था। दो माह से उन्हें अपनी जेब से किराया भरना पड़ रहा था। बच्चों की फीस व अन्य खर्चे काफी बढ़ गए। निगम की ओर से कोई सहायता नहीं मिली।
- शमीम, स्थानीय निवासी
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दिल्ली क्षेत्र में एक जगह किराये पर मकान लिया। अभी रहना भी शुरू नहीं किया था कि मकान मालिक ने किराया मांग लिया। मजबूरी में उसे पूरी किराया देना पड़ा। इसलिए सोचा कि अपने टूट घर में झोपड़ी बनाकर रहना ज्यादा अच्छा है। - असगरी, स्थानीय निवासी
नगर निगम ने तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान धार्मिक स्थल तक को नहीं छोड़ा। जबकि एक स्कूल व पार्क में कोई तोड़फोड़ नहीं की। यदि कार्रवाई की है तो पूर्ण रूप से होनी चाहिए थी।
- सब्बीर, स्थानीय निवासी
अरावली वन क्षेत्र में खोरी के पास होटल और बड़ी-बड़ी सोसाइटी बनी हुई हैं। इन्हें भी सरकार को तोड़ना चाहिए। सरकार गरीब की हितैषी के रूप में केबल दिखावा करती है। असल में यह अमीरों की सरकार है।
- मोमिना, स्थानीय निवासी
आज सरकार फार्म हाउस और होटल मालिकों के लिए अदालत में केस लड़ रही है, तो उनके लिए क्यों नहीं लड़ सकती थी। सरकार की वजह से हालत यह हो गई है, टूटे आशियाने में बैठ कर खाना खाना पड़ रहा है।
- सकीना, स्थानीय निवासी
नगर निगम की ओर से आशियाना फ्लैटों की जल्द मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। फ्लैटों की मरम्मत के बाद आवेदन करने वाले खोरी वासियों को शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- यशपाल यादव, निगमायुक्त
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लोगों का आरोप है कि सरकार की ओर से उन्हें न तो अभी तक फ्लैट मिले और न किराया मिला। इस कारण लोग मजबूरीवश टेंटों में रहने को मजबूूर हैं। खोरी गांव में करीब 10 हजार मकान बने हुए थे। यहां करीब एक लाख से अधिक लोग निवास करते थे। देश के विभिन्न राज्यों से आकर बसे गरीब लोगों ने 40 साल पहले भू-माफिया के चक्कर में आकर लाखों रुपये खर्च कर अपनी जीवन भर की पूंजी से जमीन खरीदी। किसी तरह रहने के आशियाना बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को खोरी गांव में बने करीब 10 हजार अवैध निर्माणों को ढहाने के आदेश दिए थे। 14 जून से खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की।
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निगम की ओर से बेघर हुए लोगों को राधा स्वामी आश्रम में अस्थाई आश्रय दिया गया। लेकिन, कुछ समय के लिए था। ऐसे में भूखमरी की कगार पर पहुंचे लोगों ने अपने टूटे आशियानों पर तंबू लगाकर एक बार फिर रहना शुरू कर दिया है। लोगों ने कहा कि नौकरी गई। बच्चों के पेट पालने तक के लिए पैसे नहीं है। सरकार ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं की। मंहगे किराये से बचने के लिए मजबूरीवश उन्हें तंबू लगाकर रहना पड़ रहा है।
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सरकार ने दिया था फ्लैट का आश्वासन
तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री ने खोरी गांव वासियों के लिए घोषणों की थी कि फरीदाबाद में डबुआ कॉलोनी में जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए गए दो हजार के करीब फ्लैट खाली है। जिन्हें खोरी से हटाए जाने वाले लोगों को दिया जाएगा। लोगोें के पास परिवार पहचान पत्र होना जरूरी है तभी उन्हें फ्लैट मिलेगे। लेकिन दो माह बीतने के बाद लोगों को कुछ नहीं मिली।
निगम ने छह माह का किराया देने का दिया था आश्वासन खोखला निकला
खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले नगर निगम ने प्रेसवार्ता कर खोरी वासियों के लिए पुर्नवास पॉलिसी की घोषणा की। अधिकारियों ने कहा कि जो लोग सरकार की पुर्नवास योजना में शामिल होंगे। उन्हें फ्लैट मिलने तक छह माह का किराया दिया जाएगा। जिससे की वह किराये के मकानों में आराम से रह सके। लोगों ने आरोप लगाया कि अभी तक लोगों को न फ्लैट मिले और न किराये पर रहने के लिए किराया दिया गया।
अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं
नगर निगम ने तोड़फोड़ से पहले लोगों को घर देने की घोषणा की थी। हमने फॉर्म भी भरे रहे है। अब तक कुछ नहीं हुआ। निगम ने जानकारी लेने के लिए जाते हैं, तो अधिकारी आश्वासन देने कर लौटा देते हैं। मजबूरीवश टूटे आशियाने की जगह झुग्गी बनाकर रहना पड़ रहा है।
- महबूब, स्थानीय निवासी
नगर निगम ने फ्लैट मिलने तक मकानों का ढाई हजार रुपये किराया देने का आश्वासन दिया था। दो माह से उन्हें अपनी जेब से किराया भरना पड़ रहा था। बच्चों की फीस व अन्य खर्चे काफी बढ़ गए। निगम की ओर से कोई सहायता नहीं मिली।
- शमीम, स्थानीय निवासी
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दिल्ली क्षेत्र में एक जगह किराये पर मकान लिया। अभी रहना भी शुरू नहीं किया था कि मकान मालिक ने किराया मांग लिया। मजबूरी में उसे पूरी किराया देना पड़ा। इसलिए सोचा कि अपने टूट घर में झोपड़ी बनाकर रहना ज्यादा अच्छा है। - असगरी, स्थानीय निवासी
नगर निगम ने तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान धार्मिक स्थल तक को नहीं छोड़ा। जबकि एक स्कूल व पार्क में कोई तोड़फोड़ नहीं की। यदि कार्रवाई की है तो पूर्ण रूप से होनी चाहिए थी।
- सब्बीर, स्थानीय निवासी
अरावली वन क्षेत्र में खोरी के पास होटल और बड़ी-बड़ी सोसाइटी बनी हुई हैं। इन्हें भी सरकार को तोड़ना चाहिए। सरकार गरीब की हितैषी के रूप में केबल दिखावा करती है। असल में यह अमीरों की सरकार है।
- मोमिना, स्थानीय निवासी
आज सरकार फार्म हाउस और होटल मालिकों के लिए अदालत में केस लड़ रही है, तो उनके लिए क्यों नहीं लड़ सकती थी। सरकार की वजह से हालत यह हो गई है, टूटे आशियाने में बैठ कर खाना खाना पड़ रहा है।
- सकीना, स्थानीय निवासी
नगर निगम की ओर से आशियाना फ्लैटों की जल्द मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। फ्लैटों की मरम्मत के बाद आवेदन करने वाले खोरी वासियों को शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- यशपाल यादव, निगमायुक्त