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विधानसभा में उठा नगर निगम में भ्रष्टाचार का मामला

Mon, 23 Aug 2021 11:30 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 11:30 PM IST
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The matter of corruption in the municipal corporation raised in the assembly
चंडीगढ़/फरीदाबाद। नगर निगम में भ्रष्टाचार का मामला सोमवार को विधानसभा में उठा। मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा द्वारा प्रश्न काल के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा कि बिना काम ठेकेदार को किए गए भुगतान की जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो कर रहा है। वहीं भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए निगम में स्पेशल आडिट कराया जाएगा।
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परिवहन मंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद आरोपी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विधायक नीरज शर्मा की बात को आगे बढ़ाते हुए भाजपा विधायक नरेंद्र गुप्ता ने सदन में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मांग की कि नगर निगमों में हुए भ्रष्टाचार के साथ गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) की जांच भी करवाई जाए। इससे नगर निगम, ठेकेदार और उनको माल आपूर्तिकर्ताओं द्वारा अदा किए गए जीएसटी के आंकड़ों के आधार पर जांच में आसानी रहेगी।
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7 जुलाई, 2020 को फरीदाबाद नगर निगम के पार्षद महेंद्र सिंह, सुरेंद्र अग्रवाल, दीपक यादव व दीपक चौधरी ने लेखा विभाग से मिली जानकारी के आधार पर निगमायुक्त को पत्र लिखकर बताया था कि जिन कार्यों की एवज में निगम ठेकेदार को भुगतान कर चुका है, वे कार्य उनके वार्ड में हुए ही नहीं हैं। निगमायुक्त ने पार्षदों की शिकायत पर नौ जुलाई 2020 को जांच के लिए फरीदाबाद नगर निगम के संयुक्त आयुक्त, मुख्य अभियंता, क्षेत्रीय एवं कराधान अधिकारी की कमेटी गठित कर दी।
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पार्षदों की मांग पर कमेटी में उप महापौर और पार्षद अजय बैसला को भी शामिल कर लिया गया। मुख्य अभियंता ने 18 नवंबर, 2020 को इसकी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें 23,79,72,990 रुपये की नगर निगम को वित्तीय हानि की बात की गई। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर निगमायुक्त ने जेई दीपक कुमार को निलंबित कर दिया और आउटसोर्सिंग के कर्मचारी राजन तेवतिया, पंकज, तसलीम और प्रदीप की सेवाएं समाप्त कर दी। निगमायुक्त ने कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार से मुख्य अभियंता डीआर भास्कर, लेखाधिकारी विशाल कौशिक सहित ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की। इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

वर्जन-
स्पेशल आडिट कराने की घोषणा सरकार पहले भी कर चुकी है। विधानसभा में इस सवाल का जवाब नहीं दिया गया कि बिना काम भुगतान घोटाले के अलावा अन्य भ्रष्टाचार के मामलों को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। घोटाले में लिप्त तीन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने में कार्रवाई नहीं हुई है। - नीरज शर्मा, विधायक कांग्रेस
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