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Faridabad News: धमाके से हॉस्टल की पूरी इमारत हिल गई थी, लगा अब नहीं बचेंगे

Mon, 23 Jun 2025 11:11 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jun 2025 11:11 PM IST
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The entire hostel building was shaken by the blast, it seemed that we would not survive
ईरान से लौटी सानिया ने कहा - हर दिन था दहशत का माहौल
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। ईरान में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाली फरीदाबाद के सेक्टर-23 की सानिया जेहर ने इस्राइल की ओर से ईरान पर हुए हमले को बेहद करीब से देखा है। सानिया ने कहा कि 12 जून की देर रात 3:30 बजे जोरदार धमाके से हॉस्टल की पूरी इमारत हिल गई थी। उसे व अन्य सहपाठियों को लगा कि अब कुछ बचा नहीं है। लेकिन उठकर देखा तो उनके हॉस्टल के ही एक हिस्से के पास बम गिरा था।
ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध के बीच सेक्टर-23 की रहने वाली सानिया जेहर सकुशल अपने घर लौट आईं हैं। सानिया ईरान में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं । सोमवार को अमर उजाला टीम ने सेक्टर-23 में सानिया के घर जाकर उनसे बात की। सानिया ने कहा कि युद्ध के दौरान उन्होंने बमबारी और डर के माहौल को बहुत करीब से महसूस किया।
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सानिया बताती हैं कि सबसे डरावना पल वह था जब पहली बार रात के करीब 3:30 बजे जोरदार धमाके की आवाज आई। पूरी इमारत हिल गई। लगा कि अब कुछ नहीं बचा। उस समय सबसे पहला ख्याल अपने घर का आया। मैंने तुरंत अपने परिवार को कॉल किया। ऐसा लग रहा था कि ये मेरी आखिरी कॉल है। वह कहती हैं कि उस रात के बाद हर दिन यही दुआ की कि किसी तरह भारत वापस लौट सकूं। इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बाधित होने के कारण कई बार परिवार से संपर्क तक नहीं हो पाता था। डर और दहशत का माहौल लगातार बना हुआ था।
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सानिया ने बताया कि भारतीय दूतावास ने ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए लगातार काम किया। हमें तेहरान से निकालकर पहले कोम लेकर गए वहां एक होटल में रखा उसके बाद अगले दिन हमें मशहद ले गए। जब हम मशहद पहुंचे तब पता चला कि हमारे हॉस्टल पर भी हमला हुआ। जिसमें हमारे कुछ कश्मीरी भाई मारे गए। मशहद से फिर हमें एयरपोर्ट ले जाया गया, तब पहली बार ऐसा लगा कि अब वाकई घर जा सकेंगे। शनिवार की रात दिल्ली एयरपोर्ट पर पूरा परिवार लेने के लिए आया, उनको देखते ही रो गई थी। लेकिन अब खुशी है कि अपने घर अपने परिवार के वापस लौट आई हूं।

सानिया ने भारत सरकार से अपील की कि नीट की कट-ऑफ को कम किया जाए ताकि अधिक छात्रों को देश में ही मेडिकल की पढ़ाई का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस आम परिवारों के लिए बहुत ज्यादा है, जिस कारण बहुत से छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों की ओर रुख करने को मजबूर हो जाते हैं।


सानिया के लौटने से उनके परिजन राहत की सांस ले रहे हैं। उनका कहना है कि अब वह चाहती हैं कि सरकार ऐसे कदम उठाए जिससे भविष्य में किसी छात्र को मजबूरी में विदेश न जाना पड़े।
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